छत्तीसगढ़

कानफोडू डीजे: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका को लिया गंभीरता से…… एजी को कहा शासन से पूछकर बताएं कोर्ट के आदेश पर क्या कार्यवाही हुई.

रायपुर 24 फरवरी 2020. हाईकोर्ट की मनाही के बावजूद रायपुर शहर में बज रहे कानफोडू डीजे के कारण कलेक्टर भारतीय दासन तथा पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका (164/2020) को माननीय मुख्य न्यायाधीश एव न्यायमूर्ति पी.सैम.कोशी की युगल बेंच ने दिनांक 20 फरवरी को गंभीरता से लेते हुए एडवोकेट जनरल को शासन से आवश्यक निर्देश लेने हेतु आदेशित किया है तथा अगली बार बेंच बैठने पर अवमानना याचिका पर सुनवाई हेतु निर्देश दिया. अब एडवोकेट जनरल अगली सुनवाई पर बताएंगे कि शासन ने कोर्ट के पूर्व के आदेश के पालनार्थ क्या कार्यवाही की है.

याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व में एक जनहित याचिका नितिन सिंघवी विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य में 6 दिसम्बर 2016 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आदेशित किया था कलेक्टर और एसपी यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी वाहन पर साउंड बॉक्स रख कर ना बजे. गाड़ियों पर साउंडबॉक्स रखकर डीजे बजाने पर साउंड बॉक्स जप्त करना है और बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के उन्हें नहीं छोड़ा जाना है. साउंड बॉक्स मिलने पर वाहन का रिकॉर्ड रखा जाए. दूसरी बार उसी गाड़ी पर साउंड बॉक्स बजाये जाने पर उस वाहन का परमिट निरस्त किया जावे और बिना उच्च न्यायलय के आदेश के कोई नया परमिट जारी नहीं किया जाये.

याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को बताया गया की कोर्ट के आदेश के बावजूद वर्षभर सड़कों पर डीजे बजते रहते हैं और डीजे की तेज आवाज के कारण से गणेश विसर्जन के दौरान हार्टअटैक से 2 लोगों की मृत्यु हो गई थी. याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि एसपी और कलेक्टर को कोर्ट के आदेश के संदर्भ में ज्ञापन देने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं की तथा किसी भी वाहन से साउंडबॉक्स नहीं जब्त किया गया और ना ही वाहन मालिकों और गाड़ियों का डाटा रखा गया. दूसरी बार भी साउंड बॉक्स रख कर बजने पर परमिट भी निरस्त नहीं किया गया.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रात्री 10:00 बजे के बाद शादियों, जन्मदिन और धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों में डीजे बजने पर उन्हें सीधे जप्त किये जाने के भी आदेश दिए है तथा आयोजक अगर नहीं मानता है तो उसके विरुद्ध कोर्ट में कार्यवाही करने तथा आयोजक के विरुद्ध उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने पर अवमानना का प्रकरण भी दायर करने हेतु आदेशित किया है. उच्च न्यायालय ने गाड़ियों पर लगे प्रेशर हॉर्न और मल्टीटोन हॉर्न लगाने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है तथा ऐसे वाहनों का नंबर और उसके मालिक तथा चालक का डाटा भी रखने को कहा है दोबारा पाए जाने पर वाहन जप्त करने के आदेश दिए हैं तथा ऐसे वाहनों को तब तक नहीं छोड़ा जाना है जब तक के उच्च न्यायालय छोड़ने का आदेश जारी ना करें.

याचिका की तरफ से यह भी बताया गया कि पूर्व में भी तत्कालीन कलेक्टर और तत्कालीन एसपी के विरुद्ध अवमानना स्थानीय निवासी ब्यास मुनि दिवेदी द्वारा याचिका दायर की गई थी. तब प्रशाशन की तरफ से यह बताया गया था कि प्रशासन डीजे के विरुद्ध कार्यवाही कर रहा है. परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हो रही है.

छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति की तरफ से विश्वजीत मित्रा, डॉ राकेश गुप्ता, राम नारायण व्यास, नवमान अकरम हमीद, हरजीत सिंह जुनेजा, शरद शुक्ला, हेमंत बैद, मनीष खेतान अमिताभ दीक्षित ने अवमानना याचिका दायर की है.

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