January 27, 2021

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महासमुंद में हाथी की मौत का कारण बना करेंट! छत्तीगढ़ में एक माह के भीतर 3 हाथियों की मौत

महासमुंद : सिरपुर वन परिक्षेत्र में करंट से आज सुबह एक 15 वर्षीय नर हाथी की मौत हो गई। सूचना पर वन अमला सहित वाइल्ड लाइफ और पुलिस अधिकारी ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार सिरपुर के ग्राम केशलडीह वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक 53 में एक खेत में एक 15 वर्षीय दंतैल हाथी का शव मिला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग और पुलिस को दी। बताया जाता है कि दंतैल हाथी की लंबाई 6.20 मीटर, गोलाई 4.50 मीटर और ऊंचाई 2.60 मीटर है।

शाम तक हाथी का पोस्टमार्टम का पोस्टमार्टम किया गया। जिसकी रिपोर्ट खबर लिखने तक प्राप्त नही हो सकी है लेकिन हाथी की मौत करेंट होना बताया जा रहा है।

महासमुंद डीएफओ एसजी न्यूज से बात करते हुए कहा हाथी की मौत करेंट से होना प्रतीत होता है। पीएम रिपोर्ट आने पर ही मौत की सही जानकारी मिल पाएगी।

250 में में से 4 हाथी मारे 2 माह के भीतर बड़ी बात यह है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 250 हाथी होने की उम्मीद है जिसमे से 3 हाथियों की मौत एक महीने में हुई है। इसके साथ ही चौथी मौत 10 मई को 2 माह पहले ही हुई है।
1. 10 मई को बागीचा रेंज में हाथी की मौत हुई कारण पहाड़ से गिरना बताया गया जो की सामान्यतः होता नही।
2. दो हफ्ते पहले धरमजयगढ़ में हाथी की मौत हुई।
3. उसी रेंज में 4 दिन पहले एक और हाथी की मौत हुई।
4. आज महासमुंद में एक हाथी की मौत हुई

ज्ञात हो कि हाथी का शव वन विकास निगम क्षेत्र के कक्ष क्र 146 में मिला है, एवं उसके पास ही एक ट्रांसफॉर्मर से 11000 के व्ही की करंट प्रवाहित तार भी दिखाई दे रही है।जिससे यह तय हो गया है कि हाथी की मौत करंट लगने से हुई है। करंट युक्त फंदा छोटे जानवरो जंगली सुअर एवम चीतल को फसने के लिए लगाया गया था। बहरहाल घटना की सूचना के बाद महासमुंद के रेंजर विश्वनाथ मुखर्जी दल बल के साथ पहुचे थे। इसके अलावा वन विकास निगम के एस डी ओ श्री नायक भी घटना स्थल पहुचे थे। अब हाथी के पोस्टमॉर्टम के बाद उसे घटना स्थल पर ही दफना दिया गया है। घटना की जांच वन विकास निगम द्वारा की जाने की संभावना है। ज्ञात हो कि वन विकास निगम द्वारा जंगलो का दौरा नही किये जाने के कारण निगम क्षेत्र में लगातार शिकार की घटनाएं होती रहती है।

लोगों में यह धारणा बन गई है कि नर हाथी दल से भटके हुए होते हैं वास्तव में नर हाथी अपने जीवन का लगभग 80 प्रतिशत जीवन अकेले में ही गुजारते है और कई बार दूसरे नर हाथियों के साथ कई कई दिन रहते है। जैसे महासमुंद वाला हाथी रह रहा था। अफ्रिका में तो नर हाथी अपना अलग इलाका बना लेते हैं जिसे bull area कहते हैं और रिप्रोडक्शन के समय जंगली हाथियों के परिवार के पास जाते हैं। कभी-कभी अपने से के परिवार के पास जाते हैं 10-12 साल की उमर से ही नर हाथी अलग रहने लगता है। कम उमर में यह बार-बार अपने परिवार के पास आता-जाता रहता है।

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