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जानिए वन विभाग में किसका कितना कमीशन ?? खुलेआम मजदूरों के खून-पसीने की कमाई में भी डीएफओ मांग रही 18.5 प्रतिशत कमीशन, नहीं पहुंचाने वाले कर्मचारी को प्रताड़ित करने का लिखित आरोप,…. अधिकारी आये वचाव में पीसीएफ एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने कहा शिकायकर्ता की ही होगी जाँच, वह विक्षिप्त है.

रायपुर, 07 नवम्बर 2020. भ्रष्टाचार किस हद तक है यह तो सभी को पता है लेकिन वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी इन दिनों बेलगाम होते नजर आ रहे हैं. हाल ही में एसजी न्यूज़ ने 12 करोड़ से अधिक के बने बनाये रोड बनाने में होने जा रहे भ्रष्टाचार की पोल खोली थी जिसके बाद पीसीसीएफ की अनुसंसा पर आपदा प्रबंधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन ने कार्य की स्वीकृत निरस्त कर दी थी. अब नया मामला जांजगीर चांपा वनमंडल का आया है जहां एक रेंजर ने पत्र लिखकर डीएफओ से कहा है कि आप अपने और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मजदूरों की मजदूरी पर 18.5% प्रतिशत कमीशन मांगते है.

क्या है मामला?
वनमंडल चांपा मे पदस्थ सक्ति परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) एम आर साहू ने वनमंडलाधिकारी चांपा को पत्र लिखकर कहा है की विगत दो माह से श्रमिकों के पारिश्रमिक भुगतान पर 18. 50 प्रतिशत कमीशन की मांग की गयी है. इस सम्बन्ध में बाकायदा आपके द्वारा दिनांक 03/11/2020 को शक्ति विश्राम गृह में मीटिंग लेकर समस्त वनपाल, वनरक्षक एवं उप वनक्षेत्रपालों से कमीशन की मांग की है. पत्र मे ये लिखित आरोप है बाकायदा किसका कितना कमिशन है.यह भी लिखा गया है कि 25 बार फ़ोन लगाकर डीएफओ ने रिश्वत की मांग की है लेकिन रेंजर ने नहीं देने की असमर्थता जताते हुए ऊपर शिकायत करने कहा गया है.

किसका कितना है कमिशन?
लिखे गए पत्र के मुताबिक मजदूरी भुगतान में डीएफओ ने 18.5 प्रतिशत की मांग की है जिसमे डीएफओ ने ऊपर के अधिकारियों का हिस्सा भी बताया है

  1. डीएफओ स्वयं का कमीशन- 10 प्रतिशत
  2. ऊपर के अधिकारियों का कमीशन- 7.5 प्रतिशत
  3. अन्य व्यय पर पर कमीशन- 1 प्रतिशत

आरोप में डीएफओ के ऊपर के अधिकारी में कौन-कौन शामिल है यह तो जाँच का विषय है. कमीशन किस-किस को कहा तक जाता है? एक प्रतिशत अन्य खर्च क्या है? क्या इन सबकी पोल खुलना संभव होगा?? ऐसी उम्मीद न करें।

डीएफओ नहीं पढ़ती मेल… नीचे के कर्मचारी बताते नहीं ? या जानबूझकर किया जा रहा परेशान
एस जी न्यूज़ ने जांजगीर चांपा वन मंडल की डीएफओ प्रेमलता यादव से उनके ऊपर कमीशन मांगने के आरोप पर उनका पक्ष जानना चाहा जिस पर पहले तो उन्होंने कहा उसे सच मान लीजिये,….

डीएफओ ने कटघोरा की एक मीटिंग में रेंजर की अनुपस्थिति पर कारन बताओ नोटिस जारी किया था जिस पर डीएफओ से यह पूछे जाने पर कि जिस दिनांक कि अनुपस्थिति पर रेंजर को 10 दिन बाद आपके द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया, जबकि रेंजर ने अनुपस्थिति दिनांक के अगले ही दिन मेल से अपनी छुट्टी के लिए कारण और मेडिकल पर्ची आपको भेज चुका था. इस पर डीएफओ ने कहा मेल मै चेक नहीं करती हूँ, मेरा स्टाफ मेल चेक करता है. डीएफओ को यह भी पता होना चाहिए कि लेटर भी वही स्टाफ टाइप करता है. तो क्या उसने नहीं बताया होगा? क्या स्टाफ मैडम को उच्च अधिकारीयों से आये हुए मेल भी नहीं बताता?? या जानबूझकर प्रताड़ित करने लेटर जारी किया गया??

क्यों बार-बार वक्तब्य बदल रही है आरोपित डीएफओ
एसजी न्यूज़ के यह सवाल करने पर कि क्या आपने दिनांक 03/10/2020 को कर्मचारियों की मीटिंग शक्ति विश्राम गृह में लिया था? पहले तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया कि न तो वहा गयी थी न ही कोई मीटिंग लिया। कई बार पूछने पर फिर यह कहा मै परिवार के साथ गयी थी मीटिंग नहीं हुई थी. कोई स्टाफ नहीं आया था. उसके बाद यह भी कहा कि कुछ स्टाफ के लोग मिलने आये थे. आखिर मीटिंग में ऐसी क्या बात हुई कि डीएफओ को बार-बार अपना वक्तव्य बदलना पड़ रहा है या मीटिंग को छुपाना पड़ रहा हैं.

शिकायकर्ता की ही होगी जाँच, वह विक्षिप्त है- पीसीएफ एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी

पीसीएफ एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी से एसजी न्यूज़ ने जब उक्त मामले में जानना चाहा कि कमीशन उच्च अधिकारियों के नाम पर भी मांगा जा रहा है तो उन्होंने उच्च अधिकारियों का नाम आते ही कहा शिकायतकर्ता का बैकग्राउंड ठीक नहीं है, वह विक्षिप्त है, उसकी जाँच होगी, आखिर वन बल प्रमुख बिना मेडिकल जाँच के किसी भी कर्मचारी को विक्षिप्त कैसे घोषित कर सकते है? यह पूछे जाने पर कि इसके पहले भी कोरबा की घटना पर शिकायतकर्ता की ही जाँच हो गयी क्या सभी विक्षिप्त वन विभाग में ही है? शिकायत पर नहीं शिकायकर्ता की जांच होती है? शिकायत की जाँच क्यों नहीं होती? इस उन्होंने आस्वस्त किया की शिकायत पर विंदुवार जाँच होगी।

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