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प्रदेश में हो रही लगातार हाथियों की मौत…… जिम्मेदारों ने आँख कान किया बंद…… क्या प्रदेश में हाथी की मौत का हंगामा सिर्फ एक अधिकारी को हटाने के लिए थी साजिश??

रायपुर 28 अक्टूबर 2020. प्रदेश में हाथियों की मौत के लगातार बढ़ रहे आंकड़े और जिम्मेदारों के आँख कान बंद करने के बाद यह लगता है कि हाथियों की मौत कुछ अधिकारियों के राजनीतिक उठापटक कर लाभ लेने के लिए ही चर्चा का विषय बनाया गया था. उनके लाभ मिल जाने के बाद सभी अधिकारियों ने हाथियों की मौत से आंख कान बंद करके रख लिया है.

क्या कहते हैं आंकड़े?
बता दें कि वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में कुल 9 हाथियों की मौत हुई थी. जबकि इस वित्त वर्ष में पहले 7 महीने में ही अब तक 16 हाथियों की मौत हो चुकी है. शुरू के 3 महीने में सात हाथियों की मौत के बाद, पूरे प्रदेश और देश भर में यह हंगामा मचाया गया कि प्रदेश में हाथियों की लगातार मौत हो रही है, और विभाग कुछ नहीं कर रहा है. जिसके बाद आनन-फानन में कार्यवाही करते हुए सरकार ने तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अतुल शुक्ला को हटा दिया गया साथ ही शो कॉज नोटिस भी जारी किया गया. अन्य कई अधिकारियों को भी नोटिस जारी हुए. इसके बाद भी विभाग ने कोई सीख नहीं ली अतुल शुक्ला के हटाए जाने के अगले 4 माह में ही 9 हाथियों की मौत हो चुकी है हालांकि अब हाथियों की मौत पर कोई चर्चा नहीं करता है.

मौत के आंकड़े

उक्त लिस्ट के अलावा

  1. धरमजयगढ़ में 1 हाथी की मौत
  2. महासमुंद में एक हाथी की मौत
  3. गरियाबंद में 2 हाथी की मौत
  4. कुनकुरी में 1 हाथी की मौत
  5. कटघोरा में 1 हाथी की मौत
  6. केंदई वनक्षेत्र 1 हाथी के बच्चे की मौत सोमवार को ही हुई है

क्या एक अधिकारी को हटाने की थी साजिश??
अब यह सवाल क्या यह सुनियोजित तरीके से विभाग में एक अधिकारी को हटाए जाने के लिए हंगामा खड़ा किया गया था जबकि हाथी के जीवन और मौत से किसी को कोई लेना देना नहीं है?? जिस तरह से पिछले 4 महीने में हाथियों की लगातार मौत की संख्या बढ़ी है उसके बाद भी ना तो सरकार ने ना ही जिम्मेदार किसी अधिकारी ने किसी को नोटिस किया और ना ही कोई कार्यवाही हुई.

एक बात तो साफ़ लगती है कि हाथियों की मौत का बखेड़ा क्या सिर्फ अधिकारी को हटाने के लिए किया गया था. अब पूरे विभाग में यह चर्चा जोरों पर है कि तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ को हटाने के लिए हाथियों की मौत का शिगूफा विभाग के ही एक अधिकारी ने खड़ा किया था. और देश प्रदेश भर में मामले को उछाला गया. यहाँ तक चर्चा है कि अब वाइल्ड लाइफ शाखा उक्त अधिकारी के द्वारा ही संचालित हो रही है. अतुल शुक्ला के हटते ही इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. जबकि अतुल शुक्ला के हटने के बाद हाथियों की मौत के आंकड़े तेजी से बढ़े है फिर भी किसी ने हाथियों की मौत पर चर्चा नहीं की

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