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हेल्थ: लॉकडाउन में देर तक मोबाइल और कंप्यूटर में बच्चों की पढ़ाई कहीं पड़ ना जाए भारी….. क्या है नुकसान? कैसे करें वचाव?- नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर विनोद गेडाम।

रितेश तिवारी, रायपुर, 01 मई 2020. लॉक डाउन के दौरान स्कूल बच्चों की लगातार मोबाइल और कंप्यूटर पर ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं. काम उम्र के बच्चे कई घंटे तक लगातार मोबाइल में ही लगे हुए हैं. जहां एक तरफ इन क्लास लेने के फायदे हैं वहीं बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता लगातार जाहिर की जा रही है. फिलहाल ऑनलाइन क्लास को लेकर सरकार की कोई खास गाइड लाइन नहीं है की किस उम्र के बच्चो को कितने घंटे पढ़ना है. ज्यादातर लोग मोबाइल का ही ऐसी क्लास के लिए उपयोग कर रहे हैं. कंप्यूटर और लैपटॉप कम ही उपयोग होता है.
90 प्रतिशत स्कूल व्हाट्सप्प पर ग्रुप बनाकर चैट कर रहे, जिसका कोई फायदा होते नहीं दिख रहा है बच्चे सैकड़ों मैसेज करते हैं किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है. जबकि सरकार ने वेबसाइट लांच कर पढ़ने के लिए मटेरियल उपलब्ध करवा रही है. कुल मिलाकर मासूम बच्चों के साथ खिलवाड़ जैसा हो रहा है. एक सख्त दिशा निर्देश और गाइड लाइन की जरुरत है.

आखिर बच्चे कितने घंटे तक इस तरह की पढ़ाई कर सकते हैं? उनके आंखों में क्या प्रभाव पड़ेगा? तमाम तरह की जिज्ञासाओं को लेकर हम नेत्र विशेषज्ञ और दृष्टि नेत्रालय के संचालक डॉक्टर डॉ विनोद गेडाम से मुलाकात कर ऐसे तमाम सवालों के जवाब जानने चाहे।

डॉ गेडाम के अनुसार बच्चों के ज्यादा देर तक मोबाइल और कंप्यूटर उपयोग करने से आंखों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है. जिसके कारण आंखों में स्ट्रेन, आंखों में जलन, धुंधला दिखना,सर दर्द ,आंखों में लालपन होना जैसी समस्याएं उभर कर सामने आने लगती हैं.

डॉ गेडाम ने बताया कि ज्यादा देर पड़ने के कारण लगातार देखने से आंखों की मांसपेशियां पर जोर पड़ता है. पलक झपकने की फ्रीक्वेंसी कम हो जाती है, जो आंसू की परत सुखा देता है. जिससे ड्राई आई हो जाता है. मोबाइल से निकलने वाली किरणें यानी ब्लूरेज नुकसान दाई है. इसलिए बच्चों लगातार कंप्यूटर में या मोबाइल पर ना बैठे। कंप्यूटर या टीवी बड़े स्क्रीन पर फिर भी बच्चों के लिए ठीक है लेकिन मोबाइल कंप्यूटर लैपटॉप या टीवी से ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है.

यदि बच्चे ऑनलाइन सुविधाएं ले रहे हैं तो क्या सावधानियां बरतनी चाहिए

डॉ गेडाम ने बताया आंखों से बचाव के लिए निम्न सावधानियां बरतनी जरूरी है-

  1. हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूरी पर देखें।
  2. लगातार पलक झपकाये।
  3. यदि चश्मा लगा हो तो बिना चश्मे के काम ना करें।
  4. ब्लू रे से बचने के लिए विशिष्ट कोटी वाले ग्लासेस पहने।
  5. पर्याप्त रोशनी में ही मोबाइल का उपयोग करें।

सिक्योरिटी और प्राइवेसी को लेकर जूम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप पर लगातार सवाल उठ रहे

घर से काम के दौरान मीटिंग स्काइप या फिर जूम जैसे वीडियो कॉलिंग एप के जरिए हो रही है। वर्क फ्रॉम होम के दौरान जूम वीडियो कॉलिंग एप का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है। इसके अलावा स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई भी इसी एप से हो रही है, लेकिन सिक्योरिटी और प्राइवेसी को लेकर जूम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम और राष्ट्रीय साइबर-सुरक्षा एजेंसी ने कुछ दिन पहले जूम की सिक्योरिटी को लेकर लोगों को आगाह किया था और कहा था कि जूम एप साइबर हमलों का जरिया बन सकता है। इस एप के जरिए साइबर अपराधी सरकारी और निजी कार्यालयों से डाटा चोरी करके उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। सीईआरटी ने कहा है कि जूम एप के साथ डाटा लीक का खतरा है। हाल ही में जूम एप के पांच लाख अकाउंट्स के हैक होने की खबर आई है। ब्लीपिंग कंप्यूटर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि जूम के पांच लाख अकाउंट को हैक कर लिया गया है और डार्क वेब पर मामूली कीमत में लोगों का निजी डाटा बेचा जा रहा है।

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