April 13, 2021

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शिवनाथ नदी में मछुआरे को मिला विशेष प्रजाति का कछुआ, राजनांदगांव डीएफओ ने बचाया कछुए को

(सुयश ग्राम) राजनांदगांव जिले के अंतर्गत शिवनाथ नदी में एक मछुवारे के जाल में विशेष प्रजाति का स्टार बैक कछुआ फसा. इस प्रकार के कछुए के पीठ में सितारे और शंख जैसी आकृति बनी होती है जिसके कारण इसका नाम स्टार बैक कछुआ होता है. सामान्य त्तौर पर यह कछुआ खारे पानी वाले स्थानों जैसे समुद्र नदियों मैं पाया जाता हैं. इस प्रजाति के कछुए इस क्षेत्र में नही पाया जाते मछुवारे के जाल में फसा कछुआ अपनी पीठ पर बनी स्टार आकृति और शंख जैसे चित्र के कारण ग्रामीण के लिए दुर्लभ बन गया. ग्रामीण उसकी पूजा पाठ करके चढ़ाव तक चढ़ा रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार ग्राम हरदी निवासी मछुवारे पुरुषोत्तम निषाद जाल लेकर मछली पकड़ने शिवनाथ नदी पर गया हुआ था. जाल डाले अभी 1-2 घंटे का समय ही हुवा था इसी प्रकार उसके जाल में एक कछुआ फस गया. पुरुषोत्तम के अनुसार उसके जाल में फसा कछुया सामान्य इस क्षेत्र में पाये जाने वाले कछुए से अलग था. उसके पीठ पर शंख और सितारे जैसे आकृति बने हुइ थी. जाल में फसा कछुआ से सामान्य कछुओं अलग लगा इसलिये पुरुषोत्तम ने उसे पालने के उद्देश्य से घर ले आया. गाँव में पहुंचने पर उसने कछुए को टब में रखा, और लोगों को जैसे ही नए प्रकार की कछुए मिलने के जानकारी हुई उसे देखने के लिए बड़ी सख्या में क्षेत्रवासी उमड़ पढ़े कछुए के पीठ पे बनी धारियो शंख और सितारे जैसी आकृति को देखते हुए ग्रामीणों ने पूजा पाठ भी शुरु कर दी. राजनांदगांव डीएफओ श्री मोहम्मद शाहिद को सूचना मिलने पर उनके द्वारा त्वरित कार्यवाही कर सुरक्षित कछुए को वापस नदी में छोडवा दिया, वन्य जीव प्रेमी डीएफओ की कार्यवाही की सराहना कर रहे हैं कि उनकी वजह से दुर्लभ जीव को बचा लिया गया. उल्लेखनीय है कि वन्यजीव व पक्षियों को पालना, नुकसान पहुंचाना और मारना वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।

सामान्य कछुओं अलग लगा इस लिये पालने ले आया -मछुवारे पुरुषोत्तम निषाद का कहना है की शिवनाथ नदी में मछली पकड़ने प्रतिदिन की तरह जाल डाला था, जिसमे कछुआ फसा जो इस क्षेत्र में क्षेत्र में पाये जाने वाले कछुए से अलग लगा जिसे देखकर पालने की इच्छा हुई और उसे घर ले आया.
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शिवनाथ नदी मछुवारे जो कछुआ मिला वह स्टॉक बैंक प्रजाति का है. यह सामान्य है लेकिन इस क्षेत्र में पहली बार देखा गया है, कछुए को सुरक्षित नदी में छोड दिया गया है. –मोहम्मद शाहिद, डीएफओं, राजनांदगांव

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