छत्तीसगढ़

नेत्रदान के बाद शव को छोड़ा लावारिस, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अफसरों को लगाई फटकार

रायपुर। टाटीबंध निवासी कौशल गुप्ता (43) वर्ष की हार्ट अटैक से मंगलवार शाम को मौत हुई। परिजनों ने नेत्रदान के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के नेत्ररोग विभाग से संपर्क किया। इसमें पुलिस की एनओसी की भी जरूरत होती है। परिजन पुलिस के पास भी गए। तमाम प्रक्रिया समय रहते हो गई। मृत्यु के कारणों को मद्देनजर रखते हुए पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए कहा तो परिजन राजी हो गए।

शव को मर्चुरी में लाया गया और यहीं पर नेत्रदान भी हुआ। परिजन शव को रखकर चले गए। जब बुधवार को पीएम करवाने पहुंचे तो वे शव को स्ट्रेचर पर पड़ा देखकर हैरान हो गए। इसके बाद हंगामा हुआ। हालांकि परिजनों ने खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन समाज के लोगों का कहना है कि नेत्रदान के बाद आंखों पर पट्टी भी नहीं बांधी गई, खून चेहरे पर फैल गया था।

हाथ अकड़ चुके थे, कम से कम शव को फ्रीजर में रखना चाहिए था। कुछ देर कहा-सुनी हुई और 12.30 बजे पीएम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संज्ञान में लिया और स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को तलब किया। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक से जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने कहा गया है।

डॉक्टर की तरफ से कहा गया है कि शव को पीएम के पहले मर्चुरी में नहीं रखा जाता। हालांकि नेत्रदान के बाद आंखों पर पट्टी बांधी जानी चाहिए। मिली जानकारी के मुताबिक नेत्ररोग विभाग के डॉक्टर्स की टीम जो कॉर्नियां डोनेशन के लिए आई थी, यह उनकी चूक है। दूसरा मर्चुरी के डॉक्टर्स की, जिन्होंने शव को व्यवस्थित नहीं रखवाया। भले ही वह फ्रीजर में न रखा जाता, लेकिन उसे स्ट्रेचर पर ही अच्छे से रखा जाना ही चाहिए था।

पीएम करने के बाद ही शवों को फ्रिजर में रखा जाता है. यह गाइड-लाइन का हिस्सा है। किसी भी प्रकार की अमानवीयता नहीं हुई है। फिलहाल अभी तक तो कोई शिकायत अस्पताल प्रशासन को नहीं हुई है। – शुभ्रा सिंह ठाकुर, पीआरओ, डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल

Spread the love