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विशेष: शिवराज सिंह या नरोत्तम मिश्रा नहीं , राजेंद्र शुक्ला बनेगे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री??

फाइल फोटो: राजेंद्र शुक्ला, पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश

व्यास मुनि द्विवेदी, भोपाल/दिल्ली, 19 मार्च 2020. मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी उठापटक के बीच भाजपा के अंदर तहखाने से एक बड़ी खबर आ रही है. जिसमें भाजपा की ओर से कौन मुख्यमंत्री बनेगा? इस बात पर अंदर एक अलग ही सियासी गणित चल रही है. उसके पीछे भी कई कारण है.

जिस तरह से सोशल मीडिया में “भाजपा चाहिए शिवराज नहीं” के नारे तैर रहे हैं, उससे एक अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा प्रदेश में मुख्यमंत्री का नया चेहरा लेकर आ सकती है. जिससे एंटीइंकम्बैंसी को काम किया जा सके.

शिवराज सिंह के बाद सभी की निगाहें नरोत्तम मिश्रा पर टिकी हुई हैं. क्योंकि माधवराव सिंधिया भाजपा प्रवेश कराने में नरोत्तम मिश्रा का बड़ा हाथ माना जा रहा है. लेकिन भाजपा के सूत्रों की माने तो चंबल में वर्चस्व को लेकर भाजपा के भीतर भी बड़ी लड़ाई चल रही है.

चंबल में इस समय तीन बड़े दिग्गज भाजपा में मौजूद पहले से मौजूद हैं. जिनमे पहला नाम नरेंद्र तोमर का है जो केंद्रीय मंत्री हैं, दूसरा नरोत्तम मिश्रा माने जाते हैं. वर्तमान तीसरी सबसे बड़ी ताकत स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में आ गए हैं. जो चंबल के सबसे बड़े राजनीतिक ध्रुव माने जाते हैं. अगर नरोत्तम मिश्रा को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तब नरेंद्र तोमर और सिंधिया के वर्चस्व क्या होगा?

यह बड़ा सवाल ऐसे में अगर शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्र का नाम अलग कर दिया जाए तो फिर प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा? पार्टी के सूत्रों की माने तो भाजपा में एंटी इनकंबेंसी के कारण हार का सामना करना पड़ा था जिसमें मुख्यमंत्री का चेहरा भी माना ही जायेगा। जाहिर सी बात है कि सत्ता प्रमुख जो होगा उसी की इनकंबेंसी होगी।

प्रदेश में एंटी इनकंबेंसी के बावजूद विंध्य क्षेत्र में भाजपा ने सबसे जबरदस्त जीत हासिल की थी. 30 में से 27 सीटें भाजपा जीत कर परचम लहराया था. जिसमे इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय रीवा के नेता राजेंद्र शुक्ल को जाता है. विंध्य के सबसे बड़े नेता राजेंद्र शुक्ला माने जाते हैं. रीवा जिले की सभी आठों सीट राजेंद्र शुक्ला जीतकर लाये हैं. इतना ही नहीं विंध्य के 27 में से कम से कम 20-22 विधायक राजेंद्र शुक्ला के एकदम खास है. जिन्हें उन्होंने टिकट दिलाने से लेकर जिताने का प्रयास किया हैं. इस बात को पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती है कि अगर किसी नेता के पास 20 से 22 विधायक हैं तो उन्हें पार्टी में किस तरह का स्थान मिलना चाहिए। माधवराव सिंधिया के बाद प्रदेश में अगर कोई नेता है तो वह एकमात्र राजेंद्र शुक्ला है जिनके पास इतने बड़े संख्या में विधायकों की उपलब्धता है.

ऐसे में पार्टी सूत्रों से जो खबर मिल रही है कि राजेंद्र शुक्ला को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है उसमे यकीन किया जा सकता है. वैसे भी राजेंद्र शुक्ला प्रदेश में एक निर्विवाद चेहरा है. 2003 में पहली बार विधायक चुनकर आये शुक्ल ने इतने वर्षों में कोई विवादित बयान नहीं दिया, जिसके कारण पार्टी या सत्ता को नुकसान हुआ हो जबकि राजेंद्र शुक्ला मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे हैं जिसमें से ऊर्जा, जनसंपर्क, खनिज, विधि विधायी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाला चुके हैं.

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