June 20, 2021

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कोरोना की चुनौतियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर मात्र 3 प्रतिशत : राष्ट्रीय औसत दर 10.8 फीसदी से बहुत कम, रोजगार देने में वन विभाग की रही बड़ी भूमिका, पूर्व भानुप्रतापुर वन मंडल रहा अव्वल

रायपुर, 07 जून 2021, कोरोना संक्रमण की चुनौतियों और लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर को लगातार नियंत्रित रखने में सफलता मिली है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) द्वारा मई 2021 को जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर 3 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय दर 10.8 प्रतिशत से काफी कम है। इसके पहले माह नवंबर 2020 में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर का आंकड़ा हरियाणा, गोवा, दिल्ली, झारखंड, राजस्थान, बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिपुरा की तुलना में काफी कम है।

वन विभाग की रही अहम भूमिका
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य के कम प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में मांग आने पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कार्य मंजूर किए गए। वनांचलों में वनोपजों और तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य भी किया जा रहा है। लघु-वनोपजों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले लघु-वनोपजों की संख्या 07 से बढ़ाकर 52 कर दी गई है। छत्तीसगढ़ में देश में संग्रहित लघु वनोपजों में से तीन-चौथाई से अधिक लगभग 75 प्रतिशत लघु वनोपजों का संग्रहण किया गया है। प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण में लगभग 13 लाख परिवारों को रोजगार मिलता है। प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 2500 हजार रूपए से बढ़ाकर 4000 हजार रूपए की गई है।

लॉकडाउन के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण में पूर्व भानुप्रतापपुर वनमण्डल छत्तीसगढ़ में अव्वल
वर्ष 2021 में कॉरोना प्रकोप और मौसम के मार के बावजूद पूर्व भानुप्रतापुर वनमण्डल ने रिकॉर्ड बनाते हुए लक्ष्य का 94.34% तेंदूपत्ता संग्रहण किया है। वनमण्डल में कुल 91320 मानक बोरा का संग्रहण हुआ है जबकि लक्ष्य 96900 मानक बोरा का था। वर्ष 2021 में मात्र 81,348 मानक बोरा का संग्रहण हुआ था। वनमण्डल में कुल 68 करोड़ का तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है जिसमें से 36 करोड़ का पारिश्रमिक राशि का भुगतान संग्राहकों को वर्तमान में हो रहा है और शेष राशि बोनस के रूप में बाद में होगा ।

आदिवासी परिवार को कठीन समय में 40,000 से 50,000 रू की हुई आमदनी – डीएफओ मनीष कश्यप
मनीष कश्यप, डीएफओ पूर्व भानुप्रतापपुर वनमंडल ने बताया वनमण्डल में कुल 42 समिति है जिसमें 36029 संग्रहक है जो तेंदूपत्ता की तुड़ाई करते है। 15 दिन के तेंदूपत्ता तुड़ाई से औसतन प्रति संग्रहक को 19,000 रू की आमदनी हुई है जिसमें 10,000 रू पारिश्रमिक राशि के रूप में मिलेगा। एक परिवार में औसतन 2 से 3 संग्रहक होते है। इस तरह हर एक आदिवासी परिवार को इस कठिन समय में 40,000 से 50,000 रू की आमदनी हुई है जो उनके लिए बहुत उपयोगी होगा जब लाकडाउन में सभी विभाग के रोजगार मूलक कार्य ठप पङे थे। कोरॉना में लॉकडाउन लगने के बावजूद सभी ठेकदारों और उनके मजदूरों को सभी फड़ो तक सेट किया । संग्रहण को लंबा खीच के 25 मई तक चलाया गया। इसी प्रकार वन विभाग ने प्रदेश भर में अच्छा कार्य कर कठिन परिस्थितियों में भी रोजगार मुहैय्या कराया है।

क्या है सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) रिपोर्ट
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक माह मई में बेरोजगारी की दर हरियाणा में 35.5 प्रतिशत, राजस्थान में 28, दिल्ली में 27.3, गोवा में 25.7, त्रिपुरा में 17.3, झारखण्ड में 16.5, बिहार में 11.5, जम्मू-कश्मीर में 11.4, हिमाचल प्रदेश में 11.1, पश्चिम बंगाल में 7.6, केरल में 7.5, उत्तरप्रदेश में 6.3, उत्तराखण्ड में 6, महाराष्ट्र में 5.5, पंजाब में 5.3, तेलंगाना में 5, आंध्रप्रदेश में 4.9 , छत्तीसगढ़ 3 प्रतिशत दर्ज की गई।

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