January 22, 2021

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जेल से फिरौती मांगने के मामले में गैंगस्टर तपन को दूसरी जेल में किया गया शिफ्ट, कही मामले को दबाने की पहल तो नही।

दुर्ग। रितेश तिवारी। केंद्रीय जेल दुर्ग के बैरक नंबर 8 से गैंगस्टर तपन सरकार के करोड़ो की फिरौती के लेनदेन में पर्दा डालने का जेल विभाग ने कही नया खेल तो नही खेला है।

आरोप है कि मीडिया में खबर लगते और पुलिस की स्पेशल जांच यूनिट को कमजोर करने के लिए आनन-फानन में गैंगस्टर तपन को दुर्ग से 300 किलोमीटर दूर अम्बिकापुर जेल में भेज दिया गया। जेल अधिकारियों कर्मचारियों की मिलीभगत से दुर्ग में पिछले दो सालों से तपन सरकार ने जेल में अपना खुद का साम्राज्य तैयार कर चुका था। जेल से उसने कई नेताओं बड़े उद्योगोपतियो से मोबाइल से संपर्क कर अपना नेटवर्क पूरे प्रदेश में स्थापित कर चुका था।

आरोप लगे है कि उसने दुर्ग जेल में रहते हुए कई फर्जी जमीनों का खरीद फरोख्त भी किया है यहां तक कि जेल में ही स्टाम्प पर लिखाई पढ़ाई भी हुई है और कई करोड़ की फिरौती की रकम भी वसूला है। तपन और उसके गुर्गो का नेटवर्क इतना मजबूत बन चुका था कि जेल में उसे घर से भी बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थी। मोबाइल में बात करना हर रोज नया सिम नया मोबाइल खरीदना उसके लिए आम बात थी। तपन के खिलाफ एक नही दो-दो लोगो ने करोड़ो की वसूली का आरोप लगाया है।

जेल तबादला मजबूरी या मामला दबाने की रणनीति
जेल से फिरौती की शिकायत पर दुर्ग आईजी जांच कर रहे है। लेकिन जांच के दौरान ही जेल विभाग ने गैंगस्टर बन्दी तपन को 300 किलोमीटर दुर्ग अम्बिकापुर जेल भेज कर पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है। अब अगर आईजी को ही तपन से पूछताछ करनी हो तो उन्हें भी अम्बिकापुर जेल जाना पड़ेगा। स्पेशल जांच यूनिट टीम को भी भारी मशकत करनी पड़ेगी। दुर्ग कोर्ट में पेशी के लिए लाने में भी लाखों खर्च होंगे। सुरक्षा के लिए भारी मशकत करनी पड़ेगी। ऐसे में किस तरह की जांच होगी आरोपी गैंगस्टर से क्या पता कर पायेगी दुर्ग पुलिस ये एक बड़ा सवाल है।

जेल अधिकारियों पर कार्यवाही क्यों नही
कमाल का गृह जेल विभाग है। बिना जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत के जेल में इतना बड़ा क्राइम का नेटवर्क कैसे चल सकता है? उन पर कोई कार्यवाही क्यों नही ? जेल अधिकारियों के तबादले की जगह जेल में बंद बंदी का ही तबादला कर दिया। यानी इतना खौफ था दुर्ग जेल में तपन का की उसके जेल में चल रहे काले कारोबार पर लगाम लगा पाना किसी जेल अधिकारी के बस में नही था। अब यकीन से कैसे कह सकते है कि अम्बिकापुर जेल में उसका नेटवर्क कमजोर हो सकता है पहले भी वो वहां रह चुका है और उसका नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। उस पर कैसे रोक लगाई जाएगी ये एक बड़ा सवाल है। आईजी जीपी सिंह की जांच जारी है लेकिन पुलिस के लिए गैंगस्टर के तबादले के बाद मुश्किले और बढ़ गई है।

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