January 28, 2021

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पुलिस ट्रेनिंग स्कूल राजनांदगांव में कबरबिज्जू की हत्या-दोषियों को सजा दिलाने अन्तराष्ट्रीय एंव राष्ट्रीय संस्थाऐं आई सामने – हो सकती है 3 सालों की सजा।

रायपुर।एसजी न्यूज। छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की हत्या और शिकार के मामले आये दिन सामने आते रहते है। उसमे से पुलिस जवानों द्वारा ये घटनाएं होना समाज मे गलत संदेश देता है। क्योंकि कानून के जानकर और रक्षक अगर आये दिन कानून हाथ मे लेंगे तो आम आदमी से क्या उम्मीद कर सकते हैं। दो वर्ष पूर्व बस्तर के दोरनापाल में CRPF के जवानों ने 15 फीट के अजगर को लाठियों से तब मार डाला जब वह मेमने को निगल रहा था। मार्च 2017 में जंगली सूअर का शिकार करने के मामले में भी वन विभाग ने CRPF के जवानों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया था। दोषियों के खिलाफ प्रभावात्मक कार्यवाही न होने से और उन्हें बचाने के प्रयासों के चलते दूसरे के हौसले बुलंद होते जाते है।

अब राजनांदगांव के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में दो दिन पहले बंदूक की गोली और लाठियों से बरबरतापूर्वक मारे गये कबर बिज्जू को मारने का मामला सामने आया है। मामले में दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग करने के लिये अब अन्तराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठन के साथ स्थानीय वन्यजीव प्रेमी भी आ गये है। गौरतलब है कि कबर बिज्जू मानव पर हमला नही करता, छोटे प्राणी जैसे चूहे इत्यादि खाता है तथा जिस वक्त मारा गया उस उक्त वह आक्रमक तथा हिंसक भी नहीं था और किसी भी कर्मी पर उसने बचाव में हमला भी नहीं किया उसके बावजूद मार डाला गया।

मेनका गांधी की संस्था पीपल फार ऐनिमल की रायपुर इकाई की प्रमुख कस्तूरी बलाल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा सचिव वन, वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव को ई-मेल कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। बलाल ने पुलिस अधीक्षक से भी दूरभाष पर चर्चा की जिसमें कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है। वहीं अन्तराष्ट्रीय संगठन PETA के प्रतिनिधि मीत असहर तथा राजनांदगांव के वन्यजीव प्रेमी राजवीर सिंह ने भी दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

रायपुर के एक वन्यजीव प्रेमी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि कबर बिज्जू की निर्मम हत्या के मामले में उन्होंने राजनांदगांव के उपवनमंडलाधिकारी श्री संदीप से बात की उन्होंने बताया कि मामले में जांच के लिये इनवेस्टीगेशन टीम जा रही है।

आपको बता दें कि कबर बिज्जू अर्थात् CIVETS छोटे प्राणियों जैसे चूहे इत्यादि का शिकार करता है। यह मानव पर हमला नहीं करता। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची दो के भाग दो में 1-A स्थान पर CIVETS अनुसूचित है जिसको मारने पर तीन साल तक की सजा या रू. 25000 जुर्माना या दोनों हो सकता है।

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