छत्तीसगढ़

हाथी मौत में गफलत! वन विभाग का दावा कि गणेश मरा नहीं….. अगर मरा नहीं तो फिर गणेश है कहां? खुलासा करे वन विभाग….

रायपुर/रायगढ़, 19 जून 2020. धर्मजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत छाल रेंज में कल बिजली करंट से मृत पाए गए हाथी को लेकर पहले वहां के डीएफओ ने एक वीडियो जारी करके दावा किया कि मृत हाथी गणेश हाथी है. बाद में उसी डीएफओ ने दूसरा वीडियो जारी करके दावा किया कि यह गणेश हाथी नहीं है. ऐसे में प्रश्न उठता है कि अगर गणेश नहीं मरा तो गणेश है कहां? और जो हाथी मरा वह कौन सा हाथी मरा?

गणेश हाथी उत्तरी छत्तीसगढ़ क्षेत्र में विचरण करता रहा और गार्ड स्तर के फील्ड कर्मचारी उसे पहचानते हैं. ऐसे में वन विभाग को खुलासा करना चाहिए की गणेश हाथी कहां है?

वन विभाग की आंख की किरकिरी बना रहा गणेश हाथी

आपको बता दें कि जुलाई 2019 में पीसीसीएफ वन्य प्राणी अतुल शुक्ला ने गणेश हाथी को पकड़कर आजीवन बंधक बनाने के आदेश जारी किए थे. मामला हाईकोर्ट पहुंचा था. जिसके बाद विभाग को समझ में आया की हाथी अनुसूची एक का प्राणी होता है इसे बंधक बना कर नहीं रखा जा सकता तो आदेश में संशोधन किया गया.

इस बीच में गणेश को बेहोश कर रेडियो कॉलर लगाकर तमोर पिंगला में कैद करके रखने की योजना बनाई जा रही थी बेहोश करने के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई तब उसे रिवाइवल का इंजेक्शन दिया गया वह पांव में बंधी चैन तोड़ कर के चला गया. बाद में किसी तरह दोबारा बेहोश करके उसकी चेन निकाली गई.

गणेश हाथी विभाग की आंखों की किरकिरी बना रहा तब नवंबर 2019 में गणेश हाथी का क्या किया जाए? इसके लिए अधिकारियों की एक समिति बनाई गई. कुछ दिन बाद में इस समिति में रायगढ़ क्षेत्र के राजनेताओं को भी जोड़ दिया गया, तब यह विरोध किया गया कि गणेश हाथी का क्या किया जाए यह विशेषज्ञों का मामला होना चाहिए इसमें राजनीति नहीं की जानी चाहिए. परंतु विरोध को दरकिनार करते हुए तब समिति में और राजनेताओं को और सरपंच इत्यादि को जोड़ दिया और रायगढ़ में एक बड़ी भारी मीटिंग की गई. रायगढ़ में विभाग एक भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका कि गणेश हाथी से किसी की मृत्यु हुई है. यहां तक की ग्रामीणों ने गणेश हाथी का पक्ष लेकर कहा कि वह किसी का नुकसान नहीं करता.

गणेश का रेडियो कॉलर गिर गया था और रेडियो कॉलर लगे रहने के दौरान 1 साल में उसके द्वारा कोई मृत्यु का प्रमाण नहीं है

हाल ही में 2 माह पूर्व गणेश हाथी को लगाया गया रेडियो कॉलर गिर गया जिस से पुनः लगाने का प्रयास किया गया परंतु वन विभाग असफल रहा रेडियो कॉलर लगे होने के दौरान उससे कोई भी मौत नहीं हुई.

क्या कहते हैं वन्य जीव प्रेमी
वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि पहली बात तो वन विभाग के उच्च अधिकारियों का यह दावा गलत है गणेश के हाथों 19 लोग मरे हैं उनके पास दस्तावेज हैं जिस से भी प्रमाणित कर सकते हैं कि गणेश से एक भी मृत्यु नहीं हुई है दूसरी बात यह है कि वन विभाग दो दो बार अलग-अलग वीडियो जारी करके गणेश के मृत्यु को लेकर अलग-अलग दावे करता है ऐसे में वन विभाग को खुलासा करना चाहिए कि गणेश हाथी कहां है? अगर वन विभाग खुलासा करने में असफल रहता है तो पीसीसीएफ से डीएफओ स्तर के अधिकारियों को अपनी असफलता स्वीकार करके यह मानना चाहिए कि वन विभाग हाथियों को पहचान भी नहीं पाता. हाथियों को पहचानने का सबसे सटीक तरीका है उनके कानों की नसें जो कि आजीवन मानव के फिंगरप्रिंट के सामान एक समान रहती है. दूसरी पहचानने का तरीका हाथियों के कान में कैची से काटे गए हिस्से की तरह अलग-अलग कटाव रहते हैं. हाथी की सूंड से भी उसकी पहचान हो सकती है.

गणेश ही मरा है!
नितिन सिंघवी ने बताया कि उन्होंने गणेश हाथी को पहचानने वाले विशेज्ञों से चर्चा की है जिन्होंने दावा किया है कि मृत हाथी गणेश ही है.

आखिर क्यों गणेश की मौत छिपा रहा वन विभाग?
गणेश हाथी इस क्षेत्र में बहुत दिनों से विचरण कर रहा था जिसकी वन विभाग लगातार ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग कर रहा था यदि यह बात सही है कि गणेश ही मारा है तो विभाग के ऊपर कई सवाल खड़े होते है कि वह हाथी गांव तक आ गया जिसकी ट्रैकिंग वन विभाग कर रहा था और विभाग को पता भी नहीं चला? तो फिर जनहानि और जानवर की रक्षा विभाग कैसे करता होगा?

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