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मासूम बच्चो की मासूमियत से खेला जा रहा घिनौना खेल। मध्यान भोजन के नाम पर थाली में परोसा जा रहा कुपोषित आहार। जेल मेनुअल की तरह बच्चो को दिया जा रहा मिडडे मील।

दुर्ग। रीतेश तिवारी। प्रदेश भर में सरकारी स्कूलों में मध्यान भोजन के नाम पर बच्चो की थाली में सिर्फ कुपोषित आहार परोसा जा रहा है। कुपोषित इसलिए कह रहे है कि मासूम बच्चो को पोस्टिक आहार की जहा जरुरत है वहा थाली में सिर्फ सरकारी मोटा चावल पानी वाली दाल और सड़े गले टमाटरों का सूप दिखाई दे रहा है । कुपोषित आहार परोसने का तरिका देख कर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है की जेलों में जिस तरह कैदियों को खाना देने का नियमावली है ठीक उसी तर्ज पर दुर्ग की सबसे बड़ी सरकारी विद्यालय जेआरडी का ये हाल है जहा मासूम बच्चे स्कुल पहुंचते ही मध्यान भोजन बनने का बेसब्री से इन्तजार करते रहते है वहा उन्हें सबसे पहले जमीन में रखी थाली उठाना पड़ता है और फिर डिटरजन पाउडर से धोना पड़ता है उसके बाद लम्बी कतार में खड़े हो कर अपनी पारी का इन्तजार फिर मिलता है सरकारी मोटा चावल पानी वाली दाल और कभी कभार टमाटर का सूप वो भी स्कुल कैम्पस के अंदर बनी नाली के किनारे । तस्वीर सब कुछ ब्यान कर रही है। बच्चो को कैसे मिडडे मील के नाम पर क्या खिलाया जा रहा है। स्कुल की दीवार में लगा मिडडे मील का मीनू भी हमेशा खाली रहता है जो समझने के लिए पर्याप्त है कि बच्चो की थाली में कुपोषित आहार के शिवा और कुछ नही मिलने वाला है। नन्हे बच्चो को कुपोषित से दूर करने के लिए सरकारी स्कूलों में मध्यान भोजन का शुभारम्भ किया गया था लेकिन जब से इस योजना की शुरआत हुयी बच्चे और कुपोषित होते गए। बार बार कुपोषित कहने की वजह भी आप को बता दू। प्रदेश भर की सरकारी स्कूलों में मध्यान भोजन मिलने की वजह से कई घरो में सुबह का चूल्हा नहीं जलता गरीबी की मार झेल रहे परिजनों को लगता है की स्कुल में तो उनका बच्चा भर पेट अच्छा खाना खा ही लेगा नतीजा आप के सामने है और बच्चे दिनों दिन कमजोर होते जा रहे है। हर साल करोडो रूपए इन निजी मध्यान भोजन बनाने वालो को दिया जा रहा है लेकिन तस्वीर जो सामने दिख रही है उससे साफ़ अंदाजा लगा सकते है की बच्चो की मासूमियत से कैसा गंदा खेल खेला जा रहा है और जिम्मेदारों को खुली आँख से भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

(1) अगर ऐसा हो रहा है तो हम जाँच करेंगे। बच्चो को बेहतर पौष्टिक आहार देने का प्रवधान है। दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।
संजय अग्रवाल (एडीएम) दुर्ग (IAS)

(2) सरकारी विद्यालयों में बच्चो को प्रत्येक दिन अलग अलग मीनू के हिसाब से मध्यान भोजन देने का नियम है जिसमे पौष्टिक आहार होना अनिवार्य है। सभी एनजीओ जो खाना परोस रही है उन्हें पौष्टिक आहार देना ही पड़ेगा। जाँच के लिए टीम गठित होगी और जल्द ही ठोस कार्यवाही होगी।
हेमंत उपाध्याय (डीईओ) दुर्ग

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