छत्तीसगढ़

प्रदेश में 15 दिनों के अंदर 6 हाथियों की मौत… पीसीएफ वाइल्ड लाइफ दो हाथी विशेषज्ञो के साथ खुद निकले घटना स्थल के लिए। … पूरे वन विभाग के कार्य प्रणाली पर उठे सवाल… सिफारिशों से अधिकारियों की पोस्टिंग फिर सवालों के घेरे पर???

रायपुर/रायगढ़। 18 जून 2020. प्रदेश में लगातार हाथियों की मौत को लेकर बवाल मचा हुआ है पिछले मात्र 15 दिनों में प्रदेश में 6 हाथियों की मौत हो चुकी है ताजा घटना आज धर्मजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत छाल रेंज के ग्राम बहरामार में हाथी की मौत हुई है. अभी तक हाथी की मौत का कोई कारण पता नहीं चला है. छल की रेंज के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं. वन मंडल धरमजयगढ़ के डीएफओ प्रियंका पांडे घटनास्थल पर जा रहे हैं. लोगों का यह मानना है कि मृतक हाथी सबसे चर्चि गणेश हाथी हो सकता है जिसके ऊपर बहुत दिनों से आरोप है कि वह अकेला इस क्षेत्र में घूम रहा था.

प्रदेश में अब तक पिछले 15 दिनों में हाथियों की हुई मौत
1. प्रदेश में 6 जून को सूरजपुर डिवीजन में एक हाथी की मौत हुई जिसके बारे में कहा जा रहा है कि हाथी के इंटरनल ब्लीडिंग के कारण मौत हुई है.
2. बलरामपुर डिवीजन में 6 जून को ही एक हाथी की मौत हुई थी.
3. सूरजपुर डिवीजन में केमिकल प्वाइजनिंग से 11 जून को मौत हुई.
4. धमतरी डिवीजन में कीचड़ में फसकर एक हाथी की 16 जून को मौत हुई.
5. धर्मजयगढ़ में ही करंट से एक हाथी की मौत हुई.
6. छठवीं हाथी की मौत आज धर्मजयगढ़ में हुई है

वन विभाग में पोस्टिंग को लेकर फिर उठे सवाल
प्रदेश में हो रही लगातार हाथियों की मौत ने पूरे वन विभाग के कार्य प्रणाली और पोस्टिंग पर सवाल उठा दिए है. दरअसल पहले भी एसजी न्यूज़ ने यह बात उठाई थी कि मैदानी अमला बड़े अधिकारियों की बात नहीं सुनता है. इसके पीछे एक ही वजह क्या हो सकती है? यह आरोप लगते रहे हैं कि अधिकांश अधिकारी सिफारिश लगा कर आते हैं. जिनको हटाना विभाग के उच्च अधिकारियों के बस में नहीं होता है. निचले स्तर का अमला उच्च अधिकारियों के सवालों का जवाब देना तक भी मुनासिब नहीं समझता है.
ज्ञात हो कि पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने एक पत्र 8 बार अपने निचले स्तर के अधिकारियों को लिखा है जिसका किसी ने जवाब नहीं दिया इसको क्या समझें कि वन विभाग क्या पूरी तरह से अब फेल हो चुका है? विभाग के ही कर्मचारियों अधिकारियों पर कंट्रोल नहीं रह गया है? क्या यह राजनीतिक दबाव में हो रहा है? खुद पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ हाथियों की मौत पर सीधे फील्ड पहुंच रहे हैं. ऐसी नौबत क्यों आ रही है.

पहले भी प्रमोटी और अटैचमेंट में अधिकारियों की नियुक्ति कर के अलग-अलग डिवीजन चलाए जाने का विरोध होता रहा है. विभाग में भी इस बात को लेकर बहुत आईएफएस नाराज रहे हैं. आखिर ऐसी विभाग की क्या मजबूरी है कि आईएफएस इनके पास हैं उसके बाद भी अधिकतर डिवीजन में अटैचमेंट कर के अधिकारियों से काम डीएफओ का लिया जाता है? क्या यह राजनीतिक दबाव में नियुक्तियां होती है? या किसी और वजह से?

बड़े अधिकारीयों पर नहीं हो रही कार्यवाही?
हाल ही में बलरामपुर डिवीज़न में हाथी की मौत को लेकर हंगामा मचा तो विभाग ने दो लोगों को ससपेंड कर दिया और डीएफओ को सिर्फ नोटिस देकर काम चलाना पड़ा. कार्यवाही या ट्रांसफर करने में सभी के हाथ काँप गए? खबर है कि अधिकारी का पोलिटिकल कनेक्शन रायबरेली से है! तो फिर सर्कार भी असहाय है?

विभाग के ही अधिकारी हाथी को मारने का देते है सुझाव?
इतना ही नहीं गणेश हाथी को मारने के लिए एक सेवा निवृत अधिकारी ने एक मीटिंग में यह सुझाव दिया था कि उसे ओवरडोज देकर मार दिया जाए जो अधिकारी खुद वन्यजीवों को मारने के लिए प्रेरित करते हो उनसे वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण की उम्मीद कैसे की जा सकती है इस बात को लेकर एक शिकायत भी हुई थी कि अधिकारियों ने हाथी के संरक्षण और स्वर सुरक्षा को लेकर मीटिंग करते हैं और उसी को मारने के लिए सुझाव देते हैं

पीसीएफ वाइल्ड लाइफ दो वैज्ञानिको के साथ खुद निकले घटना स्थल के लिए
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अतुल शुक्ल ने बताया की जांच के लिये आदेश दे दिए गए है. सभी मैदानी अधिकारी घटना स्थल पहुंच चुके हैं. वह स्वयं दो हाथी के एक्सपर्ट जो बैंगलुरु से आये हुए है एवं डॉ वर्मा के साथ घटना स्थल लिए रवाना हो चुके हैं. पोस्टमोरडम के बाद ही मृत्यु का पता चलेगा अगर कोई दोसी है तो कार्यवाही जरूर की जायेगी।

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