January 22, 2021

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प्रदेशभर के अनियमित कर्मचारियों अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर आज से अनिश्चतकालीन हड़ताल पर, शासन की ओर से नौकरी से हटाए जाने कई जिलों में आदेश, कर्मचारियों में बढा रोष

रायपुर। एसजी न्यूज। छत्तीसगढ़ राज्य के अनियमित कर्मचारियों ने अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चतकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। अनियमित कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सरकारी कामकाज पर खासा असर पड़ेगा।

क्रमबद्ध तरीके से कर्मचारी करेंगे विरोध
महासंघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल पहले चरण में 16 से 18 जुलाई तक सभी कर्मचारी अपने जिलों में पूर्ण रूप से काम नहीं करेंगे। इसके साथ ही 19 से 22 जुलाई तक दूरस्थ स्थल से रायपुर आने वाले साथियों के लिए रायपुर में रुकने और खाने का तैयारी करेंगे। इसके साथ ही वह संभाग स्तर पर अपनी हड़ताल जारी रखेंगे। जिसमे काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें जिला स्तर और संभाग स्तर पर प्रदर्शन होगा। उसके बाद भी अगर मांगे नही मानी जाती तो दूसरे चरण में 23 जुलाई को प्रदेश भर के अनियमित कर्मचारी ईदगाह भांटा में एकत्र होंगे और तेलीबांधा तक मौन जुलूस निकालेंगे। छत्तीसगढ़ सयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ के पदाकिारियों का कहना है कि 23 जुलाई को राज्य सरकार यदि हमारी मांगो को नहीं मानेगी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

इन विभागों में पड़ेगा असर

आपको बता दें है कि प्रदेशभर में कुल 54 अलग-अलग विभाग में करीब सवा लाख अनियमित कर्मचारी अपनी सेवा दे रहे हैं। इनके हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य विभाग में स्मार्ट कार्ड सेवा, चिरायु सेवा, स्कूल, आंगनबाड़ी के बच्चों का चेकअप, राष्ट्रीय कार्यक्रम, एमआर कैंपेन का प्रशिक्षण, डिलीवरी, स्वास्थ्य सेवाएं, टीबी मरीजों का दैनिक उपचार, राष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्टिंग आदि कार्य प्रभावित होंगे।

इसके अलावा पंचायत के निर्माण कार्य, मनरेगा के विकास कार्य, प्रानमंत्री आवास, मनरेगा मजदूरी भुगतान, वित्तीय कार्य भी प्रभावित होंगे। साथ ही नगरीय निकायों में सफाई कार्य, कम्प्यूटर कार्य, किसानों को सोसायटी से खाद, बीज, ऋण वितरण भी प्रभावित होगा।

अनियमित कर्मचारियों की क्या है मांगे?

छग संयुक्त प्रगतिशील के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल देवांगन ने बताया कि संघ सेवावृद्धि एवं सेवा से पृथक करने का भय समाप्त करने, वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने, कुछ वर्षों से जिन योजनाओं का आवंटन शासन से विभागों में लिया जा रहा है, उन्हें सेवा में बहाल करने, शासकीय, अर्धशासकीय कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी, अधिकारियों को नियमित करने, आउट सोर्सिंग, ठेका प्रथा पूर्ण रूप से बंद कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की मांग प्रमुख है।

ज्ञात हो कि 3 जुलाई को रायपुर में बढ़ी संख्या में ये कर्मचारी विधानसभा घेराव करने के साथ धरना दिया था जिसके बाद सरकार की तरफ से रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने समश्यायों पर विचार करने 5 दिन का समय मांगा था, लेकिन इसके बाद भी कोई बात नही बनते देख अनियमित कर्मचारियों ने पुनः विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है।

कमर्चारियों को धमकी देना शुरू

विरोध प्रदर्शन कर रहे कमर्चारियों को कई जिलों में प्रशासन की ओर से पत्र जारी कर नौकरी से बर्खास्त करने और उनके जगह नई नियुकि करने के निर्देश जारी कर दिए हैं इसके बाद भी कर्मचारी बिना डरे हड़ताल पर जाने मन बना लिए है। इन कमर्चारियों की संख्या लाखों में है और अगर इनके परिवारों की संख्या मिलाकर देखी जाए तो चुनाव में ये सरकार को बड़ा झटका दे सकते है इसलिए कर्मचारियों को निकालने का निर्णय ऐसे समय मे शायद सरकार के लिए बड़ा जोखिम भरा हो सकता है।

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