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संपादकीय, CAA सिटिजन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2019, आखिर है क्या जिसने पूरे देश में लगा दी आग ? क्या होंगे इसके परिणाम? बिना पढ़े ना करें विरोध ना करें समर्थन…

ब्यास मुनि द्विवेदी, रायपुर 20 दिसंबर 2019, देशभर में सिटीजन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2019 को लेकर आग लगी हुई है. कुछ लोग विरोध में तो कुछ लोग समर्थन में सड़कों पर उतर आए हैं. शासकीय संपत्ति का नुकसान और जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि जो लोग विरोध कर रहे हैं या फिर समर्थन कर रहे हैं अगर उनसे यह पूछा जाए कि क्या आपने सिटिजन अमेंडमेंट बिल पढ़ा है या एनआरसी National Register of Citizens (NRC) के बारे में आपको पता है. तो संभवतः 99% लोगों को यह नहीं पता है कि यह दोनों चिड़िया कौन है? लेकिन एक पक्ष में दूसरा विरोध में है.

पत्रकारिता और कानून से जुड़े होने के कारण लेखक ने सिटीजन (अमेंडमेंट) एक्ट,2019 को पढ़ा। चूँकि यह एक्ट सिटीजनशिप एक्ट 1955 में संशोधन है, इसलिए सिटीजनशिप एक्ट 1955 को बिना पढ़े इसको समझना संभव नहीं है. सिटीजन एक्ट संसोधन 2019 मात्र 3 पृष्ठ का है. जिसमें सिटीजनशिप एक्ट 1955 के सेक्शन-2 में संशोधन किया गया है. सेक्शन-2 सिटीजनशिप एक्ट, 1955 में दूसरे देशों से अवैध तरीके से आए या अवैध तरीके से देश में रह रहे नागरिक जिन्हें इंग्लिश में illegal migrant (अवैध प्रवासी) के रूप में परिभाषित किया गया है.

संशोधन के बाद सेक्शन-2 में यह जोड़ दिया गया है कि वे लोग जो हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या क्रिश्चियन कम्युनिटी के हैं और बांग्लादेश, अफगानिस्तान पाकिस्तान से भारत में 31 दिसंबर 2014 के पहले आए हैं उन्हें वैध नागरिकता दी जाएगी।

इस अमेंडमेंट से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा सिवाय इसके कि देश में जिनको नागरिकता दे दी जाएगी उन्हें भी अपना हक मांगने का अधिकार मिल जाएगा।

क्या होंगे इसके परिणाम
अमेंडमेंट की कहानी यहां खत्म नहीं होती बल्कि इसके बाद शुरू होती है. आखिर इससे देश के 135 करोड़ जनता पर प्रभाव क्या पड़ेगा वास्तव में यही को जानने की जरूरत है. आपको बता दें कि सिटीजनशिप एक्ट 1955 के सेक्शन-3 के अनुसार
(अ) वह व्यक्ति देश का नागरिक होगा जो 26 जनवरी 1950 के बाद भारत में जन्म लिया हो लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले..
(ब) यदि 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म हुआ है वह भी भारत का नागरिक होगा लेकिन उसके पिता-माता यदि उसके जन्म के समय भारत के नागरिक हैं.

अब देश के गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि सिटीजनशिप (संसोधन) एक्ट, 2019 लागू होने के बाद वह पूरे देश में एनआरसी यानी National Register of Citizens (NRC) लागू करेंगे। मतलब यह है कि देश भर के लोगों को अपनी नागरिकता के सबूत देने पड़ेंगे। जो अब तक नहीं देने पड़ते थे. नागरिकता साबित करने के लिए यह दस्तावेज में बताना पड़ेगा कि 1954 और 1987 के बीच भारत जन्म हुआ है. अगर किसी का भारत में जन्म 1987 के बाद हुआ है तो उसे पहले अपने पिता की नागरिकता साबित करनी होगी। उसके बाद ही वह इस देश का नागरिक होगा।

ऐसे में इसी देश के लोग जो एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में रह रहे हैं जिनके माता-पिता के रिकॉर्ड मिलना लगभग असंभव होगा है. उन्हें अपनी नागरिकता प्रूफ करने में पसीने छूट जाएंगे लोग अपने काम-धाम छोड़कर इस कार्यालय से उस कार्यालय अपने पैतृक गांव में जाकर यह बताएं कि हमारे पिता यही रहते थे. पंचों से लिखवाए, ग्राम सभाओं से लिखवाए इस तरह की समस्याएं हर किसी को झेलनी पड़ेगी। देश में कुछ घुसपैठियों को निकालने के लिए पूरे देश की 135 करोड़ जनता को भारत का नागरिक साबित करना पड़ेगा। यह कहां का न्याय और यह कौन सी बुद्धिमत्ता वाला कार्य है कि कुछ लोगों को बाहर करने के लिए पूरे देश को लाइन में खड़ा कर दिया जाए?

यह ठीक उसी प्रकार होगा जिस तरह कि काला धन को सफेद करने के लिए नोटबंदी की गई थी जिसमें पूरा देश लाइन में लगकर महीनों तक अपने काम धाम बंद करके बैंकों के लाइन में लगा रहा इस उम्मीद में कि चलो कोई बात नहीं अगर हमें थोड़ी परेशानी होती है और देश का काला धन वापस आ जाता है तो इससे देश का लाभ होगा। लेकिन हुआ क्या यह सभी जानते हैं.

यह बिल भी ठीक नोटबंदी की तरह है कि पूरा देश लाइन में लगा होगा और आखरी में हाथ में कुछ नहीं आएगा क्योंकि जो घुसपैठ करके आ चुके हैं हम भले ही अपने दस्तावेज दुरुस्त रखे हो या ना रखे हो वह जरूर दस्तावेज दुरुस्त रखें हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण असम में एनआरसी जहां पर सरकार ने एनआरसी कराया जिसमे 19 लाख लोगों में से 15 लाख लोग हिंदू निकले जिनके पास वैधानिक दस्तावेज नहीं थे. आखिर क्यों इस सवाल का जवाब सरकार के पास भी नहीं है कारण साफ है कि बिहार झारखंड या आसपास से मजदूर जो मजदूरी करने गए और वहां बस गए. ये हालात पूरे देश में होने वाला है। इसी वजह से लोग इसका विरोध कर रहे हैं.

सरकार पर सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकार में इतने दूरगामी सोच के लोग नहीं है जिनको यह मालूम है कि पूरा देश परेशान होगा? ऐसा नहीं है मालूम है उन्हें। लेकिन वर्तमान में देश की बिगड़ती आर्थिक हालात, बेरोजगारी, महंगाई ने सरकार को झकझोर रखा है. और इससे बचने का एक ही तरीका है कि लोगों को व्यस्त रखा जाए अगर वह व्यस्त रहेंगे तो इन मुद्दों पर ना तो सरकार से सवाल करेंगे और ना ही सरकार को जवाब देना होगा।

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