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वन विभाग का अजब-गजब फार्मूला: वर्ष 2020 में वन विभाग खेलेगा गणेश हाथी के साथ 20-20… आदेश जारी

ब्यास मुनि द्विवेदी, 02 जनवरी 2020, गणेश हाथी के साथ क्या किया जाए? यह उसी प्रकार हो गया है जैसे गले में हड्डी फंस जाती है. बहुत पहले से गणेश को बंधक बनाकर सरगुजा के तमोर पिंगला एलीफैंट रेस्क्यू सेंटर में पालने का सपना वन विभाग रखा हुआ है. और इसी के चलते 18 जुलाई 2019 को उसे पकड़कर तमोर पिंगला भेजने का आदेश प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) ने जारी किया. इसके बाद कोरबा में उसे पकड़ने का प्रयास किया गया. 30 घंटे बेहोश रखा गया, जब वह मरणासन्न अवस्था में पहुंचने लगा तब उसे रिवाइवल का इंजेक्शन दिया गया. जिसके बाद वह चेन छुड़ा के चला. गया बाद में दोबारा बेहोश करके बची हुई चेन निकाली गई. इस बीच हाईकोर्ट में पीआईएल भी दायर हो गई तब वन विभाग को समझ में आया कि गणेश वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के शेडूल एक का प्राणी है जिसे सीधे पकड़ कर बंधक नहीं बनाया जा सकता, तो आदेश में संशोधन किया गया. वास्तव में हाथी शेडूल एकका प्राणी होता है जिससे पकड़ कर दूसरे स्थान में पुन: पुनर्विस्थावित किया जाना आवश्यक है.

गणेश का क्या किया जाए?
गणेश का क्या किया जाए इसे लेकर वन विभाग परेशान रहा. इस बीच 16 सितंबर 2019 को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी की अध्यक्षता में 7 सदस्यों की अधिकारियों की समिति बनाई गई. जिसे की गणेश के उचित रहवास क्षेत्र के चयन की रिपोर्ट 10 दिन के अंदर देनी थी.

कुछ लोगों ने सलाह दी कि गणेश को पकड़ कर रखना है तो एक ऐसी बैठक करवाई जाए जिसमें राजनेता भी हो. जिससे कि बैठक में यह मांग उठवाई जा सके कि गणेश को बंधक बनाया जाए या उसे मारने के आदेश जारी किए जाएं? इसलिए 13 नवंबर को एक पत्र जारी किया गया जिसमें उल्लेखित किया गया की विधायक रायगढ़, विधायक धरमजयगढ़, राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य शिशुपाल सोरी, खेल साए सिंह, विधायक देवव्रत सिंह के अलावा पांच एनजीओ, एक सेवानिवृत्त अधिकारी, तीन अन्य के अलावा हाथी प्रभावित क्षेत्र के वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सदस्य, सरपंच, पंच सभी को बुलाया जाए. मीटिंग में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टाइम्स ऑफ इंडिया बीबीसी, आईबीसी, नवभारत, हितवाद, हरिभूमि, नई दुनिया को भी बुलाया जाए. मंशा थी कि गणेश के विरुद्ध माहौल बनने पर मीडिया प्रचार प्रसार करेगी. एक वन्यजीव प्रेमी ने इस प्रकार की बैठक का विरोध किया और वन विभाग पर आरोप लगाया कि वन विभाग गणेश हाथी के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है.

20-20 का गेम
खैर जो भी हो बैठक नगरी निकाय चुनाव के कारण नहीं हो सकी और इस बीच वर्ष 2020 आ गया. अब वन विभाग ने 20 लोगों की समिति गठित की है जिससे कि वर्ष 2020 में गणेश हाथी के साथ ट्वेंटी- ट्वेंटी खेला जा सके. इसमें राजनेताओं की संख्या बढ़ा दी गई है. अब बैठक में पांच राजनेता, 7 एनजीओ, एक सेवानिवृत्त अधिकारी, एक अधिकारी भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून से, पशु चिकित्सक अधिकारी, नागरिक नितिन सिंघवी, मीडिया के ब्यूरो चीफ , 3 हाथी प्रभावित जिलों के वन प्रबंधन समिति के सदस्यों को 16 जनवरी 2020 को रायगढ़ में बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.

हाथी के मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए
20-20 बैठक में आमंत्रित नितिन सिंघवी का कहना है कि वन विभाग ने गणेश हाथी को बदनाम किया है और 15 मौत का जिम्मेदार ठहराया है. किसी भी हाथी से मौत हो जाने पर गणेश पर आरोप लगाना वन अधिकारियों का फेशन बन गया है. जबकि बीस में से किसी भी मौत के दस्तावेज में गणेश द्वारा मृतक को मारे जाने का उल्लेख नहीं है. रेडियो कॉलर लगने के बाद सिर्फ एक घटना में गणेश का उस स्थान के आसपास होना पाया जाता है परंतु उसमें भी शंका का लाभ गणेश को मिलेगा क्योंकि जहां पर मृतक की मौत हुई वहां पर उस वक्त अन्य 17 साथी भी थे. रेडियो कालर लगाने के बाद गणेश के विडियो भी आये हे जिसमे आदमी 3-4 फीट दूर होने पर भी गणेश शांत रहा और कोई नुकसान नहीं किया.

सिंघवी ने वन विभाग को पत्र लिखकर मांग की है गणेश हाथी के मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए, गणेश हाथी के लिए उचित रहवास चयन का मुद्दा सिर्फ विशेषज्ञों का है और इसमें राजनेता और अन्य किसी भी ऐसे व्यक्ति को निर्णय लेते वक्त शामिल नहीं किया जाना चाहिए जिन्हें गणेश हाथी के व्यवहार के बारे में कुछ ना मालूम हो और जिनके पास हाथियों से संबंधित विशेषज्ञ ना हो. वन विभाग को गणेश हाथी को कालर लगाने के बाद के व्यवहार का अध्यन भारतीय वन्य जीव संस्थान एव अन्य विशेषज्ञों से करवाना चाहिए और झूटे आरोप लगाने की बजाये जनता के सामने प्रमाणिक दस्तावेज रखने चाहिए कि गणेश ने 15 लोगों को मारा है.

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