April 16, 2021

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छत्तीसगढ़ में कृषि सेवा केन्द्रों को सूचना केन्द्र के रूप में किया जाएगा विकसित,

रायपुर(सुयश ग्राम)- कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभागार में आज कृषि विस्तार सेवाएं डिप्लोमा पाठ्यक्रम (देसी) के तहत अध्ययनरत कृषि सेवा केन्द्र संचालकों के साथ एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ के किसानों की कृषि संबंधी आवश्यकताओं एवं समस्याओं को समझने और उनके निराकरण हेतु राज्य के विभिन्न जिलों में खाद, दवा विक्रय करने वाले कृषि सेवा केन्द्रों को सूचना केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही उनके माध्यम से किसानों के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किये जाएंगे। ये कृषि सेवा केन्द्र इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय भी करेंगे। इस आशय की घोषणा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए कृषि सेवा केन्द्र संचालकों को संबोधित करते हुए की।
कुलपति डाॅ. पाटील ने कृषि सेवा केन्द्र संचालकों को संबांधित करते हुए कहा कि दो वर्ष पहले जब विश्वविद्यालय द्वारा कृषि सेवा केन्द्र संचालकों हेतु यह एकवर्षीय पाठ्यक्रम शुरू किया गया तभी से यह विचार चल रहा था कि आप लागों के जमीनी ज्ञान और व्यवहारिक अनुभव का लाभ कृषि एवं किसानों के विकास के लिए किस तरह प्राप्त किया जाए उन्होंने कहा कि आप लोग किसानों एवं कृषि विश्वविद्यालय तथा राज्य सरकार के बीच की कड़ी बन सकते हैं। आप की किसानों तक अच्छी पहुंच है और किसानों को आप पर काफी भरोसा भी है। किसान सबसे पहले अपनी समस्या लेकर आपके पास आते हैं। फसलों पर कीट या बीमारियों के प्रकोप की जानकारी सबसे पहले आप तक पहुंचती है और उसके बाद कृषि विभाग तक। अतः कृषि सेवा केन्द्रों का उपयोग सूचना केन्द्रों के रूप में किये जाने से वास्तविक समय में समस्या की जानकारी प्राप्त हो सकेगी जिससे कि उसका समय रहते प्रबंधन किया जा सके। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एक टैबलेट आधारित साॅफ्टवेयर विकसित किया गया है जिसमें कीड़ों एंव बीमारियों के प्रकोप एवं उससे होने वाले नुकसान की पहचान फोटोग्राफ्स के माध्यम से आसानी से की जा सकती है। कृषि सेवा केन्द्रों को ये टैबलेट उपलब्ध कराये जाएंगे जिससे कि वे किसानों की फसलों पर होने वाले कीट या रोग के प्रकोप की सूचना विश्वविद्यालय तक पहुंचा सकें जिससे समय रहते इनका निदान एवं रोकथाम कर ली जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस योजना को स्वीकृति दे दी गई है और जल्द ही राज्य भर में संचालित पांच हजार कृषि सेवा केन्द्रों के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।
डाॅ. पाटील ने कहा कि कृषि सेवा केन्द्र संचालकों को भारत सरकार की कृषि कौशल विकास परिषद द्वारा संचालित विभिन्न कौशल विकास पाठ्यक्रमों में पंजीकृत कर राज्य शासन की कौशल विकास योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। किसानो के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कृषि सेवा केन्द्रों के माध्यम से संचालित किये जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के नये पाठ्यक्रम के तहत कृषि छात्रों के लिए तीन वर्ष तक खेतों पर काम करना अनिवार्य कर दिया गया है। चतुर्थ वर्ष के छात्र छः महीने की अवधि के लिए कृषि सेवा केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे जिससे उनमें कृषि व्यवसाय उद्यमिता का विकास होगा और वे आगे चल कर स्वयं का कृषि विकास केन्द्र भी स्थापित कर सकंेगे। डाॅ. पाटील ने प्रश्नोत्तर सत्र के अंतर्गत कृषि सेवा केन्द्र संचालकों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाएं डाॅ. ए.एल राठौर ने देसी पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इस एकवर्षीय पाठ्यक्रम के तहत राज्य के 11 जिलों के 627 कृषि सेवा केन्द्र संचालक पंजीकृत हैं जिनमें से आज इस कार्यक्रम में 500 से अधिक कृषि सेवा केन्द्र संचालक शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य भर में पांच हजार से अधिक कृषि सेवा केन्द्र संचालित हैं जिन्हें चरणबद्ध तरीके से इस पाठ्यक्रम से जोड़ा जाना है। देसी कार्यक्रम के प्रभारी डाॅ. एस.एस. टुटेजा ने अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संचालक अनुसंधान सेवाएं डाॅ. एस.एस. राव, संचालक प्रक्षेत्र डाॅ. एस.एस. सेंगर, निदेशक शिक्षण डाॅ. एम.पी. ठाकुर, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. जी.के. श्रीवास्तव, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डाॅ. ओ.पी. कश्यप, स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. विनय पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे।

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