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सामुदायिक पुलिसिंग और मानवीय पहलू: पुलिस किसी को डराने के लिए नहीं होती, पुलिस तो लोगों की समस्याओं को हल करती है…

वर्तमान कोरोना संक्रमण काल में स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस पर सर्वाधिक ज़िम्मेदारियां हैं। लोग स्वास्थ्य कर्मियों को तो देवताओं की तरह प्रस्तुत कर रहे हैं,पर पुलिस कर्मियों को असुरों की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि एक कम्युनिटिंग पुलिसिंग की अवधारणा भी है। इसके अनुसार पुलिस को भी समस्त मानवीय पहलुओं की समझ के साथ ही अपना कार्य संपादित करना होता है। घनश्याम कामड़े पुलिस विभाग में डीएसपी हैं। उन्होंने कम्युनिटी पुलिसिंग को ही अपनी नौकरी का आधार बनाया हुआ है। वे इस अवधारणा को डूबकर जीते हैं।

उन्होंने इस तरह पुलिसिंग में बहुत से उल्लेखनीय कार्य किये हैं,जो कि पूरी तरह रूटीन से हटकर लगते हैं। यहां पर कम्युनिटी पुलिसिंग पर उनका लिखा हुआ आलेख प्रस्तुत है।

सामुदायिक पुलिसिंग और मानवीय पहलू
शब्द “पुलिस ” डर का पर्याय है। लोग कहते हैं कि पुलिस से दोस्ती और दुश्मनी दोनों अच्छी नहीं होती ।लेकिन वास्तव में पुलिस किसी को डराने के लिए नहीं होती । पुलिस तो लोगों की समस्याओं को हल करती है ।थाना 24 घण्टे खुला रहता है । किसी भी त्यौहार और छुट्टी पर भी पुलिस वाले ड्यूटी करते हैं। समाज में व्यवस्था बनाये रखने तथा अपराधों की रोकथाम एवं अनुसंधान करने के लिए विभिन्न नामों से पुलिस अस्तित्व में रही है।

वर्तमान में पुलिस:-
हमारा देश लगभग दो सौ सालों तक अंग्रेजों के अधीन रहा।स्वतंत्रता पश्चात भारत वर्ष में लोकतंत्र की स्थापना हुई।अब देश का शासक अंग्रेजी सम्राट न होकर देश की आम जनता हो गई। आम जनता को शासक के रूप में आत्मसात कर पाना थोड़ा कठिन अवश्य है लेकिन असंभव नहीं क्योंकि कोई भी विचार कितना ही श्रेष्ठ क्यों न हों , सबको साथ लेकर चलने के विचार से श्रेष्ठ नहीं हो सकता । यही लोकतंत्र का सर्वोच्च मूल्य है । आम जनता को शासक के रूप में स्वीकार करने तथा आम जनता के लिए शासन व्यवस्था का संचालन करने की दिशा में लगातार प्रयास करते हुए लोकतंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस दिशा में पुलिस भी बराबर अपनी भूमिका निभा रही है।
हमारा देश विकासशील देश है।विकासशील देश की अपनी गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार और आधारभूत संरचना का अभाव जैसी गंभीर समस्याएं होती है व इनसे व्युत्पन्न अन्य गंभीर समस्याएं भी होती हैं ।ऐसी परिस्थितियों में पुलिस अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी कर रही है।

पुलिस सुधार:-

कानून व्यवस्था, अपराधों की रोकथाम एवं अनुसंधान , व्ही आई पी सुरक्षा, यातायात व्यवस्था तथा अन्य सामाजिक सुविधाओं जैसे बहुआयामी कार्यों का निष्पादन करने के साथ ही पुलिस अपने कार्य व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए अनेकानेक प्रयास कर रही है। चलित थानों के माध्यम से समाज के अंतिम लोगों से जुड़ने से लेकर डिजिटल माध्यमों के उपयोग से पुलिस प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाकर उत्तरदायित्वों के निर्वहन में तेजी लाई जा रही है। पुलिस मित्र साथियों, महिला कमाण्डोज को आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर आम जनता से अत्यधिक निकट का संबंध स्थापित किया जा रहा है। ऐसे संबंध सुरक्षित एवं समृद्ध समाज की स्थापना में निश्चित ही मील के पत्थर साबित होंगे । इन सबके अतिरिक्त पुलिस कर्मियों एवं समाज की आवश्यकतानुरूप मित्रवत् व्यवहार को आत्मसात किया है । पुलिस थानों में महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित शिकायतों को ज्यादा संवेदनशील ढंग से महिला पुलिस कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा सुना जाता है और कार्यवाहियां की जाती हैं । पीड़ितों को न्याय एवं अधिकार दिलाने के लिए प्रत्येक पुलिस और अधिकार प्रतिबद्ध है । अन्तर्विभागीय सहयोग के द्वारा भी आम जनता की सहायता की जा रही है ।

आम जनता से अपील:-

पुलिस विभाग आम जनता से अपील करता है कि वे पुलिस को भी अपनी सामाजिक व्यवस्था का अभिन्न अंग समझें।आम जनता को यह बात बहुत अच्छे से मालूम होती है कि उनके जीवन में समाज में कौन-कौन सी समस्याएं विद्यमान हैं, कौन-कौन सी घटनाएं उनके आसपास घट रही हैं या कोई कार्य करते समय किस प्रकार की अड़चनें आ सकती हैं। समस्याओं की व्यवहारिक समझ के साथ ही उनके व्यवहारिक निराकरण की भी समझ आम जनता को भली प्रकार से होती है। अतः आम जनता और उनके प्रतिनिधि अपनी समस्याओं और उनके व्यवहारिक निराकरणों से पुलिस विभाग को अवगत करायें । पुलिस निश्चित ही आपकी सहायता करेगी क्योंकि पुलिस विभाग के कर्मचारी और अधिकारी शासकीय सेवक होने के साथ ही समाज के प्रशासनिक प्रतिनिधि (नैतिक रूप से )भी हैं । इस प्रकार समस्याओं का निराकरण उनके शुरुआत में ही कर देने
से बड़ी समस्याओं से समाज को सुरक्षित रखा जा सकता है । इसके बाद भी बड़ी समस्याएं आती हैं तो उसके लिए कानूनी प्रावधान हैं ही ।

कुछ बातें अपने आप ( विभाग ) से :-

मैं अपने पुलिस विभाग के साथियों से अपील करना चाहता हूँ कि हम अपने आपको हमेशा ही समाज के साथ जोड़कर देखें । हमारा भी घर- परिवार है जो समाज के साथ रहता है । अतः किसी भी पुलिस प्रक्रिया में मानवीय दृष्टिकोण का अतिक्रमण न करें । अपनी क्षमतानुरूप कार्य करते हुए लोकतांत्रिक समाज के सुदृढ़ीकरण के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करें । ” न्याय ” व्यापक अर्थों वाला है जिसका सरल अर्थ है , जो होना चाहिए वह होना ही चाहिए और जो नहीं होना चाहिए, वह नहीं ही होना चाहिए । हम सब ” न्याय ” दिलाने की दिशा में कार्य करने वाले प्रथम कार्यकर्ता हैं। अतः हमारी कार्यकारी और सामाजिक भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है । समाज में अपनी विशेष स्थिति और भूमिका के अनुरूप हम अपने आपको निरंतर परिमार्जित करें ताकि आम जनता का प्यार व सहयोग हमें मिलता रहे।

अंत में:-
देश और दुनिया में एक ऐसी व्यवस्था कायम हो जिससे हर किसी को इस देश, इस समाज और इस दुनिया का अभिन्न हिस्सा होने का भान हो और साथ ही वह इस तरह अभिन्न हिस्सा होने में गौरव का अनुभव कर सके। अपनी क्षमता का पूर्ण विकास कर सके और अपनी क्षमतानुरूप अपने जीवन को तथा राष्ट्र को समृद्ध बना सके । इस बात की पूरी गारंटी होनी ही चाहिए । इस गारंटी की शुरुआत मानवीय समाज और पुलिस समाज के एकाकार हो जाने से ही होगी । आइये हम सब मिलकर साथ चलें और एक सुंदर और समृद्ध समाज में जीने का आनंद लें ।

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