January 27, 2021

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ब्रेकिंग न्यूज: महिला आरक्षक यौन उत्पीडन मामले में आईजी पवन देव की मुश्किल बढ़ी, हाईकोर्ट ने आईजी पवन देव को राहत देने वाली कैट द्वारा पारित आदेश पर लगाई रोक।

रायपुर/ बिलासपुर।एसजी न्यूज, बहुचर्चि आईजी पवन देव मामले में आज माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण कैट द्वारा आईजी पवन देव के पक्ष में दिए गए आदेश पर पूर्णतः रोक लगा दी है।

ज्ञात हो कि आईजी पवन देव द्वारा प्रताड़ना के पश्चात एक महिला कॉन्स्टेबल ने आईजी पवन देव के खिलाफ कार्यवाही की मांग की थी जिसके पश्चात श्रीमती रेणु पिल्लई IAS की अध्यक्षता में गठित इंटरनल कंप्लेंट कमेटी द्वारा जांच की गई थी। इस कमेटी ने आईजी पवन देव पर लगाए यौन उत्पीडन के आरोप को सत्य पाया था एवं दिसंबर 2016 में रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी गई थी। उस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं होने पर पीड़िता ने माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कि थी, जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने 45 दिनों के भीतर आईजी पवन देव पर कार्रवाई करने का आदेश पारित किया था। इसी बीच सरकार ने आईजी पवन देव के खिलाफ अप्रैल 2018 में एक नई चार्जशीट जारी कर दी ताकि दिसंबर2016 की रिपोर्ट का महत्व खत्म हो जाए, जो कि लैंगिक उत्पीडन एक्ट 2013 के भी विरुद्ध है।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में लंबित प्रकरण में आईजी पवन देव ने यह प्रार्थना की थी कि सरकार द्वारा अप्रैल 2018 में जारी चार्जशीट खारिज की जाए। पवन देव द्वारा पीड़िता को उक्त प्रकरण में पक्षकार भी नहीं बनाया गया था। अप्रैल 2018 में जारी जारी चार्जशीट पर स्टे मांगने हेतु दायर अंतरिम आवेदन पत्र पर बहस करते समय आईजी पवन देव ने दिसंबर 2016 की रिपोर्ट पर हो रही कार्यवाही पर स्टे का आदेश प्राप्त कर लिया था।

आईजी पवन देव के पक्ष में अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ पीड़िता ने माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में प्रकरण दायर किया था जिसे आज माननीय न्यायालय ने स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब पेश करने का आदेश पारित किया है। साथ ही आईजी पवन देव को भी नोटिस जारी किया था।

प्रकरण की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि सरकार पवन देव को बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है तथा पवन देव द्वारा प्राप्त आदेश माननीय न्यायालय द्वारा पूर्व में 45 दिन के भीतर कार्यवाही करने के आदेश से बचने के लिए प्राप्त किया गया है वह भी अवैध है।

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 11 जुलाई के पूर्व ग्रह सचिव एवं DGP को पवन देव के विरुद्ध की गई कार्यवाही से अवगत करने हेतु शपथ पत्र दाखिल करने निर्देशित किया है ।

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