छत्तीसगढ़

विशेष: अब आसान नहीं सेवनृवित्त अधिकारीयों का सूचना आयुक्त बनना…. समाज का प्रख्यात व्यक्ति होना जरुरी…..सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से अवगत करने लिखा गया मुख्य मंत्री और नेता प्रतिपक्ष को पत्र.

रायपुर, 04 मार्च 2020. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं । अंतिम तिथि 10 फरवरी थी । आवेदन प्राप्त होने उपरांत चयन प्रक्रिया की जानी है। इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों से मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को अवगत करने के लिए ‘‘जानिए अपना सूचना का आधिकार‘‘ पुस्तक के लेखक नितिन सिंघवी ने पत्र लिखा है।

पत्र में बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया विरुद्ध अमित शर्मा रिव्यू पिटिशन सिविल 2309-2012 में आदेशित किया है कि सिर्फ समाज में प्रख्यात व्यक्ति जिन्हें निर्धारित फील्ड में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो का ही चयन सूचना आयुक्त के लिए किया जाये एवं सूचना आयुक्त के चयन हेतु गठित चयन समिति, राज्यपाल को नियुक्ति की अनुशंसा करते वक्त अनिवार्य रूप से यह बताएगी की वह व्यक्ति जिसका चयन किया गया है उसका व्यापक नॉलेज और अनुभव क्या है तथा वह समाज में प्रख्यात व्यक्ति क्यों पाया गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने अंजलि भारद्वाज विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया रिपीटेशन सिविल क्रमांक 436-2018 में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति सिर्फ सरकारी अधिकारियों या सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के लिए आरक्षित नहीं है न्यायालय ने आदेशित किया है कि सर्च कमिटी कैंडिडेट की शॉर्टलिस्टिंग क्राइटेरिया को पब्लिक करेगी।

नमितशर्मा विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया रिट पिटिशन सिविल 210-2012 में आदेशित किया है कि प्रख्यात व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिसकी पब्लिक इमेज ऐसी हो जिससे पता चले कि उसने समाज के लिए कुछ योगदान किया हो। ऐसे व्यक्ति को पब्लिक इंटरेस्ट की, पब्लिक के भले की समझ होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है कि उसने समाज को सामाजिक कार्यों द्वारा या समान कार्यो द्वारा योगदान दिया हो।

पत्र में बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी भले उसे निर्धारित फील्ड में व्यापक नॉलेज और अनुभव हो, उसके समाज में प्रख्यात होने की संम्भावना नगण्य है। सरकारी अधिकारी या हाल ही में सेवानिवृत हुए अधिकारी समाज में प्रख्यात नहीं हो सकते क्यों कि वह वेलफेयर के कार्य शासन की स्कीम और योजना के अनुसार कराते है जिसके लिए शासन उसे तनखा देती है, वे अपने मन से कोई भी वेलफेयर की स्कीम नहीं चला सकते। अतः वे किसी जगह पर फेमस तो हो सकते है परन्तु समाज में प्रख्यात नहीं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त जो कोर्ट ने बताई है कि प्रख्यात व्यक्ति वही होगा जिसने समाज को सामाजिक कार्यो द्वारा योगदान किया हो यह शर्त शासकीय सेवक या पूर्व शासकीय सेवक के रूप में पूरी किया जाना असंभव है। पत्र में कोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए निवेदन किया गया है ।

गौरतलब है कि सूचना आयुक्त की नियुक्ति की चयन समिति में मुख्य मंत्री अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य मंत्री द्वारा नामित केबिनेट मंत्री सदस्य होता। राज्य मुख्य सूचना और राज्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम या प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाले समाज में प्रख्यात व्यक्ति हो सकते ।

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