April 16, 2021

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ग्राउंड रिपोर्ट- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पत्रकार के ऊपर पुलिस और खनिज विभाग के अमला के सामने खनिज माफिया द्वारा किये हमले की पूरी कहानी…अभी भी हत्या के प्रयास की धारा अपराधियों के ऊपर नहीं लगी

(एस के तिवारी की कलम से) देश-प्रदेश में आये दिन खनिज माफियाओं द्वारा पत्रकार, पुलिस और खनिज विभाग हमले होने की ख़बरें आती रहती है.
मध्यप्रदेश में कटनी में एसडीएम के ऊपर हमला हो, भिंड में खनिज निरीक्षक के ऊपर, या प्रशिक्षु आईएएस के ऊपर भी हमला, पडोसी राज्य मध्य प्रदेश में आये दिन ऐसी घटनाएं होती रहती है, पत्रकारों के ऊपर हमले की गिनती आसान नहीं रहती, आये दिन मफियायाओं से पिटते ही रहते हैं.
पहली बार पडोसी राज्य की छाया छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर पड़ी है जब राज्य की राजधानी में राज्य के सुरक्षित क्षेत्र विधानसभा से महज 2 कि.मी. दूर और खनिज विभाग की चौकी से महज ½ किमी दूर स्थित ग्राम सकरी में खनिज माफियाओं ने शिकायतकर्ता पत्रकार के साथ पुलिस और खनिज विभाग के कर्मचारियों के ऊपर हमला बोल दिया और आसपास जमकर उत्पात मचाया. जो प्रदेश के पुलिस प्रशासन की लचर व्यवस्था का द्योतक तथा सरकार के सुशासन के दावे पर बड़ा तमाचा है.

दरअसल 1 मई के दोपहर में पत्रकार व्यास मुनि द्विवेदी अपने घर जा रहे थे उसी दौरान सामने से मुरूम से भरा हाईवा ट्रक आ रहा था सिंगल रोड होने के कारण और ट्रक के द्वारा साइड नहीं दिए जाने के कारण कार और ट्रक में टक्कर हो गई कार नीचे पलट गई. गाड़ी को रूकवाकर पुलिस को फ़ोन कर सूचना दी गई, पुलिस ने टालमटोल करते हुए इसे खनिज विभाग का मामला बता दिया, खनिज विभाग को भी फ़ोन किया गया पुलिस और खनिज में आपसी तालमेल बिठाने में घंटो गुजर गये जबकि घटना से महज ½ किमी दूर ही खनिज चौकी है और 2 किमी पर ही थाना विधानसभा है।
पुलिस और खनिज के अधिकारयों के आने के बाद ट्रक ड्राइवर ने अपने मालिक को फ़ोन लगाकर बात कराई। मालिक धमकी देते हुए पूछा तू कौन है गाड़ी रोकने वाला, पत्रकार डर कर बोला हम खनिज विभाग के साथ है आपकी गाड़ी थाने जाएगी। खनिज विभाग के कर्मचारी पुलिस की गाड़ी में बैठकर ही लिखापढ़ी कर रहे थे,. कुछ देर में एक स्कार्पियो जिसका गाड़ी न. CG 04 H 9441 है जिससे अफरोज ख्वाजा नाम का व्यक्ति के साथ 10-12 लोग उतारते हुए मा बहन की गाली देते किसने शिकायत की है तलवार, राड और लाठी से  पत्रकार पर हमला बोल दिया, दो मौजूद सिपाहियों में से एक ने अपनी जान में खेलकर निहत्थे ही खनिज के कर्मचारियों को बचाते हुए गाड़ी में बंद किया. इस दौरान ½ घंटे तक खनिज माफिया अफरोज ख्वाजा और उसके आदमी मारपीट करते रहे सड़क से आने जाने वालो को भी पीटा।

गब्बर नाम का पुलिस सिपाही जिसने जिसने खनिज विभाग के कर्मचारियों को गाड़ी में सुरक्षित किया, वही पत्रकार को भी बचने की कोशिश कर रहा था जिसके कारण उसे भी कई लाठिया और घुसे लगे लेकिन उसने अपनी परवाह किये बिना, पत्रकार को पुलिस के गाड़ी के अन्दर धकेल कर बैठाया और गाड़ी बंद की उसके बाद गाड़ी लेकर थाने भागा. इधर गुंडों ने पत्रकार की कार में जमकर तोड़फोड़ की. थाने पहुचने के बाद डरे सहमे खनिज के कर्मचारी भाग निकले. इधर अफरोज और उसके आदमी थाने पहुचकर वहा भी पुलिस के सामने पत्रकार को धमकी देते रहे और पुलिस के लोग उसे इज्जत के साथ शांति से बैठने की अपील करते रहे.

सिपाही गब्बर

रिपोर्ट के बाद पत्रकार को मुलाहिजा के लिए जिला अस्पताल भेजा गया जन्हा प्राथमिक जांच के अधिक चोट होने के कारण मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया. इतनी बड़ी घटना होने के बाद 151 लगाकर मामले को रफा दफा करने की कोसिस करते रहे, किन्तु मीडिया का दबाव आने के बाद छोटी-छोटी जमानती धाराए लगायी और सभी मीडिया को गुमराह करते रहे कि मामला वसूली का है उनके पास वीडियो है किन्तु किसी को प्रूफ नहीं दे पाए.

थाना प्रभारी लक्षमण कुमेटी

इधर रात 12 बजे अस्पताल से छुट्टी लेने के बाद पत्रकार अपने घर पंहुचा. घर पर एक रिश्तेदार के साथ सो रहे थे रात लगभग 3 बजे अफरोज के 10—12 गुंडे पत्रकार के घर हमला बोल दिया घर में ताला नहीं खोलने के कारण गाली गलौज करते पूरे परिवार को घर समेत जलाकर मार देने की धमकी देते रहे. कुछ देर बाद वहा से निकल कर घटना स्थल पहुचे जहा कार पड़ी हुए थी, और कार में आग लगा दिए. डरे सहमे लोग घर के दरवाजे रात भर नहीं खोले सुबह थाने में घटना की सिकायत थाने में की गई.

सामाजिक कार्यकर्त्ता ममता शर्मा, राकेश चौबे, उचित शर्मा, संदीप तिवारी, कुनाल शुक्ला एवं शेषनारायण शर्मा के साथ अन्य लोग प्रशासन और पुलिस के अधिकारियो को अवगत कराया जिसके बाद खनिज के कर्मचारियों ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई. प्राप्त खबर के अनुसार सरगना अफरोज,  ट्रक ड्राइवर के साथ 10 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
इधर प्रदेश भर में पत्रकार धरने देने की तैय्यारी में जुट गये है अगर हत्या के प्रयास की धारा 307 पुलिस दर्ज नहीं करती तो पत्रकार सभी जिलों में धरना देने की तैयारी में जुटे है.

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