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भाजपा के शासन में प्रशासनिक आतंकवाद के शिकार हुए आईएएस अधिकारी शिव अनंत तायल पर कांग्रेस की अभी तक नही पड़ी नजर, इन्होंने पंडित दीनदयाल पर उठाए थे सवाल..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार में किस कदर प्रशासनिक आतंकवाद था इसका सबसे बड़ा ज्वलंत उदाहरण एक भारतीय प्रशासनिक सेवा के पीड़ित अधिकारी ही हैं। संभवतः पिछली सरकार में छोटा अधिकारी या बड़ा आम आदमी हो या खास किसी को सरकार के खिलाफ बोलने की इजाजत नही थी। अगर किसी ने सच्चाई बोलने की हिम्मत जुटा ली तो उसका खामियाजा भुगतना तय था।

इसी कड़ी में भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अफसर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर सवाल उठाने की सजा मिली थी। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने आईएएस शिव अनंत तायल को सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणी उन्हे बहुत महंगी पड़ी। उन्हें यह अंदाजा नही रहा होगा कि सरकार संघ से जुड़े नाम पर सवाल करते ही बवाल मचा देगी।

आईएएस शिव अनंत तायल ने भाजपा के पितृपुरुष माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय को लेकर अपने फेसबुक पोस्ट में कुछ सवाल पूछे थे। जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से जिला पंचायत कांकेर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के पद से हटाते हुए मंत्रालय में अटैच कर दिया गया था। इतना ही नही मुख्यालय में उनके साथ इस तरह व्यवहार हो रहा था जैसे कोई अपराध करके आये हों। अनेक दुर्भाववनाओ का शिकार हुए।

क्या था आईएएस शिव अनंत तायल का फेसबुक पोस्ट

दरअसल आईएएस ने फेसबुक पर एक पोस्ट में जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की उपलब्धियों पर सवाल उस समय पूछे थे, जब समय देश भर में पंडित दीन दयाल का जन्मशताब्दी वर्ष मनाया जा रहा था

शिव अनंत तायल ने फेसबुक पोस्ट में पूछा कि कोई बताए कि दीनदयाल उपाध्याय की क्या उपलब्धि रही? इस पोस्ट के सामने आने के बाद सियासी हंगामा मच गया। तायल के पोस्ट पर भाजपा के आला नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी।
हालांकि सवाल गलत नही था क्योंकि इंटरनेट में भी पंडित दीनदयाल की उपलब्धि खोजना थोड़ा कठिन है। अगर किसी आईएएस ने अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए यह पूछ भी लिया तो सरकार उन्हें बता सकती थी। हो सकता है समारोह के दौरान कही कुछ बोलने वाले रहे हो और जानकारी इकट्ठा कर रहे हों, और अपने फेसबुक पोस्ट से परिचित मित्रों से जानकारी की उम्मीद में यह पोस्ट डाल दिया हो। लेकिन चूंकि सवाल पित्र पुरुष से था इसलिए भाजपा को नागवार गुजरा और उसका परिणाम यह हुआ कि पूरे भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक संविदा बड़े बाबू के इशारे पर एक आईएएस को प्रताड़ित किया जाता रहा।

अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री भूपेश भघेल की नजर इन पर कब पड़ती है, वैसे नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ऐसे इमानदार अधिकारियों को खोजकर लगातार अपनी टीम में शामिल कर रहे हैं।

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