छत्तीसगढ़

वन विभाग में क्या चल रहा खेल: प्रदेश के भारतीय वन सेवा के अधिकारी नाकाबिल घोषित?? दर्जन भर आईएफएस लूप लाइन में! एसडीओ को बनाया दो-दो वनमंडल का प्रभारी डीएफओ,

संदीप तिवारी, रायपुर, 02 जनवरी 2019। वन विभाग अपनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है. हाल ही में कटघोरा वनमंडल प्रभारी डीएफओ की गलती की वजह से एक हाथी की कीचड़ में फसकर मौत हो गई जिसको लेकर देश ही नहीं विदेशों वन विभाग की बेइज्जती हुई। मीडिया में में विभाग की जमकर आलोचना के बाद प्रभारी वनमंडलाधिकारी को सस्पेंड किया गया.

इसके बाद उसी वनमंडल में जांजगीर जिले जांजगीर में पदस्थ प्रभारी डीएफओ जितेंद्र कुमार उपाध्याय को कटघोरा वनमंडल डीएफओ का अतिरिक्ति प्रभार सौंप दिया गया। उपाध्याय का मूल पद एसडीओ है। यानि एक एसडीओ को दो दो वनमंडल का प्रभारी डीएफओ बना दिया जबकि दर्जनभर आईएफएस अधिकारी लूप लाइन में बैठे हैं.

प्रदेश में भारतीय वन सेवा के अधिकारी नाकाबिल?? मलाई का खेल?

प्रभारी वनमंडल अधिकारियों के निर्णय की वजह से वन विभाग को बार-बार न केवल सर्मिन्दा होना पड़ रहा है बल्कि प्रदेश के वन और वन्य प्राणियों को भी अच्छा खासा नुक्सान हो रहा है. जिसके कुछ हाल के उदाहरण शामिल हैं जिनमे महासमुंद के प्रभारी/संलग्न वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय ने जनता को हाथी से बचाने के लिए लगभग 700 एकड़ की झाडिया ही कटवाने को तैयार हो गए थे. मीडिया में विरोध होने के बाद कार्यवाही रोकी गई. इसके अलावा पूरे प्रदेश को हिला देने वाली खबर उदंती सीतानदी और इंद्रवादी आरक्षित क्षेत्र से आई, जहा उड़ीसा से लोग आकर कब्ज़ा कर लिए और बड़े हिस्से का जंगल बर्बाद कर दिए. यहाँ अधिकांश समय में प्रभारी अधिकारी ही रहे जिसका खामियाजा वन और वन्य प्राणियों को उठाना पड़ा.

प्रदेश में दर्जनभर आईएफएस अधिकारी लगभग बिना काम के या लूप लाइन में पड़े हैं. क्या जिम्मेदार अधिकारी इन्हे काबिल नहीं समझते है?? या फिर परदे के पीछे किसी कुछ और लाभ हानि का खेल चल रहा है. जबकि कैडर पोस्ट में, जो भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के लिए सृजित है वहां भारतीय वन सेवा (कैडर) नियम 1966 की धारा 9 के अनुसार 3 माह से ज्यादा गैर कैडर को नहीं रख सकते है. अगर केंद्र से अनुमति लेकर 3 माह और बढ़ाया जा सकता है. लेकिन 6 माह से अधिक नहीं।

जल्द हो जायेगा आईएफएस अवार्ड

एसजी न्यूज़ से चर्चा में वन विभाग के प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने कहा जल्द ही आईएफएस कई एसडीओ को अवार्ड हो जायेगा, जिन आईएफएस को डीएफओ नहीं बनाया जा रहा है उनके खिलाफ कई शिकायत हैं.

जिनको आईएफएस अवार्ड नहीं हुआ वो काबिल हैं जो डायरेक्ट आईएफएस पास करके आये वो नहीं??

जिनको भविष्य में आईएफएस अवार्ड होना है उनको अभी से इस काबिल मान लिया गया कि वो वनमंडल चला सकते हैं वो भी प्रोमोटी आईएफएस? जबकि जो डायरेक्ट आईएफएस पास करके आये वो इस काबिल नहीं हुए ??? वो भी इतने काबिल कि दो-दो वनमंडल संभाल सकते हैं. ऐसे कई सवाल हैं जिनका सीधा जवाव विभाग के पास नहीं है.

Spread the love

Comment here