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दुखद: विधवा मां की एकमात्र सहारा बेटी का एक्सीडेंट में देहांत…. संविदा की ऐसी है शासकीय सेवा कि मौत के बाद कफन के सामान के लिए भी दूसरे के सामने फैलाना पड़ता है हाथ…..यही दर्दनाक कहानी है संविदा कर्मचारियों की जब स्वयं कलेक्टर अपने तनख्वाह से किये सहयोग…..

संदीप तिवारी, रायपुर 3 मार्च 2020, एक विधवा मां की एकमात्र सहारा बेटी ऑफिस के काम से निकली और रास्ते में सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई. घर में एकमात्र कमाने वाली इस बेटी की मां के बारे में सोचिये जिसने बेटी तो खोया ही है, उसे अस्पताल के खर्चे और अंतिम संस्कार के लिए भी दूसरे के मुंह देखने पड़ रहे हैं.

लानत है ऐसी शासकीय नौकरी पर जिसमें ना जीते जी नौकरी का भरोसा ना मरने के बाद कुछ मिलना है. जी हां हम कह रहे हैं संविदा कर्मचारियों की दर्दनाक कहानी। ….. यह एकमात्र दुर्घटना नहीं है लगभग हर संविदा कर्मचारी की यही हालात है लगभग आधा जीवन संविदा की नौकरी में लोग काट दे रहे हैं उसके बाद एक दुर्घटना बीमा तक इन कर्मचारियों का नहीं होता है. अस्पताल के खर्चे तक बीमार पड़ने से इन्हें सरकारी खर्चे से नहीं मिलता है. फिर भी लोग संविदा नौकरियों के लिए जूझ रहे हैं. कारण साफ है बेरोजगारी! करें तो करें क्या?

जिन्होंने आधी जिंदगी संविदा की नौकरी कर ली वह और कुछ कर नहीं सकते हैं आज की स्थिति में सरकारें ऐसी तमाम योजनाएं लाती है जो कर्मचारी नहीं उसके लिए भी हेल्थ स्कीम होती है. लेकिन क्या इन कर्मचारियों का कोई हक नहीं बनता??

दरअसल सोमवार को डौंडी जिला बालोद के मकई चौक बनियापारा मोड़ के पास पिकअप की टक्कर से डौंडी मनरेगा शाखा की तकनीकी सहायक रीना केराम की मौत हो गई. जनपद पंचायत में कार्यरत 24 वर्षींय रीना, सोमवार को 11:30 बजे अपनी स्कूटी से सवार होकर फिर ग्राम काले से मनरेगा का काम देख कर लौट रही थी इसी दरमियां दल्ली राजहरा से सब्जी लेकर बिना नंबर की पिक अप आए और ठोकर मार दी जिससे घटनास्थल पर ही रहना केसर का भेजा बाहर निकल गया. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां मृत घोषित कर दिया गया.

रीना की विधमा मां भुवनेश्वरी केराम अकेली है उनके साथ ही रीना रहती थी उसके पिता बृजलाल का पहले ही देहांत हो चुका था. मां का पालन बेटी कमा कर कर रही थी. बेटी की मौत के बाद मां के आंखों में अंधेरा छाया हुआ. बेटी संविदा में जनपद पंचायत में काम करती थी. संविदा की नौकरी तो ऐसी है कि अस्पताल का खर्चा छोड़िए एक दुर्घटना बीमा तक नहीं होता है.

कलेक्टर और अधिकारीयों ने दिया निजी सहयोग
बेसहारा माँ की इस दयनीय स्थिति में विभाग के ही अधिकारियों/कर्मचारियों ने आपस में चंदा कर उसके लिए कुछ सहयोग करने की सोची जिसने स्वयं एक संवेदनशील जिला कलेक्टर संजीव झा ,कलेक्टर जिला बलरामपुर अपनी तनख्वाह से सहयोग किया। कलेक्टर की संवेदनशीलता देखते हुए अन्य अधिकारियों ने भी सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया जिसमें एस. आलोक, सीईओ जिला पंचायत दंतेवाड़ा, श्रीमती नम्रता गांधी सीईओ जिला पंचायत धमतरी, देवनारायण कश्यप सीईओ जिला पंचायत कोंडागांव, गौरव सिंह सीईओ जिला पंचायत रायपुर, इन सभी ने निजी तौर पर सहयोग किया।

साथी कर्मचारियों ने सहयोग के लिए ग्रुप में अकाउंट नंबर शेयर
सहयोगी और साथी कर्मचारियों ने विभागीय व्हाट्सअप ग्रुप में मृतिका की माँ का अकाउंट नंबर शेयर कर रहे हैं जिससे लोग अपनी इक्षा से सहयोग राशि आसानी से दे सकें।

Name- MRS BHUNESHWARI
AC no. 106410033823
IFSC- BKDN0821064
Bank name- Dena Bank Narratola

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