April 16, 2021

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मध्यप्रदेश में अफसरशाही बेलगाम, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री है परेशान तो जनता का कैसे होगा काम!

भोपाल (सुयश ग्राम) वैसे तो हर वक़्त अफसरशाही के आरोप प्रत्यारोप लगते रहते हैं किन्तु इया बार जो आरोप मध्यप्रदेश की अफसरशाही पर लगा है वह ज्यादा गंभीर है. इस बार आरोप कोई और नहीं बल्कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिह ने खुद लगाया है. सिविल सर्विस डे के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईएएस लॉबी की गुटबाजी की तुलना भारत पाकिस्तान के युद्ध से कर राजनेतिक प्रशासनिक हलको में सनसनी फैला दी। जहां शिवराज के इस हमले से प्रदेश के मुख्य सचिव भी बगले झाकते नजर आये.

इसके पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष अमित शाह ने भी पिछले साल ये कहकर भाजपा सरकार के होश उड़ा दिए थे कि मध्यप्रदेश में नौकरशाही हावी है लेकिन ये आरोप नए नही थे पिछले 14 सालों में भाजपा के ज्यादातर मंत्री संगठन की बैठकों में सार्वजनिक मंचो पर इसी बेलगाम नौकरशाही को कटघरे में खड़े कर चुके थे। आखिरकार खुद मुख्यमंत्री ने मान लिया कि मध्य प्रदेश में नौकरशाही हावी है और गुटों में बंटी हुई है।र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आइएएस और आईपीएस लॉबी की अंदरूनी कलह को जगजाहिर कर दिया। उन्होंने कहा कि सिविल सर्विसेज के अफसरों में ईगो बहुत होता है, नसीहत देते देते ये तक कह डाला कि अधिकारियों की लड़ाई उन्हें भारत पाकिस्तान के युद्ध जैसी लगती है।
..वैसे ये पहली बार नही है जब नौकरशाही पर कमजोर पकड़ के आरोप झेल रही प्रदेश के मुखिया ने सार्वजनिक मंच से नौकरशाहों को कोसा हो। पिछले साल जुलाई में मुख्यमंत्री ने इसी बेलगाम नौकरशाही को लेकर दों केन्द्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में कहा था कि अगर आईएस परिणाम नही लाये तो उन्हें उल्टा लटका दूंगा। इससे पहले संघ और भाजपा की बैठकों में शिवराज पर हमले इसी नौकरशाही के जरिये किये गए। उनपर आरोप लगते आये हैं कि उनका रवैया नौकरशाही के लिए लचीला है जिसके चलते प्रदेश में सरकार की पकड़ ढीली होती का रही है। लेकिन अब तक मुख्यमंत्री इन मंचो पर नौकरशाही का बचाव करते नजर आए, लेकिन ये बयान विपक्ष समेत उनके मंत्रियों के आरोपों को सही साबित करता नजर आ रहा है।
..दरअसल मध्यप्रदेश की लचर नौकरशाहीओर अफसरों की मनमानी के चलते प्रदेश तमाम विधायक और मंत्री परेशान है। यहां तक कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने कई बार मुख्यमंत्री के सामने बेलगाम नौकरशाही का मामला उठाया।
पिछले साल मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक में सरकार की वरिष्ठ मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने मुख्यमंत्री के सामने सीधे मुख्य सचिव पर हमला बोला था और भरी मीटिंग में इन अफसरों की जवाबदेही तय करने की बात कही थी। वहीं कद्दावर मंत्री भी लाचार नौकरशाही की पीड़ा को छुपा नही पाए और 24 जून को प्रशासन अकादमी में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत के सामने अफसरों को जमकर फटकार लगाई थी, उनका आरोप था कि अफसरों और कर्मचारियों की मानसिकता के चलते जनता को योजनाओ का लाभ नही मिल पाता। जाहिर है ऐसे में मुख्यमंत्री के इस बयान से विपक्ष को कहने का मौका मिल गया है कि ये सरकार नही एक सर्कस है।

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