January 22, 2021

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अंतराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई पर छत्तीसगढ़ की दर्दनाक स्थिति पर विशेष : छत्तीसगढ में 81 बाघ ?

रायपुर। एसजी न्यूज। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई की पूर्व संध्या पर केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डाॅं. हर्षवर्धन ने घोषणा की है कि बाघों की संख्या दुगुनी करने का टारगेट रखा गया है।

वर्ष 2018 की चल रही प्रति चार वर्ष में होने वाली बाघों की गणना के प्रारभिंक नतीजों के आधार पर सरकार द्वारा बाघों के संख्या बढ़ने का अनुमान घोषित किया गया है। एैसे में छत्तीसगढ़ के वन्यजीव प्रेमियों तथा मीडिया में भारी उत्सुकता है कि अबकी बार छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या कितनी होगी ?

आपको बता दें कि वर्ष 2006 की गणना में 26 बाघ छत्तीसगढ़ में थे जो कि वर्ष 2010 मंे भी 26 रहे परंतु अचानक ही आश्चर्यजनक रूप से वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ में 20 बाघ बढ़कर 46 बाघ हो गये यह बढ़ोत्तरी 77 प्रतिशत की थी। वर्ष 2010 से 2014 के बीच देश में 28 प्रतिशत बाघ बढ़े थे परंतु छत्तीसगढ़ में इस दौरान 77 प्रतिशत बाघ बढ़े। इस पर वन विभाग ने भारी वाह-वाही बटोरी थी।

गौरतलब है कि देश में वर्ष 2010 में 1945 बाघ थे जो वर्ष 2014 में 2491 हो गये, यह बढ़ोत्तरी 28 प्रतिशत होती है। अब चार साल बाद वर्ष 2018 में भी वही 77 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का आंकड़ा वन विभाग बरकरार रखता है, तो छत्तीसगढ़ में 81 बाघ तो निकलने ही चाहिये। उपरोक्त आकड़ों के विपरीत जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में अधिकतम 10 से 11 बाघ ही हो सकते है यानि कि 2014 की गणना से 77 प्रतिशत की गिरावट। अब आने वाला समय, जब बाघों की गणना के आंकड़े राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण घोषित करेगा, तब ही पता चल पायेगा कि 77 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई या 77 प्रतिशत की गिरावट रहेगा।

कुछ जानकारों का कहना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ में 5-7 बाघों से अधिक नहीं हो सकते इसका कारण यह है कि वर्ष 2014 की गणना के दौरान वाह-वाही लुटने के लिए 46 बाघ बता दिये गये थे। वन विभाग की उदासिनता और आलसी के चलते, जंगलों में फील्ड स्टाॅफ की कमी के कारण बाघो का शिकार अंग्रेजों के जमानों के समान बदसूरत जारी रहा और 2014 से 2017 के मध्य बाघों की 17 खाल जप्त करने के प्रकरण छत्तीसगढ़ में दर्ज किये गये। आखिर बाघ मारे गये तभी तो खालें बरामद हुई ?

फरवरी 2018 में भी बाघ के शिकार का गरियाबंद में एक मामला सामने आया है उस बाघ की खाल को भी वन विभाग उड़ीसा से लाना बता रहा था और छत्तीसगढ़ के जिन अधिकारियों ने अपनी फेसबुक के वाल पर उस शानदार बाघ की फोटो लगा रखी थी उन्होनें उसे तत्काल हटा लिया था परंतु राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने वन विभाग के दावों को गलत ठहराकर शिकार किये गये नर बाघ को उदन्ती सीतानदी टाईगर रिजर्व का होना घोषित कर वन विभाग की बोलती बंद कर दी।

वर्ष 2014 की गणना में अचानकमार टाईगर रिजर्व में छत्तीसगढ़ के 27 बाघ बताये गये थे परंतु इन चार वर्षो में वन विभाग के अधिकारियों को छोड़कर शायद ही किसी पर्यटक या ग्रामीण को वहां बाघ दिखा हो। ये बाघ कहां चले गये इस पर कोई जवाब देने को तैयार नहीं है।

परंतु एक बात पक्की है कि वनों में अधिकारियों के सरंक्षण तले अपात्रों को अन्धाधुन वन अधिकार पट्टे दिये जाने और अधिकारियों के ही आर्शीवाद और नजरों तलें हुऐ वन अतिक्रमणों के चलते और बाघों के हो रहे अन्धाधुन शिकार के कारण बाघों की संख्या को दुगुना करने का दावा “हरक्यूलियन टास्क” रहेगा।

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