छत्तीसगढ़

नक्सली की गर्भवती पत्नी को अस्पताल पहूंचाकर जवानों ने पेश की मिसाल

जगदलपुर। नक्सल क्षेत्र बस्तर में तैनात सीआरपीएफ के जवानों पर तमाम किस्म के इल्जाम लगते रहे हैं लेकिन इस मिथक को तोड़ते हुए गुरूवार को बल के 195 वीं वाहिनी के अधिकारी व जवानों ने मानवता की मिसाल पेश की। प्रसव पीड़ा से कराह रही नक्सली की गर्भवती बीवी को जब ग्रामीणों द्वारा कावंड से पुसपाल तक लाया गया तो सीआरपीएफ के कमांड अफसर ने उसे फौरन एम्बुलेंस से दंतेवाड़ा जिला अस्पताल भेजा, जहां उसने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।

संभाग मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर माड़ से सटे ग्राम पंचायत हितामेटा के आश्रित गांव पावेल निवासी मिलिशिया सदस्य चेरू पुटरा बदरू को पुलिस ने पखवाड़े भर पहले ही गिरफ्तार किया था। वह अभी जेल में बंद है। उसकी पत्नी कोतली गर्भवती थी।

गुरुवार सुबह उसे प्रसव पीड़ा होने पर आसपास के ग्रामीणों ने परम्परागत रूप से कंधे में कावंड बनाकर दस किलोमीटर दूर पुसपाल लेकर पहुंचे। यहां स्थित सीआरपीएफ 195 बटालियन कैम्प में सीओ राकेश कुमार सिंह ने ग्रामीणों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया लेकिन भाषागत दिक्कत के चलते ग्रामीण उन्हें स्पष्ट रूप से बता नहीं पा रहे थे।

महिला की स्थिति को भांपते हुए फौरन ही एम्बुलेंस के माध्यम से उन्हें दंतेवाड़ा रवाना किया। महिला को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उसका सुरक्षित प्रसव हुआ। उसने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है।

बता दें कि यह इलाका माड से लगा हुआ है। बारिश के दिनों में इस क्षेत्र के गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को पैदल सफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

सीआरपीएफ के द्वारा इसके पूर्व भी अंदरूनी इलाकों में जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को हेलीकाप्टर से उपचार के लिए भेजा गया है। वहीं सुकमा व दंतेवाड़ा जिलों मे बल का स्वयं का अस्पताल भी संचालित हो रहा है, जिनमें ग्रामीणों का निशुल्क उपचार जारी है।

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