छत्तीसगढ़

संवाद फिल्म घोटाला : जांच के लिए बनाई गई 6 सदस्यीय कमेटी

रायपुर। जनसंपर्क विभाग में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 21 बाहरी कंपनियों को छोटी फिल्म बनाने के लिए हुए करोड़ों के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका पर जांच बैठा दी गई है। उमेश मिश्र की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति मामले की जांच करेगी।

जनसंपर्क विभाग में राज्य के बाहर की 21 एजेंसियों को पिछले वर्ष करोड़ों का काम चुनाव से ऐन पहले दिया था। सितंबर महीने के अंतिम दिन इसके लिए टेंडर हुआ और चुनाव से पहले ही फिल्मों का निर्माण पूरा दिखा भुगतान कर दिया गया। इस भुगतान पर सवालिया निशान उसी समय उठे थे।

सरकार बदलने के बाद आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने अनियमितता की आशंका जताते हुए मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। छत्तीसगढ़ संवाद के संचालक उमेश मिश्र जांच कमेटी के प्रमुख हैं।

जनसंपर्क विभाग के अलावा छत्तीसगढ़ संवाद की वित्तीय वर्ष 2018-19 देनदारियों के परीक्षण के दौरान इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। दरअसल पिछली सरकार ने चुनावी साल में प्रचार-प्रसार सहित अन्य मदों में खर्च होने वाली राशि के लिए करीब ढाई सौ करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था। आचार संहिता लगने के ठीक पहले तक करीब साढ़े चार सौ करोड़ के टेंडर जारी किए। भुगतान की गई रकम आवंटित राशि के दो गुना से ज्यादा है।

21एजेंसियों को किया जाएगा टर्मिनेट

विभागीय सूत्र बताते हैं कि कुल 21 बाहरी एजेसियों को करोड़ों रुपये का काम दे दिया गया, कई एजेंसी ऐसी भी हैं, जो टेंडर शर्तों की पात्रता भी पूरी नहीं करती । लिहाजा विभाग अब इन एजेंसियों को टर्मिनेट करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। जल्द ही इन एजेंसियों को टर्मिनेट कर दिया जाएगा।

जांच कमेटी के सदस्य

छत्तीसगढ़ संवाद के संचालक उमेश मिश्रा के नेतृत्व में गठित की गई कमेटी में स्वराज दास, जमुना सांडिया, पंकज गुप्ता, आर के क्षत्रे और शरतचंद्र पात्र शामिल किए गए हैं। जांच के दौरान कमेटी को यह अधिकार दिया गया है कि जरूरत पड़े तो तकनीकी विशेषज्ञों से सहयोग भी लें।

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