January 28, 2021

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जानिये कर्णाटक से छत्तीसगढ़ आये कुनकी हाथियों की सत्यता- दुर्याेधन अकेले में कुत्ते से भी डरता है

रायपुर/महासमुंद(एसजी न्यूज़) फरवरी 2018 में कर्नाटक से लाये गये 5 कुनकी हाथी सिरपुर के पास बोरिद डेम के पास बने हाथी केम्प में रखे गये है। केम्प को चारों तरफ से 14 वोल्ट के सोलर बिजली करेन्ट के तारों से घेरा गया है। कर्मचारियों को हाथियों के बारे में बताने की मनाही है। वैसे तो जो महावत तथाकथित कुनकी हाथियों के साथ आये थे वे चले गये है। सरगुजा क्षेत्र के 12 महावत आना-जाना करते हैं, अभी कम उम्र के 13 हाथी टेªनर लड़के तमिलनाडू से बुलवाये गये है। आने जाने के कारण से कोई भी कुनकी हाथियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखता। परंतु केम्प के आसपास रहने वाले ग्रामीण फोटो खींचते रहते हैं, और जब से कुनकी हाथी आये हैं तब से कुछ जानकारी रखते है।

1. तीरथरामर– इसे कर्नाटक के जंगल में पकड़ा गया था। कर्नाटक में भी इसका इतना भय था कि वहां के केम्प में भी इससे लोग 50 मीटर दूर ही रहते थे। तीरथराम बाकी चारों हाथियों से हरदम नाराज रहता है और लड़ने को तत्पर रहता है। वन विभाग ने प्रचारित किया था कि तीरथराम जंगली हाथियों को डराता है, बंदी बनाने की दशा में खींचकर ट्रक में चढ़ाता है। तीरथराम का भय यहां के महावतों में भी इतना है कि इसके पांवो में बांधी गई चेन छोटी करके बांधी जाती है। जिससे दुर्भाग्यशाली तीरथराम ढंग से चल भी नहीं पाता – देखिये वीड़ियो। इसे कंट्रोल करने के लिये नुकीले अंकुश से इसका शरीर दबाया जाता है, जिससे दर्द हो और यह कहना माने।

2.दुर्याेधन- इस हाथी को कर्नाटक में 9 लोगों को मारने के आरोप में पकड़ा गया था यह दिखने में पांचो में सबसे बड़ा है। हाल फिलहाल तीरथराम ने इसकी पिटाई की थी, जिससे दुर्याेधन को कुछ खरोचें भी आई। महाभारत में अंत तक हार नीं मानने वाले दुर्याेधन नाम वाला यह हाथी चर्चा अनुसार अकेले में कुत्ते से भी डरता है जबकि विभाग ने प्रचारित किया था कि 35 वर्षीय दुर्याेधन जंगली हाथियों को डराता है।

3.गंगा और युगलक्ष्मी- गंगा को कर्नाटक के जंगल में पकड़ा गया था उम्र 24 वर्ष है। वन विभाग ने बताया था कि यह जंगली हाथियों को बंदी बनाने में सहयोग देती है। 20 वर्षीय युगलक्ष्मी का जन्म कर्नाटक में हाथी केम्प में हुआ था।

4. परूशुराम- 13 वर्षीय परूशराम का भी जन्म कर्नाटक में हाथी केम्प में हुआ था। वन विभाग का कहना था कि ये जंगली हाथियों को बंदी बनाने में सहयोग करते हैं।

शायद यह वन विभाग भी न बता पाये कि कर्नाटक मे इन पांचो ने कितने जंगली हाथी पकड़े या पकड़ने में सहयोग किये ? छोटी-छोटी उम्र के हाथी केम्प में जन्में तथाकथित रूप से बंदी बनाने के सहयोगी 13 वर्ष के परूशुराम और 20 वर्ष की युगलक्ष्मी का सामना क्या कभी जंगली हाथियों से हुआ है ? और अगर होगा तब क्या होगा ? बरहाल इन हाथियों से अभी तक छत्तीसगढ़ के दो महावतोें की हड्डियां टूटने की चर्चा अवश्य ही ग्रामीण करते हैं। वैसे नुकीले अंकुश से दर्द पहुंचाकर इन सभी कुनकियों का कंट्रोल करा जाता है।

ये हाथी कुनकी है या केम्प के सामान्य हाथी यह डिसाइड करना एसजी न्यूज आप पर छोड़ता है परंतु एक बात अवश्य है कि अजय नामक छठा हाथी जिसे अज्ञात कारणों से कर्नाटक से लाया ना जा सका अवश्य ही कर्नाटक में अपने केम्प में इन कुनकी हाथियों से ज्यादा खुश होगा। वह दिन भी दूर नहीं जब वन विभाग को यह न सोचना पड़ जावें कि हर वर्ष के करोड़ों के खर्चे के बजाये जैसे उन्हें लाने का खर्च रू. 25 लाख हुआ वैसे ही 25 लाख और लगा कर इन्हें वापस कर्नाटक क्यों नहीं भेज दिया जावें।

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