छत्तीसगढ़

परियोजनाओं व कंपनियों के लिए भूमि देने वाले किसानों को मिलेगा 4 गुना मुआवजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की नई सरकार अपने घोषणापत्र में किए गए वादे के मुताबिक सरकारी परियोजनाओं और कंपनियों के लिए अधिग्रहित भूमि का चार गुना मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। जन घोषणापत्र के वादों को पूरा करने के क्रम में जमीन का चार गुना मुआवजा देने के लिए भी गुणा भाग लगाया जा रहा है।

हाल ही में राजस्व विभाग के सचिव ने राज्य के सभी एसडीओ की बैठक लेकर उनसे कहा है कि किसानों की जो भी जमीन अधिग्रहित की गई है उसका पूरा हिसाब निकाला जाए। हालांकि मुआवजा कब तक मिलेगा यह अभी तय नहीं है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कह चुके हैं कि उनकी सरकार ने जो भी वादे किए हैं वह पांच साल के लिए हैं। हर साल बजट में कुछ घोषणाओं को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री के सचिव गौरव द्विवेदी ने कहा कि पहले कार्ययोजना बन जाए फिर हम प्राथमिकता तय कर लेंगे कि कौन सा काम पहले होगा और कौन सा बाद में।

अब तक छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को दो गुना मुआवजा देती रही है। नई सरकार की नीति से उन किसानों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है जिन्होंने हाल के कुछ वर्षों में अपनी जमीन दी है और दोगुना मुआवजा ही हासिल कर पाए हैं। जमीन अधिग्रहण का मुद्दा यहां बेहद संवेदनशील रहा है। छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों, रेल परियोजनाओं, सड़कों के लिए जमकर भूमि अधिग्रहण किया गया है। निजी कपंनियों के लिए भी सरकार भूमि अधिग्रहण करती रही है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में कानून पास किया था जिसमें कहा गया था कि सरकारी भूमि अधिग्रहण के मामलों में जमीन के मालिक को ग्रामीण इलाकों में चार गुना और शहरी इलाकों में दो गुना मुआवजा दिया जाएगा। भूमि के मूल्य का निर्धारण कलेक्टर दर पर किया जाएगा और इसी दर का चौगुना या दोगुना दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ में इस कानून में संशोधन किया गया और कानून पास किया गया कि चौगुना नहीं दोगुना ही मुआवजा देंगे।

अब कांग्रेस सरकार के बनने के बाद केंद्र के कानून को दोबारा अमल में लाने की तैयारी की जा रही है। घोषणापत्र में कांग्रेस ने यह कहा है कि 2013 में जब केंद्र सरकार ने कानून पास किया था उसके बाद से जितनी भी भूमि का अधिग्रहण किया गया है उसका भी चार गुना मुआवजा नई सरकार देगी। यानी चार-पांच साल पहले जिन लोगों की जमीन गई थी उन्हें भी अब और पैसे मिलेंगे।

भूअधिग्रहण का अधिकार राज्य सरकार को

भूमि अधिग्रहण का काम राज्य सरकारें ही कलेक्टरों के माध्यम से करती हैं चाहे भूमि सरकारी परियोजना के लिए ली जा रही हो, सड़क, नहर, रेललाइन, सरकारी कारखाने, खदान आदि के लिए ली जा रही हो या निजी कंपनियों के लिए। जमीन की दर कलेक्टर तय करते हैं और मुआवजा का वितरण भी वही करते हैं। राज्य सरकार जमीन की राशि संबंधित कंपनियों, संस्थाओं या विभागों से वसूलकर किसानों देने के लिए उपलब्ध कराती है।

कानूनी दांव पेंच में उलझा मामला

केंद्रीय कानून में लिखा है कि भूमि का मुआवजा चार गुना तक दिया जाएगा। चार गुना तक यानी इससे कम भी हो सकता है। इसी बिंदु का फायदा छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार ने उठाया। इस कानून में चार बार संशोधन किया गया और आखिर में 2016 में कानून पास कर दिया गया कि मुआवजा चार गुना नहीं दोगुना ही दिया जाएगा। ग्रामीण कृषि भूमि के लिए चार गुना, शहरी डायवर्टेड भूमि के लिए दो गुना और निवेश क्षेत्र की भूमि का मुआवजा स्क्वायर फीट के हिसाब से देने का कानून है। अब केंद्रीय कानून यहां लागू किया जाएगा।

प्रदेश में हजारों हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया

तेजी से विकसित हो रहे छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों का उन्नयन किया जा रहा है। रायपुर-जगदलपुर, रायपुर-बिलासपुर, एनएच-6 पर मंदिर हसौद से सुहेला तक, सिमगा से कवर्धा, सरगुजा संभाग में जगह-जगह नेशनल हाइवे के लिए हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है। सैकड़ों किलोमीटर राज्य सड़कें और ग्रामीण सड़कें भी बन रही हैं या बनी हैं।

सरगुजा और बस्तर में नई रेललाइनें बिछाई जा रही हैं। नई राजधानी के लिए ही 22 गांवों की जमीन ली गई है। जिंदल, बाल्को, सारडा एनर्जी, एनटीपीसी जैसे दर्जनों उद्योगों के लिए भी भूमि ली गई है। हर जिले में औद्योगिक पार्क बनाने के लिए सरकार ने जमीन ली है।

हाईकोर्ट ने भी कहा, चार गुना दें मुआवजा

बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक किसान के मामले में निर्णय सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक उसे भूमि का चार गुना मुआवजा दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर मंडल के चांपा-जांजगीर में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण पर यह निर्णय इस साल जुलाई में दिया था।

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