January 22, 2021

Suyashgram.com

मासिक पत्रिका एवं वेब न्यूज़ पोर्टल

सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट में खुलासा- वो दिन दूर नहीं जब राजस्थान का रेगिस्तान बच्चे देखेंगे छत्तीसगढ़ में, पानी का घटता क्षेत्र, छत्तीसगढ़ जल्द बन सकता है रेगिस्तान

दिल्ली/रायपुर (एसजी न्यूज़) स्पेश ऐपलिकेशन सेंटर अहमदाबाद जो कि भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ स्पेश के अंतर्गत कार्यरत है ने 17 जून को “विश्व मरूस्थलीयकरण विरोध दिवस” की जारी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ वासियों को चिंता में डाल दिया है कि आगे आने वाली पीढ़िया जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के कारण रेगिस्तान में रहेंगी।

छत्तीसगढ़ जिसके पास देश की भूमि का 4.11 प्रतिशत भू-भाग है वह देश में बढ़ रहे मरूस्थलीयकरण (Desertifecation) वाले प्रदेशों में 10वें पायदान पर है यह स्थित तब है जबकि छत्तीसगढ़ के कुल भू-भाग का 42 प्रतिशत वन क्षेत्र बताया जाता है। ऐसे में रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रफल 1,35,19,250 हेक्टर में से वर्ष 2011-2013 में 16.36 प्रतिशत अर्थात 22,11,153 हेक्टर भूमि का मरूस्थलीयकरण और भू-अपक्षयन (Degradation) होना चिंता जनक है। यह वर्ष 2003-2005 के आकड़ों से 0.26 प्रतिशत अधिक है।



जारी किये गये आकड़ों में सबसे चिंता जनक स्थिति वनस्पति डिग्रेडेशन क्षेत्र की है जोे कि 13,58,089 हेक्टर अर्थात छत्तीसगढ़ का कुल भूमि का लगभग 10 प्रतिशत है। इस प्रकार पानी के अपक्षयन (Erosion) का क्षेत्र 7,83,645 हेक्टर अर्थात छत्तीसगढ़ का 5.80 प्रतिशत है। इसमें भी 2003-05 की तुलना में 1.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई ।

यह ध्यान रहे कि भारत मरूस्थलीयकरण से जुझने हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ का हस्ताक्षरकर्ता है और मरूस्थलीय करण और भू-अपक्षयन से जूझने के लिये कटिबद्ध है। 29 प्रदेशों और न्यू केपिटल रिजन के क्षेत्रों के अध्ययन के हिसाब से देश का लगभग 29.32 प्रतिशत भू-भाग मरूस्थलीय करण और भू-अपक्षयन से ग्रसित है।

जानकारों ने स्पेश ऐपलिकेशन सेंटर द्वारा जारी किये गये एटलस का स्वागत करते हुए कहा कि अंतिम आकड़े वर्ष 2011-2013 के लिए गये है। इन वर्षों के बाद देश में खदानों, सड़कों, रेल लाइनों हेतु वनों की अंधाधुन कटाई की गई है। जमीन से अनवरत पानी निकालने से भू-जल स्तर गिरा है। शहरों की भूमि का काक्रीटीकरण कर दिया गया है जिससे भू-जल चार्ज नहीं होता। सभी बिन्दुओं पर पर्यावरण को व्यापक नुकसान पहुंचा दिया गया है। अगर वर्ष 2017-2018 के आकड़ों के आधार पर एटलस जारी किया जाये तो भयावह स्थिति सामने आयेगी। जारी किये गये आकड़े बहुत चिंता जनक है जो आपके सोचने को मजबूर कर देंगे कि आपके आनी वाली पीढ़ियां कभी रहे इस हरे-भरे प्रदेश मंे, रेगिस्तान में अच्छी जमीन और पानी से जुझते हुए रहेगी।.

Spread the love

You may have missed