छत्तीसगढ़

बघेल सरकार की कर्ज माफी की घोषणा के बाद वकील का नोटिस पहुंचा

दंतेवाड़ा। प्रदेश में नई सरकार आने के बाद किसानों का कृषि ऋण की माफी की घोषणा करते प्रशासन से जानकारी मांगी है। दस दिन के भीतर किसानों के कर्ज माफ कर दिया जाएगा। लेकिन दंतेवाड़ा के किसानों के पास अधिवक्ताओं के माध्यम से नोटिस पहुंच रहे हैं।

गीदम ब्लॉक के स्कूलपारा बुधपदर निवासी दिलीप बारसा नोटिस के बाद परेशान हैं। बारसा ने केनरा बैंक के कासोली शाखा से मछली पालन योजना के तहत मार्च 2017 में 95 हजार रुपए का कर्ज लिया था। यह कर्ज भी कृषि के तहत आता है। ऐसे में बारसा को नोटिस मिलने और बैंक द्वारा कर्ज जमा करने के लिए दबाव बनाया जाना समझ से परे है। जानकारों के अनुसार बैंक से लिए गए ऋण पर 9.45 प्रतिशत की दर से वार्षिक व त्रैमासिक चक्रवृद्धि ब्याज की दर से ब्याज की दर निर्धारित थी। इस ऋण पर रिजर्व बैंक के अनुसार ब्याज की दर में परिवर्तन अनुबंधित था।

मछली पालन के लिए लिया था कर्ज

पीड़ित किसान का कहना है कि उसने बैंक से ऋण मछली पालन की योजना के तहत लिया था। जिसमे मछली पालन के लिए विभागीय लोन दिया जाना प्रस्तावित था। विभाग अधिकारियों ने इस कर्ज पर 75 प्रतिशत पैसा सब्सिडी के रूप में देने की बात भी कही थी। पीड़ित किसान को केवल 25प्रतिशत पैसा ही अदा करना था। लेकिन अब किसान को बैंक द्वारा पूरा पैसा के साथ उसकी ब्याज भी जमा करने को कहा जा रहा है। जबकि छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने घोषणा की है कि किसानों के दो लाख रुपये तक के ऋण को सरकार माफ कर देगी। इस घोषणा के बाद भी किसान को इस तरह पीड़ित किया जाना और नोटिस दिया जाना समझ से परे हैं।

किसान को धोखे में रखा जा रहा

इस मामले में सरपंच संघ के सचिव राजेश कश्यप का कहना है कि मत्स्य विभाग व बैंक दोनों ने मिलकर किसानों को धोखे मे रखा है। किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक भी नहीं थे। पर मतस्य विभाग व बैंक दोनों ने मिलकर जबरदस्ती अपनी कोरम पुरा करने के लिए मछली पालन के नाम से किसानों को इस योजना से जोड़ दिया। कश्यप के मुताबिक इस योजना में भी 75 प्रतिशत सब्सिडी राशि का भुगतान मत्स्य विभाग द्वारा तथा 25 प्रतिशत अंशदान को किसान द्वारा 11माह बाद (6 माह या 1वर्ष ) किश्तों में पांच वर्ष तक भुगतान करने की योजना बनाया था। कश्यप का कहना है कि केनरा बैंक कासोली एवं मत्स्य विभाग द्वारा किसानों को घर जा-जाकर मछली पालन के नाम पर लोन दिया था। लेकिन जब मतस्य विभाग द्वारा सब्सिडी का पैसा बैंक को जमा नहीं किया गया तब बैंक किसान को रुपए लौटाने के लिए दबाव बना रहा है।

इनका कहना है

इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मामले को देखना पड़ेगा। इसके बाद ही कुछ बता पाउंगा।

-असलम खान, जिला मत्स्य अधिकारी

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