छत्तीसगढ़

CG में सरकारी घोषणाओं को पूरा करने में पुरानी योजनाएं अटकेंगी

रायपुर। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद प्राथकिताएं बदल गई हैं। नई सरकार ने अपने जन घोषणापत्र में विभिन्न् वर्गों के लिए तमाम नई घोषणाएं की हैं। किसानों की ऋण माफी और धान का समर्थन मूल्य सरीखी कुछ ही योजनाओं पर फिलहाल अमल हुआ है।

बेरोजगारी भत्ता, वृद्धावस्था पेंशन में बढ़ोतरी, पुलिस सुधार, कर्मचारियों को चार स्तरीय वेतन और क्रमोन्न्त वेतन, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, भूमि का चार गुना मुआवजा आदि ऐसी योजनाएं हैं जिनके लिए सरकार को भारी बजट की जरूरत होगी।

राज्य सरकार का पिछला बजट करीब 85 हजार करोड़ रूपये का था। नई सरकार का बजट एक लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है लेकिन इससे भी इन सभी घोषणाओं को पूरा किया जा सकेगा या नहीं इसे लेकर अनिश्चितता है। हालांकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कह चुके हैं कि घोषणाएं पांच साल में पूरी करनी हैं। मुख्यमंत्री के सचिव गौरव द्विवेदी कह रहे हैं कि अभी तो कार्ययोजना ही बन रही है। कार्ययोजना बनेगी फिर उसका विभागीय मंत्री अनुमोदन करेंगे।

इसके बाद देखा जाए कि किस योजना को तुरंत पूरा करना है और किसे कुछ समय तक रोका जा सकता है। सरकार के पास राजस्व का बड़ा साधन आबकारी से प्राप्त कर है। सरकार ने अपने घोषणापत्र में शराबबंदी का भी एलान कर रखा है। ऐसे में तमाम घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसे कहां से आएंगे यह बड़ा संकट है।

वित्त विभाग के अफसरों के मुताबिक सरकार की आर्थिक स्थिति को खराब नहीं माना जा सकता लेकिन ओवरड्राफ्ट तो है। सरकार पर करीब ढाई हजार करोड़ का कर्ज है। और कर्ज लेने से संकट बढ़ने की संभावना है। तो जिन घोषणाओं को पूरा करना जरूरी होगा उनकी प्राथमिकता सूची बनाई जाएगी। प्राथमिकता के आधार पर जो काम जरूरी होगा उसे इस साल के बजट में शामिल कर दिया जाएगा।

सरकार अपनी घोषणाओं को पूरा करने के लिए पुरानी सरकार की कुछ योजनाओं में कटौती भी कर सकती है। यह सब तय करने की जल्दबाजी सरकार को भी है। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार कुछ ऐसा करना चाहती है जिससे लगे कि वह वादों को पूरा करने के प्रति गंभीर है।

इन योजनाओं पर चल सकती है कैंची

नया राजधानी के विकास में सरकार बहुत पैसे लगा रही थी। अभी वहां करीब पांच सौ करोड़ की लागत से विधानसभा भवन बनाने की योजना थी। मुख्यमंत्री, मंत्री और अफसरों आवासीय परिसर समेत दूसरे काम भी किए जाने हैं। इन योजनाओं को फिलहाल टाला जा सकता है। मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत प्रस्तावित ऐसी सड़के जिसे पिछली बार बजट में शामिल नहीं किया जा सका था उसे अब रोका जा सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना में राज्य का जो शेयर लगता है उस पर भी कैंची चल सकती है। कौशल विकास, भवनों और सड़कों के निर्माण, नई रेललाइनों का निर्माण आदि नवीन परियोजनाओं को फिलहाल ठंडे बस्ते में रखा जा सकता है। वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार अभी सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं। एक बार कार्ययोजना बन जाए फिर देखेंगे कि कहां से पैसे आएंगे।

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