छत्तीसगढ़

हद है भ्रष्टाचार और तानाशाही की!! बीएमओ पर कर्मचारियों से रिश्वत मांगने का आरोप… मंत्री तक लिखित में शिकायत.. फिर भी कार्यवाही शून्य..?

 

महासमुंद/सरायपाली, 14 मई 2020. जब अपनी ही मेहनत का पैसा मागने पर कोई अधिकारी रिश्वत मांगे कर्मचारी परेशान होकर मंत्री तक शिकायत कर दे वह भी सामूहिक रूप से तो सोचिये हालत क्या होंगे?

दरअसल स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सराईपाली में पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ अमृत के रवैये  एवं कार्यशैली से यहां के कर्मचारी परेशान होकर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कलेक्टर के बाद स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत लेकर पहुंच गए हैं.

देश जहां कोरोण वायरस से जूझ रहा है इस संकट की घड़ी में सबसे प्रत्यक्ष और सामने के योद्धा कोई है तो वह स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हैं सभी स्वास्थ्य कर्मचारी सेवा भाव से अपने अपने कर्तव्यों का निर्वहन जिम्मेदारी पूर्वक कर रहे हैं साथ ही राज्य सरकार द्वारा हमारी सेवा को अत्यावश्यक सेवा घोषित किया गया है

कर्मचारियों का आरोपी है कि एस्मा का फायदा उठाकर यहां के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ अमृत द्वारा अनावश्यक तरीके से 15 से 20 का वेतन बिना सूचना के काट दिये जिससे सभी कर्मचारी  भयभीत  हैं।  यही नहीं उक्त अधिकारी का रवैया और स्वभाव में मानवता भी नहीं है.

कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि किसी के घर में किसी सदस्य की गंभीर बीमारी हो जाने पर अवकाश हेतु आवेदन लगाने पर अवकाश भी नहीं दिया जाता है. बीएमओ कहते हैँ जहां बोलूंगा वहां उपचार कराना नहीं तो फिर अवकाश नहीं मिलेगा.

मेहनत का पैसा नहीं दे रहे अधिकारी
कर्मचारियों के आरोप के अनुसार untied fund से पैसे की मांग हो या हेल्थ वैलनेस सेंटर में मिलने वाली इंसेंटिव की राशि पर कमीशन की मांग की जाती है. विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों का कभी भी समय पर पैसा नहीं मिलता इत्यादि समस्या को लेकर कर्मचारी कई बार मौखिक और लिखित शिकायत कर चुके हैं.

विभाग से कार्यवाही शून्य, किसके दवाब में??
इतनी शिकायतों के बावजूद विभाग के उच्च अधिकारीयों द्वारा ना तो कोई जाँच होती ना ही कार्यवाही.
अब यह सवाल उठने लगे हैँ कि किसके दवाब में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है? क्या कोई राजनितिक दबाव है या भ्रष्टाचार कि आड़ में अधिकारी ही जाँच को दबाये बैठे है. यह तो सब आरोप है. जब तक जाँच नहीं होंगी सच सामने नहीं आएगा.

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