April 16, 2021

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बाइपास रोड किनारे चल रहा कृषि जमीन को परिवर्तित करा बिना डाईवर्टेड किए अवैध प्लाटिंग…एस डी एम ने दि कड़ी कार्यवाही की चेतावनी

बालोद। शहर के पाररास बाइपास के पास खसरा नंबर 68/1 और 66/2 बालोद पटवारी हल्का नंबर 22 में कृषि भूमि को कांट कर धड़ल्ले से प्लाट डायवर्टेड किया जा रहा है। बालोद जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में भूमाफियाओं की सक्रियता कम नही हों रही है राजस्व विभाग के पटवारी व उप पंजीयक के मिलीभगत से लगातार अवैध प्लॉटिंग के काम को अंजाम दिया जा रहा है कुछ माह पूर्व बालोद एसडीएम ने करीब दर्जन भर से अधिक खसरा नंबर के जमीनों में अवैध प्लाटिंग के शिकायत पर इनकी रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। लेकिन भूमाफियाओं द्वारा इसका भी तोड़ निकालकर किसी नए किसान की जमीन का सौदा कर एक बड़े भूखंड को कृषि कार्य से गैर कृषि कार्य या एक मकान निर्माण के नाम पर जमीन को परिवर्तित( डायवर्शन) कर सीधे अधिकारियों से मिलीभगत कर जमीन खरीदी बिक्री कार्य को अंजाम दिया जा रहा है जिसके चलते इन दिनों जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रो में अवैध कालोनियों का निर्माण तेजी से जारी है।
कोलोनाइजर एक्ट का उलंघन कर काट रहे जमीन
शासन के अनुमति के बिना ही कृषि योग्य भूमि को ये दलाल किसान से खरीदकर प्लाट काट रहे हैं तथा एक ही जमीन को टुकड़ों में दर्जनभर से अधिक लोगों को बेच रहे हैं।जबकि कोलोनाइजर एक्ट के अंतर्गत बिना कोलोनाइजर लाइसेंसके इस तरह के खेती जमीन को सिर्फ परिवर्तित कर टुकडो में बेचना पूरी तरह से गैर कानूनी कार्य है।यही नहीं नगर सहित जिले में जितनी भी जमीनों की खरीदी बिक्री हो रही है,उनमें राजस्व विभाग, टाऊन व कंट्री प्लानिंग कार्यालय और नगर पालिका में आवेदन देकर औपचारिकता निभा देते हैं। प्लाटिंग के लिए कहीं से भी कोई अनुमति नहीं मिली है। नगर व आसपास के किसी भी गांव में जमीन प्लाटिंग की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके बेधड़क अवैध प्लाटिंग जारी है। मतलब जिला प्रशासन नाक के नीचे ही अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं बावजूद इसके जिले के पंजीयन व राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियो की मिलीभगत से कारोबार धड़ल्ले से से चल रहा है। जिसका खामियाजा आम जनता के साथ साथ शासन को भी ये दलाल करोडो रूपये का चुना लगाया जा रहा है बावजूद इसके अधिकारी कार्यवाही करने के बजाय मौन साधे बैठे है।
सुविधाओं के नाम पर बिछा दी जाती है मुरुम
नगर में अवैध प्लाटिंग का धंधा काफी वर्षो से चल रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षो में कई और भूमाफिया की सक्रियता के चलते नगर के कोने कोने में प्लाटिंग का कार्य तेजी से बढ़ा है लगातार प्लाटिंग होते देख सीधे सादे लोग दलालों के चक्कर में जमीन की खरीदी तो कर लेते हैं, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं मिलती। दलालों द्वारा इन्हें आकर्षित करने 10-15 फीट की सड़क बनाकर उसपर मुरुम बिछा दिया जाता हैं लेकिन जमीन खरीदने के बाद वर्षों तक कॉलोनी के रहवासियों को बिजली, पानी, सड़क, नाली और अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
आवैध प्लॉटिंग करने वालो पर पालिका भी मेहरबान
अवैध प्लाटिंग का खेल शहर के साथ गांवों में भी जारी है। इस पर कार्रवाई के लिए दो विभाग मौजूद है, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं कर रहा। नगरीय क्षेत्र में हो रहे अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई करने नगर पालिका के पास भी अधिकार है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग पर राजस्व विभाग द्वारा कार्यवाही की जा सकती है। दोनों विभाग के अधिकारी हर बार आश्वासन तो देते हैं कि कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कार्रवाई तो दूर नोटिस तक नही दी जाती है। जिसके चलते बालोद जिले भर में चल रहे अवैध प्लाटिंग पर अब तक शिकंजा नही कसा जा सका है जबकि इस पर बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।
किसी भी दलाल के पास नहीं है कालोनाईजर लाईसेंस -जिनके द्वारा जमीनों का क्रय विक्रय किया जा रहा है उनमें से किसी के पास भी चाहे वो भूस्वामी हो या जमीन दलाल किसी के पास भी कालोनाईजर लाईसेंस नहीं है जबकि छ.ग.शासन के द्वारा प्लाट कटिंग कर विक्रय करने के लिए चाहे वो व्यक्ति जो भी हो उसके पास कालोनाईजर लाईसेंस का होना अनिवार्य होता है जिसमे शासन के नियमनुसार प्लाट कटिंग करने वाले व्यक्ति को या भूमि स्वामी को सड़क,बिजली,पानी,निकासी नाली,खेल मैदान आदि के लिए जमीन का एक निश्चित प्रतिशत भूभाग निर्धारण अनिवार्य है इसके बाद भी लगातार छोटे छोटे टुकड़े का नकल धड़ल्ले से राजस्व विभाग के कर्मचारी अधिकारी के द्वारा दिया जा रहा है बालोद शहर व इसके आस पास के क्षेत्रो में की जा रही अवैध प्लाटिंग में भुमाफियायो एवं प्रशानिक मिली भगत के चलते शासन के नियमो की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही है

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