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वन विभाग हाथियों का रक्षक या भक्षक? हाथियों पर आग और पटाखे फेंक कर उग्र कर रहा है वन विभाग..??

रायपुर, 14 Oct 2020. छत्तीसगढ़ में हाथियों की हालत क्या है यह तो वर्ष 2020 में हुई 13 हाथियों की मौत का आंकड़ा बताता है जिसमें 6 हाथियों की तो बिजली करंट से मृत्यु और एक को जहर देकर मारा गया है. बिजली करंट से हाथियों की मौतों के मामले में तो वन विभाग और विद्युत वितरण कंपनी में बिना समय सीमा का फुटबॉल मैच 2 वर्षों से चालू है.

दरअसल गहराई से देखा जाए तो हाथी मानव द्वंद वन विभाग बढ़ा रहा है. मुख्यालय वालों की सोच शॉर्ट टर्म में मंत्री जी को खुश करने की रहती है और विजन की कमी के कारण मुख्यालय फील्ड वालों को मार्गदर्शन नहीं दे पाता, जिससे फील्ड वाले मनमानी करके समस्या को बढ़ावा देते हैं. हाथियों पर आग फेंकना, पटाखे फोड़ कर उन्हें उत्तेजित करना, मशाल दिखाकर डराना प्रतिबंधित है. हाथी की चमड़ी संवेदनशील होती है आग पड़ने से उन्हें काफी कष्ट होता है. इससे हाथी उग्र होते हैं तथा घटना को भूल नहीं पाते.

राजनेताओं को खुश करने के चक्कर में वन विभाग हाथियों के व्यवहार को समझने में फेल हो गया है और इसके चलते बंद कर्मचारियों को मनमानी करने का मौका मिल गया है, जिसे देखकर नजरअंदाज करने में ही मुख्यालय भला समझता है.

गरियाबंद और महासमुंद के बीच फंसा हाथियों का दल…..

महासमुंद बारनवापारा क्षेत्र में काफी लंबे समय से चंदा हथनी का दल बड़े ही शांत तरीके से रह रहा है पर अब वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण हो रहा है. इसका कारण है कि महासमुंद से जब दल गरियाबंद तरफ जाता है तो बला टालने के लिए महासमुंद के वन कर्मी ग्रामीणों के साथ हाथियों को पटाखा फोड़ कर आग जलाकर डराते हैं. हाथी दल वापस महासमुंद लौट जाता है तो वहां पर भी महासमुंद के वन कर्मी आग हाथियों पर फेंकते हैं और हाथी दल फस जाता है.

वन विभाग के जानकार ही फेक रहे आग और फोड़ रहे पठाखे

हाल ही में गरियाबंद के फिंगेश्वर क्षेत्र का एक वीडियो सामने आया है जिसमें हाथियों को आग लगी बड़ी मसालों से डराना और पटाखा फोड़ना दिख रहा है और यह कार्य वन विभाग के शासकीय अधिकारी के संरक्षण में हो रहा है वीडियो में वन विभाग की जीप का नंबर CG 02 F 0213 स्पष्ट दिखाई देता है जहां गाड़ी वहां के रेंजर की बताई जाती है.

पहले भी कर चुके है ऐसी गलती

इसके पूर्व का वीडियो भी देखें जो कि महासमुंद के खड़ासा गांव का कुछ माह पूर्व का है जिसमें हाथियों पर मशाल फेंकते हुए देखा जा सकता है दोनों वीडियो में वन कर्मियों की उपस्थिति रहने की बात बताई जा रही है. महासमुंद की घटना पर मुख्यालय में शिकायत भी दर्ज की गई थी परंतु दोषियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई महासमुंद के डीएफओ मयंक पांडे ने भी कहा था कि दोषियों पर कार्रवाई होगी परंतु किसी भी दोषी के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की गई.

गौरतलब है कि हाथियों पर आग फेंकना, मिर्ची फेंकना, पटाखा फोड़ कर डराना इत्यादि कार्य हाथियों के प्रति क्रूरता की श्रेणी में आते हैं और कई उच्च न्यायालय ने अत्याचार पर रोक लगा रखी है

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