छत्तीसगढ़

जिस रेस्ट हाउस में पहले से महिला एसडीएम रुकी थी उसी में एसडीओपी ने रुकवा दिया एक आईपीएस को….. कलेक्टर को पत्र लिखकर SDOP पर FIR दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की मांग तो तो महिला SDM का ही कर दिए ट्रांसफर !!

बलरामपुर 29 अप्रैल 2020। बलरामपुर जिले में बड़ा प्रासनिक विवाद उभर कर आया है. बलरामपुर की एसडीएम ज्योति बबली बैरागी और एसडीओपी भुवेश जायसवाल के बीच हो गया है. विवाद पहले से चल रहा था लेकिन उस समय फूटकर बाहर आ गया जब एसडीएम ने एक आईपीएस अधिकारी को उसी गेस्ट हाउस में रुकवा दिया जिसमे पहले से महिला एसडीएम रुकी हुई थी. जाहिर सी बात है यह किसी महिला को बर्दास्त नहीं होगा भले ही वह उच्च अधिकारी हो.

महिला एसडीएम का आरोप है कि इसके पहले भी एसडीओपी उनसे बत्तमीजी से पेश आते थे. पत्र में सबसे गंभीर आरोप रेस्ट हाउस के विवाद को लेकर है। शिकायती पत्र में 22 अप्रैल की तारीख का जिक्र करते हुए महिला अधिकारी ने कहा कि वो कोरोना के मद्देनजर दौरे पर तहसीलदार के साथ निकली थी और रात करीब 8 बजे जब वो पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस लौटी तो उनके कमरे में किसी और व्यक्ति ठहरा हुआ मिला। जब कर्मचारियों से बात की गयी तो जानकारी दी गयी कि एसडीओपी के निर्देश पर उन्हें ठहराया गया है। इस मामले में कड़ी आपत्ति के बाद उनका कमरा खाली किया गया, लेकिन जैसे ही वो कमरे के अंदर दाखिल हुई, कुछ देर में बिना इजाजत लिये ही एसडीओपी उऩके कमरे में दाखिल हो गये। जिसके बाद दोनों में जमकर विवाद हो गया। यही नहीं यह भी आरोप है कि एसडीओपी ने महिला एसडीओ को जेल भेजने की धमकी देने के साथ-साथ पुलिस अधिकारी होने की धौंस दिखायी।

इस मामले को लेकर महिला एसडीएम ने जिला कलेक्टर संजीव झा को पत्र लिखकर एसडीओपी भुवनेश जैसवाल पर FIR दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। ढाई पेज की लंबी शिकायत में महिला अधिकारी ने पुलिस विभाग के अफसर पर बिना इजाजत कमरे में घुसने, रेस्ट हाउस में उनके रूम में दूसरो को ठहराने, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए फोन पर बात करने सहित कई और गंभीर आरोप लगाये हैं।

कौन है आईपीएस जिनके ठहरने से हुआ विवाद।।।
मीडिया ख़बरों के अनुसार आईपीएस लाल उमेद परिवार के साथ ससुराल उत्तरप्रदेश जा रहे थे ससुराल में किसी की मृत्यु हो गयी थी, जिन्हे PWD के रेस्ट हाउस में एसडीओपी ने रुकवाया था विबाद बढ़ने के बाद अधिकारी और उनके परिवार को लेकर एसडीओपी फारेस्ट विभाग के गेस्ट हाउस में चले गये। सवाल उठता है कि जब दूसरा गेस्ट हाउस उपलब्ध था तो उसी गेस्ट हाउस में क्यों रुकवाया गया जहा महिला अधिकारी रुकी थी? अब सवाल यह भी उठ रहे है कि आपात स्थिति में एक आईपीएस को राज्य से बाहर जाने की अनुमति और छुट्टी किसने दी ?

गलती एसडीओपी की और ट्रांसफर महिला अधिकारी का… किसके दबाव में?

सरगुजा समाजसेवी और वकील डी के सोनी ने कहा कि एक अधिकारी ही महिला अधिकारी की मर्यादा का सम्मान नहीं करे तो अन्य महिलाओं के सम्मान का क्या होगा? मीडिया में खबर आई कि महिला अधिकारी का ट्रांसफर भी कर दिया गया. गलती एसडीओपी की और ट्रांसफर महिला अधिकारी का… किसके दबाव में ऐसा हो गया, ये पूरी तरह गलत है.

Spread the love

Comment here