May 9, 2021

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एसजी न्यूज़ एक्सक्लूसिव: सट्टा का डिजटल खेल मुंबई से लेकर पूरे देश में फैला, सब को है खबर कमीशन के इस काले खेल का ? अकेले छत्तीसगढ़ में 11 करोड़ का महीने का काला व्यपार!

रीतेश तिवारी ( विशेष सवांददाता ), 24 फ़रवरी 2020. आज हम आप को वो खबर बताने जा रहे है जिसके चर्चे तो आपने हर गली मोहल्ले में सुने होंगे लेकिन कार्यवाही कभी नहीं होते देखी होगी। सट्टा का काला व्यपार जो आज पुरे देश भर में फैला हुआ है। देश की आर्थिक मजबूती कहे जाने वाला शहर मुंबई है जहा से इसकी शुरआत होती है। मुंबई में बैठे सट्टा के सरगना अपना नेटवर्क पुरे देश भर में फैला रखे है वो भी खुलेआम ऑनलाइन वेवसाइटों के नाम से।

सुबह 9 बजे से सट्टा का नंबर लगना चालु होता है जो दोपहर ढाई बजे तक चलता है, और उसके बाद ठीक चार बजे ऑनलाइन के माधयम से रिजल्ट घोषित किया जाता है जिसका नंबर फसा वो सट्टा एजेंटो के पास जा कर अपना चुकारा यानी रुपया ले लेता है. उसके बाद रात का खेल शुरू होता है जिसका रिजल्ट रात 9 बजे घोषित किया जाता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मात्र 500 रूपए देने में अगर सट्टा का नंबर आ जाता है तो ग्राहक को 40 हजार तक देने होते है। दस रूपए में 800 रूपए तक मिलने की बात कही जाती है। हर अंक की जोड़ी पर अलग रकम का सौदा पहले से ही तय रहता है। वॉट्सएप्प पर भी ये सुविधा उपलब्ध रहती है और ऑनलाइन वेवसाइटों पर भी संचालित है। शराब से भी ज्यादा खतरनाक सट्टे का नशा अब युवा पीढ़ियों पर बढ़ता जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग भिलाई रायपुर बिलासपुर राजनांदगांव कवर्धा बेमेतरा कोरबा अंबिकापुर बालोद के साथ-साथ बाकी जिलों में भी बड़ी तेजी से अपना नेटवर्क सट्टा के सौदागरो ने फैला रखा है। अकेले दुर्ग जिले में 80 प्रतिशत मुहल्ले में इनके एजेंट उपलब्ध है और सट्टा का खेल खेला जा रहा है। इस काले गोरख धंधे के खेल में ख़ास बात यह भी है कि जब कभी जिले के पुलिस कप्तान की नई पोस्टिंग होती है तो कुछ दिनों के लिए सट्टा के खेल में विराम लग जाता है. और उसके बाद फिर धड़ल्ले से शुरू हो जाता है यही हाल प्रदेश के सभी जिलों का है । ऐसा नही है कि पुलिस के अधिकारियों को कुछ पता नही है वो कार्यवाही नही करते। जिले के थाना प्रभारी पुलिस अधिकारी अकसर धड़ पकड़ करते है लेकिन सिर्फ खानापूर्ती के लिए क्यो की इनके हाथ सिर्फ कुछ सट्टा एजेंटों तक ही सीमित है जिनके पास दो तीन हजार और सट्टा पर्ची बरामद होता है।

सूत्रों की मानें तो देश भर में सट्टे के इस डिजिटल गोरखधंधे में अरबो रुपय का खेल है और कई खाकी वर्दी से लेकर सफेद पोशाक वाले भी शामिल है । सब का अपना अपना हिस्सा फिक्स है। सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की या कोई और पार्टी सट्टा पर अंकुश लगाना किसी के जद में नही है । ये ऐसा काला व्यपार है जो बिना लागत के करोड़ो का मुनाफा दे रहा है ।सट्टा के इस काले धंधे में खिलाने वाले अरबो कमा रहे तो वही इन्हें खुफिया संरक्षण देने वाले करोड़पति बन गये। बर्बाद हो रहे आज के युवा पीढ़ी जिन पर घर परिवार और समाज चलाने की जिम्मेदारी टिकी हुई है। एक बहुत पुरानी कहावत आज फिर कह रही है जब सईया होये कोतवाल तो डर काहे का। यही कारण है कि आज सट्टे का काला कारोबार छत्तीसगढ़ समेत देश भर में फैला हुआ है।

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