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गोधन न्याय योजना: घर में एक भी जानवर नहीं फिर भी गोबर से अब रतिराम की प्रतिदिन हो रही है कमाई… जानिए कैसे?

रायपुर/कांकेर, 31 जुलाई 2020. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘‘गोधन न्याय योजना’’ की शुरूआत की गई है, जो ग्रामीणों के लिए आजीविका का साधन बन गया है। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम मुंगवाल के रति राम कुमेटी के पास एक भी पालतू मवेशी नहीं है, उसके बाद भी वे 70 से 80 किलोग्राम गोबर का विक्रय प्रतिदिन गौठान में कर रहा है।

कांकेर जिले के प्रभारी सचिव धनंजय देवांगन और जिला कलेक्टर के.एल. चौहान मुंगवाल के गौठान का आकस्मिक निरीक्षण करने पहुंचे उस समय रति राम कुमेटी द्वारा 86 किलो गोबर का विक्रय गौठान समिति को किया जा रहा था, पूछने पर उन्होंने बताया कि उनके घर में एक भी मवेशी नहीं है, लेकिन खेती किसानी से फुर्सत के क्षणों में सुबह-शाम घूम-घूमकर गोबर इकट्ठा करते हैं और उसे गौठान समिति को बेच देते हैं। रति राम ने बताया कि उनके द्वारा हर रोज लगभग 70 से 80 किलो गोबर का विक्रय गौठान समिति को किया जा रहा है। पूछे जाने पर रति राम ने बताया कि उनकी तीन एकड़ की खेती है जिसमें धान की फसल ली गई है परन्तु पशुधन नहीं है।

गौरतलब है कि शासन द्वारा हरेली तिहार 20 जुलाई से ‘‘गोधन न्याय योजना‘’ प्रारंभ किया गया है, जिसके तहत् कांकेर जिले के 197 गौठानों में भी गोबर को 02 रूपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है, जिसे वर्मी कम्पोस्ट बनाकर विक्रय किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीणों सहित महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहा है।

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