January 23, 2021

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देश के सबसे प्रतिष्ठित सुप्रीम कोर्ट के नए भवन का निर्माण क्यों हो रहा कचरे से?

दिल्ली डेस्क। एसजी न्यूज। देश का सबसे प्रतिष्ठित भवन सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग प्रगति मैदान के पास जहां पहले अप्पू घर हुआ करता था, साल 2015 से वहां पर काम जारी है। 12.19 एकड़ में बन रही ये नई बिल्डिंग पुराने सुप्रीम कोर्ट परिसर से एक अंडर पास के जरिये जुड़ी रहेगी। CPWD द्वारा बनाई जा रही इमारत को ‘ग्रीन बिल्डिंग’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस परिसर के बड़े हिस्से का निर्माण कचरे से हुआ है। जी हां, ये बिलकुल सच है कि सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत सीएंडडी वेस्ट से बन रही है। इस पूरी इमारत में जिन टाइल्स, कर्ब स्टोंस और ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है वो पूरी तरह कचरे को प्रोसेस करके बनाई गई हैं।

कचरे से बनाई जा रही ईंटे

रोजाना 5000 ईंटों का उत्पादन हो रहा है। इसके लिए साल 2015 में दिल्ली की तीनों एमसीडी और एनडीएमसी ने मिलकर शहर की 168 जगहों को इस तरह के कचरे की डंपिग साइट्स के रूप में चुना। इनमें से 20 EDMC के अंतर्गत ही आते हैं और प्लांट को कचरा यहीं से उपलब्ध कराया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के नए परिसर की मुख्य बिल्डिंग का निर्माण पूरी तरह इन्हीं ईंटों से किया गया है। इसके आलावा नॉर्थ एवेन्यू में सांसदों के लिए बन रहे सरकारी आवास के लिए भी इन्हीं ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ईंटों के आलावा कचरे से टाइल्स भी बने जा रहीं हैं, जिनका इस्तेमाल फुटपाथ बनाने में किया जा रहा है।

कचरे से बनी टाइल्स

इस एक ईंट का साइज़ सामान्य लाल ईंट से लगभग पांच गुना होता है और इसकी कीमत 29 रुपये प्रति ईंट तय की गई है। इस ईंट की मजबूती भी सामान्य ईंट जितनी ही है और इसकी उम्र उससे बेहतर ही मानी जाती है. साथ ही ये सीएंडडी वेस्ट को इस्तेमाल में लाकर पर्यावरण को नुकसान से बचाती है और कचरे का प्रबंधन भी करती है, बता दें कि इससे पहले तक सीएंडडी वेस्ट को भी लैंडफिल में डंप किया जाता था। संदीप के मुताबिक देश भर में सिर्फ ऐसे दो ही प्लांट हैं जो इस स्तर पर ये काम कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का निर्माणाधीन नया भवन

सुप्रीम कोर्ट परिसर की इस नई इमारत को ‘ग्रीन बिल्डिंग’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि इस परिसर के बड़े हिस्से का निर्माण कचरे से ही हुआ है।

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