छत्तीसगढ़

मंत्रीमंडल को लेकर भूपेश बघेल ने कहा-‘ वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद ही तय हुए है नाम’

रायपुर। मंत्रीमंडल के गठन के कई बड़े नेताओं को उभरकर आ रही नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि संगठन के सभी वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करने के बाद ही मंत्रीमंडल का गठन किया गया है। इसमें क्षेत्रीयता के साथ-साथ सामाजिक संतुलन का भी ध्यान रखा गया है। हर वर्ग को समायोजित करते हुए सरकार में प्रतिनिधित्व देने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि कहीं यदि क्षेत्रीय असंतुलन की स्थिति बनी, तो सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर स्थान दिया गया।

शपथग्रहण के बाद राजीव भवन में कांग्रेस की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने आए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि-प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक थी। 2018 के चुनाव में अपार सफलता की बधाई दी गई। 2019 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में मतदाता सूची में पुनरीक्षण शुरू हो रहा है, उसमें विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। जहां बीएलए नहीं हैं, वहां नियुक्ति की बात कही गई है। 2019 के चुनाव नजदीक है। अप्रैल में प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अब तक यही रिकार्ड रहा है कि प्रथम चरण में ही छत्तीसगढ़ में चुनाव होता है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में छत्तीसगढ़ में मतदान होगा। पहले से ही तैयारी करनी होगी।

भूपेश बघेल ने कहा कि बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ है कि जिस तरह से विधानसभा स्तर पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया था, उसी तरह का आयोजन लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से फिर से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी चयन में भी कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।

राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े विधानसभा अब उन्हीं के नेतृत्व में लड़ेगे लोकसभा चुनाव

भूपेश बघेल से जब पूछा गया कि विधानसभा चुनाव आपके नेतृत्व में लड़ा गया था, क्या लोकसभा चुनाव का नेतृत्व भी आप करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि- विधानसभा चुनाव कांग्रेस संगठन ने लड़ा था, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे थे। लोकसभा चुनाव का नेतृत्व भी राहुल गांधी ही करेंगे।

अध्यक्ष पद किसी अन्य नेता को सौंपा जाए- भूपेश बघेल

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि मैंने कांग्रेस आलाकमान से आग्रह किया है कि अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी और को सौंप दी जाए। बघेल ने कहा है कि- चूंकि सत्ता चलाने की बड़ी जिम्मेदारी मुझे सौंप दी गई है, ऐसे में संगठन की जिम्मेदारी किसी दूसरे साथी को दी जानी चाहिए, जिससे संगठन का काम भी बदस्तूर चलता रहे। जैसा निर्देश होगा हम उसका पालन करेंगे।

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