छत्तीसगढ़

6 हाथियों के अलावा एक हाथी मर गया गुमनामी की मौत,… रेंज ऑफिस से मात्र 4 किलोमीटर दूर हाथी की मौत का पता लगने में विभाग को लग गए एक महीने,…. तो कैसे होती होगी हाथियों की ट्रैकिंग,… विभाग भगवान् भरोसे?? कहा गए हाथी दांत?

सूरजपुर/रायपुर, 18 जून 2020. प्रदेश में लगातार हो रही हाथियों की मौत ने सबके कान खड़े कर दिए हैं. 15 दिन के भीतर 6 हाथियों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा 11 मई को प्रतापपुर रेंज मुख्यालय से महज 4 किमी दूर मिले हाथी के लगभग एक माह से अधिक सड़े शव को लेकर अब यह संभावना जताई जा रही है कि यह हाथी, ‘बांकी-गजदल’ का वहीं ‘गुमशुदा’ सदस्य हो सकता है ? जिसे मीडिया ने सामने लाते हुए हाथियों की संख्या कम होने की बात को अपनी सुर्खियां बनाई थी, बावजूद इसके विभाग ने इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया और इस घटना का खुलासा तक नहीं किया। यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि 9 जून से 11 जून के बीच बांकी गजदल के जिन तीन मादा सदस्य की मौत हुई, उसके बारे में तो विभाग के आला अधिकारियों ने सभी पहलुओं पर अपनी जानकारी सांझा करने को कोशिश की, लेकिन इस गुमशुदा हाथी के बारे में अधिकारियों ने इसकी चर्चा तक नही की। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह मृत हाथी का कोई रिकॉर्ड विभाग के पास है भी की नहीं?

हाथी मॉनिटरिंग सिर्फ नाम के लिए?
किसी भी हाथी दाल से कोई हाथी गायब हो जाता है और विभाग को महीनो तक पता नहीं चलता है जबकि विभाग क्षेत्र में आये हाथियों की लगातार ट्रैकिंग करता है फिर सूरजपुर के अधिकारीयों ने महीनो तक एक हाथी को क्यों नहीं खोज पाया जो महज रेंज ऑफिस से 4 किलोमीटर दूर था? इसका मतलब साफ़ है कि विभाग की ट्रैकिंग सिर्फ नाम के लिए है.

मामला रफा दफा, कार्यवाही शून्य,
बलरामपुर डिवीज़न में हाल ही में  एक हाथी की मृत्यु के 6 दिन बाद पता चला, जिसके बाद सरकार ने 2 लोगों को ससपेंड कर दिया था साथ ही डीएफओ को नोटिस जारी किया है. यहाँ एक महीने में 4 किलोमीटर दूर हाथी का शव मिलने के बाद भी किसी पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई. मामला शव परीक्षण करके रफा दफा कर दिया गया. आखिर क्यों?

सूरजपर और बलरामपुर के डीएफओ को हटाने बढ़ी मांग, कहा गए हाथी दांत?

वन्य जीव प्रेमियों ने कहा बलरामपुर और सूरजपुर के डीएफओ को तत्काल हटाना चाहिए, जांच कर कार्यवाही होनी चाहिए। आश्चर्य की बात है इतने बड़े मामले को वन विभाग खुद छुपा रहा है. कोई कार्यवाही या जाँच करने को तैयार नहीं है. सूरजपुर में मरे हुए हाथी की फोटो में साफ़ दिख रहा है उसके दांत काटे गए है. यह तस्करी का मामला हो सकता है. एक हाथी के दांतों की कीमत 50 लाख से लेकर 80 लाख तक होती है.

हाथियों की मौत साजिस तो नहीं!
हाथियों के जानकार ओमप्रकाश शर्मा ने कहा हाथियों की लगतार हो रही मौत किसी साजिस की आशंका पैदा करती है. हाथियों के दांत की तस्करी से कोई इंकार नहीं कर सकता जो इनकी मौत का एक बड़ा कारण होता है. आधे से अधिक वन आमला जिला मुख्यालय से बाहर आपने क्षेत्र में ही नहीं जाता है.

कार्यवाही क्या हुई पता करके बताता – एपीसीएफ अरुण पांडेय
सूरजपुर में हाथी की मौत का कारण और जांच एव कार्यवाही के बारे में एपीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) अरुण पांडेय से पूछने उन्होंने कहा जानकारी लेकर बता पाएंगे।

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