March 8, 2021

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एसजी न्यूज़ की खबर के बाद प्रशासन में मचा हड़कंप, नाबालिक के अपहरण कर दुराचार करने वालों पर हुई एफआइआर। मामले को दबाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को विभाग बचाने में लगा..

दुर्ग। रीतेश तिवारी। नाबालिक आदिवासी बच्ची से गैंगरेप के पुरे गंभीर मामले में हुआ एक दर्दनाक खुलासा। बच्ची को रायगढ़ से अपहरण कर आरोपियों ने यूपी के बांदा जिला और देश के राजधानी दिल्ली में 35 दिन तक किराये के मकान में रखा और किया सामूहिक दुष्कर्म। दो दर्जन से भी अधिक लोगो ने बच्ची से किया हैवानियत। दिल्ली में बच्ची को बेचने के फिराक में थे आरोपी। कई खरीदार पहुंचे थे आरोपियों के पास। बड़ी मुश्किल से आरोपियों के चंगुल से भागी बच्ची को नही मिल रहा था इन्साफ। एसजी न्यूज़ नेटवर्क के खुलासे के बाद आरोपियों के खिलाफ हुआ अपराध दर्ज। आरोपी अभी भी पुलिस से कोसो दूर। महिला बाल विकास विभाग मंत्रालय बाल आयोग राज्य पुलिस और स्पेशल जुनाइल पुलिस यूनिट पर उठ रहे गंभीर सवाल। छत्तीसगढ़ की हजारो बच्चिया आज भी है लापता।

बता दें कि दुर्ग रेलवे स्टेशन में 16 नंबर 2018 को रोते बिलखते एक मासूम बच्ची प्लेटफार्म नंबर दो में बैठी थी। शरीर पर कई जगह जख्म के गंभीर निशान साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे की बच्ची के साथ कोई बड़ी घटना हुयी है। स्टेशन में मौजूद यात्रियों ने चाइल्ड हेल्प लाइन न 1098 में बच्ची के बारे में सुचना दी मौके पर पहुंची टीम ने बच्ची को सीडब्लूसी यानी बाल कल्याण समिति दुर्ग के दफ्तर ले गई जहा सीडब्लूसी अध्यक्ष के आदेश पर पीड़ित बच्ची को बिना मेडिकल कराये बिना जमीनी काउंसिलिंग किये रायपुर स्थित खुला बालिका आश्रय गृह भेज दिया गया। पिछले एक महीने से बच्ची खुला आश्रय गृह में अपने ऊपर बीते दर्दनाक घटना से सहमी डरी रहने को मजबूर थी। रायपुर खुला आश्रय गृह के अधिकारियों ने बच्ची के हालात को देखते हुए पुनः एक बार बच्ची से काउंसिलिंग करने की कोशिस की और दुबारा काउंसिलिंग में बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना होने की पुष्टि हुयी। लेकिन काउंसिलिंग भी सिर्फ खानापूर्ति रही। और पुरे प्रकरण को रायपुर से दुर्ग सीडब्लूसी और महिला बाल विकास विभाग भेज दिया गया। गैंगरेप की घटना की जानकारी लगते ही दुर्ग के सीडब्लूसी और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियो ने पुरे मामले को दबाने का भरकस प्रयास करते हुए पीड़ित बच्ची को रायगढ़ उसके पिता के हवाले मरने के लिए छोड़ कर चैन की नींद लेने लगे। लेकिन एसजी न्यूज़ नेटवर्क लगातार इस पुरे गंभीर मामले में अपनी पड़ताल जारी रखा था। रायगढ़ के महिला बाल विकास विभाग में पदस्थ डीसीपीओ ने पीड़ित बच्ची की विधिवत तीन दिनों तक काउंसिलिंग की जिसके बाद पीड़ित बच्ची ने जो बताया उसे जान कर आप के पैरो तले जमीन खिसक जाएगी। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी कैसे ये मासूम अपना दर्द लिए पिछले एक महीने से दुर्ग रायपुर के प्रशासनिक अधिकारियो के शर्मनाक सरकारी सिस्टम का शिकार होती रही यक़ीनन आश्चर्यजनक है। देश और राज्य में हर रोज इस तरह की हैवानियत भरी घटना घट रही है और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी आला कमान सुकून की सांस ले रहे है ?

पीड़ित बच्ची ने काउंसिलिंग के माध्यम से जो दर्दनाक दर्द बया किये है उसे बता पाने में मै खुद असमर्थ हु लेकिन बड़े प्रशानिक ओहदे पर बैठे उन संवेदनहीन अधिकारियों तक पहुंचना भी जरुरी है शायद उनकी आत्मा उन्हें कुछ बेहतर काम करने के लिए झकझोर दे। पीड़ित बच्ची ने बताया की मेरी माँ का देहांत हो चुका है मै अपने पिता के साथ रहती हु। लगभग दो महीने पहले मै तलाब से नहा कर घर वापस जा रही थी की गांव के ही कुछ लोगो ने मुझे जबरन अपनी गाडी में बैठा लिया जिसमे एक महिला भी शामिल थी। तीन लोगो ने पहले मुझे कानपुर ले गए फिर बांदा जिला में एक कमरे में बंद कर दिया। अपहरण करने वाले आरोपियों ने पहले मेरे साथ जबरजस्ती की उसके बाद कई लोगो ने मेरे साथ बलात्कार किया 15 दिनों तक मेरे साथ रोज जबरजस्ती की जाती थी। मुझे मारा जाता था एक वक्त थोड़ा सा खाना देते थे। बांदा के बाद आरोपियों ने मुझे दिल्ली ले गए जहा बीस दिन तक एक कमरे में बंद रखा वहा भी हर रोज नए लोग आते थे और मेरे साथ जबरजस्ती करते थे। कई बार मुझे बेचने की भी कोशिस की गई। दिल्ली के कई जगहों में मुझे ले जाया गया। लोग मेरी कीमत लगाते थे लेकिन मेरा सौदा तय नही हो पाया बड़ी मुश्किल से में आरोपियों के चंगुल से भाग कर दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंच गई उसके बाद सीडब्लूसी के अधिकारियो ने रायपुर भेज दिया फिर दुर्ग और अब रायगढ़। मुझसे किसी ने मेरी तकलीफ दर्द नही पूछा।

दुर्ग और रायपुर जिले के जिम्मेदार संवेदनहीन शर्मनाक प्रशासनिक अधिकारियों ने तो पीड़ित बच्ची को मरने के लिए उसके पिता के घर पहुंचा कर अपना पल्ला झाड़ लिया था लेकिन रायगढ़ महिला बाल विकास विभाग में पदस्थ डीसीपीओ समेत कई महिला अधिकारियो ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्ची का विधिवत काउंसिलिंग कर बालिका गृह में सुरक्षित रहने का स्थान दिलाया साथ ही आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कराया। आरोपी श्रवण राउत आरोपी बब्बू राउत आरोपी रमिला राउत के खिलाफ धारा 363, 366,376D , 370, 374,342,323, और लैंगिक अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम 6 के तहत अपराध दर्ज हुआ है। फिलहाल आरोपी फरार है।

(1) एक महीने पहले ही जब बच्ची दुर्ग में मिली थी वही मामला दर्ज होना चाहिए था। बच्ची की विधिवत काउंसिलिंग की गई है जिसमे सामूहिक दुष्कर्म की बात सामने आई है। इस दर्दनाक घटना से बच्ची बहुत ही डरी सहमी है। हम लगातार कोशिस कर रहे है बच्ची सामान्य बच्चो के साथ घुल मिल जाए। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर करा दी गई है और जो भी विध अनुसार होगा हम बच्ची के भविष्य के लिए जरूर करेंगे। बच्ची हमारी निगरानी में है और पूणतः सुरक्षित।

श्री दीपक (डीसीपीओ) महिला बाल विकास विभाग रायगढ़ छत्तीसगढ़।

(2) हमने महिला बाल विकास विभाग के मुख्य सचिव समेत दुर्ग रायपुर रायगढ़ कलेकटर एसपी और सीडब्लूसी को पत्र लिखा है। किस अधिकारी की लापरवाही हुई है जवाब मांगा गया है। आयोग ठोस कार्यवाही करेगा। बच्ची को न्याय मिलेगा।

श्रीमति प्रभा दुबे (अध्यक्ष) राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग छत्तीसगढ़।

(3)
नाबालिक बालिका के साथ हुई घटना बहुत सर्मनाक है। इस मामले की खबर एसजी न्यूज़ में आने के बाद मैंने संबंधित दुर्ग, रायपुर एवं रेल्वे जीआरपी में भी बात की थी सभी अधिकारियों ने अपने स्तर और कार्यवाही का मुझे अस्वासन दिया था जिसके बाद एफआईआर हुई किंतु जिम्मेदार अधिकारियों के ऊपर कोई कार्यवाही नही हुई अभी तक, उनपर भी कार्यवाही होना चाहिए।

श्रीमती ममता शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, रायपुर

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