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आईबीसी संशोधन अध्यायदेश को केंद्र सरकार की कैबिनेट की मंजूरी, दिवालिया हुई कंपनियों के नए मालिकों पर नहीं चलेगा मुकदमा…. कॉरपोरेट और बड़े कर्जदारों को राहत, यह होने जा रहे हैं बदलाव

दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) 2016 में किया जा रहा है संशोधन
कॉरपोरेट और बड़े कर्जदारों को राहत देने की बात,

नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2019। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित संशोधन से दिवालिया कंपनी के पूर्व प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही से खरीददार को सुरक्षा मिलेगी।

यह किए गए हैं बदलाव
संशोधनों के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू होने से पहले किए गए किसी अपराध के लिए कॉरपोरेट कर्जदार की देनदारी नहीं रह जाएगी और अधिनिर्णयन प्राधिकरण द्वारा समाधान योजना को मंजूरी देने की तिथि से ही इस तरह के अपराध के लिए कॉरपोरेट कर्जदार पर मुकादमा नहीं चलाया जाएगा, बशर्ते कि समाधान योजना के परिणामस्‍वरूप संबंधित कॉरपोरेट कर्जदार का नियंत्रण या प्रबंधन एक ऐसे व्‍यक्ति के हाथों में चला जाता है जो न तो:

  • प्रमोटर था या प्रबंधन में था अथवा कॉरपोरेट कर्जदार के नियंत्रण में था अथवा इस तरह के व्‍यक्ति से किसी भी तरह संबंधित था।
  • और न ही कोई ऐसा व्‍यक्ति था जिसके बारे में अपने पास उपलब्‍ध किसी सामग्री के आधार पर संबंधित जांच प्राधिकरण का यह मानना है कि उसने अपराध करने के लिए या तो उकसाया था या साजिश रची थी और उसने संबंधित वैधानिक प्राधिकरण या अदालत में कोई रिपोर्ट पेश की है अथवा कोई शिकायत दर्ज कराई है।

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