February 26, 2021

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ब्रेकिंग न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जिन अस्पतालों को मुफ्त में जमीन मिली, वे मरीजों का इलाज भी मुफ्त में करें; सरकार ऐसे अस्पतालों की पहचान करे, कोरोना के इलाज को लेकर लगी याचिका…

नई दिल्ली, 27 मई 2020. सुप्रीम कोर्ट ने आज प्राइवेट अस्पतालों को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने केंद्र को उन अस्पतालों की पहचान कर एक सूची बनाने का निर्देश दिया, जहां कोरोनोवायरस के इलाज के लिए न्यूनतम कीमत या मुफ्त इलाज किया जा सकता है और एक सप्ताह बाद मामले को सूचीबद्ध किया है।

सीजेआई एसए बोबडे ने कहा, “आप उन सभी अस्पतालों की पहचान करें और पता लगाएं। आप यह जानने की कोशिश करें हैं कि क्या ये अस्पताल न्यूनतम लागत वसूल सकते हैं या मुफ्त उपचार कर सकते हैं।” दरअसल 30 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने सचिन जैन द्वारा दायर याचिका में नोटिस जारी किया था और यह कहा था कि वह निजी अस्पतालों के मामलों में उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

ऐसे प्राइवेट अस्पतालों की पहचान करें जहां कोरोना के मरीजों को फ्री या मामूली खर्चे पर इलाज मिल सके। कोर्ट ने कहा कि जिन अस्पतालों को फ्री में या फिर बहुत कम रेट पर जमीन मिली है उन्हें कोरोना के मरीजों का इलाज भी मुफ्त में करना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने अपने याचिका में कोर्ट से कहा कि कई प्राइवेट अस्पताल आर्थिक शोषण कर रह है प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना ट्रीटमेंट के खर्च पर लगाम लगाने की मांग की याचिका एडवोकेट सचिन जैन ने लगाई थी।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई निजी अस्पताल संकट के समय में भी कोरोना के मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। जैन का कहना है कि जो प्राइवेट अस्पताल सरकारी जमीन पर बने हैं या चैरिटेबल संस्थान की कैटेगरी में आते हैं, सरकार को उनसे कहना चाहिए कि कम से कम कोरोना के मरीजों का तो जनहित में फ्री या फिर बिना मुनाफा कमाए इलाज करें।

7 दिन बाद अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 30 अप्रैल को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये पॉलिसी मैटर है, इस बारे में सरकार को फैसला लेना था। हम अपना जवाब पेश कर देंगे। अगली सुनवाई 7 दिन बाद होगी।

‘जिन गरीबों के पास इंश्योरेंस नहीं, उन्हें भी निजी अस्पतालों में फ्री इलाज मिले’
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से सरकार को ये निर्देश देने की अपील भी की है कि गरीब तबके के कोरोना पीड़ित मरीज प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाएं तो उनका खर्च सरकार उठाए। जिन गरीबों के पास कोई इंश्योरेंस कवर या आयुष्मान भारत जैसी स्कीम नहीं है उन्हें भी फ्री इलाज मिले। साथ ही जिन गरीबों के पास इंश्योरेंस कवर है, लेकिन इलाज का खर्च रिएंबर्समेंट से ज्यादा होता है तो उसकी भरपाई भी सरकार को करनी चाहिए।

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