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सरकार की नियत पर फिर उठे सवाल!! प्राइवेट स्कूल को फीस ना लेने की सलाह दे रही सरकार.. और खुद केंद्रीय विद्यालय ने फीस वसूलने नोटिस किया जारी…समय पर नहीं दिए तो लगेगी लेट फीस…

प्रणय द्विवेदी, दिल्ली 15 मई 2020.  लॉक  डाउन  के दौरान  सरकार की कार्यवाही पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं. सरकार कहती कुछ और है और करती कुछ और है. सरकार ने लगातार निजी विद्यालयों को नसीहत देते रहे स्कूल की फीस लॉक डाउन के दौरान वसूली के लिए पलकों पर दबाव ना बनाएं. लेकिन जब सरकारी स्कूल खुद नोटिस जारी कर लॉक डाउन के दौरान की फीस वसूली के लिए दबाव बना रहा हो तो फिर शिकायत किससे करें? या फिर सरकार की मंशा यह है कि सिर्फ प्राइवेट स्कूलों को ही फीस नहीं लेने के लिए बताया जाए और खुद वसूली की जाए.

दरअसल केंद्रीय विद्यालय संगठन ने 13 मई 2020 को आदेश जारी कर विद्यार्थियों की फीस जमा करने को कहा है फीस ऑनलाइन जमा होगी 22 मई से फीस जमा करना शुरू होगा और 21 जून तक जमा करा सकेंगे.

यह फीस पहले क्वार्टर अर्थात अप्रैल-मई-जून की है. जिसे बिना लेट हुए पलकों को फीस जमा करनी है समय पर नहीं जमा करने पर लेट फीस भी लगेगी.

 

इस आदेश के बाद प्राइवेट स्कूल के संचालकों को फीस वसूलने के लिए बल मिलेगा क्योंकि अगर सरकार द्वारा संचालित स्कूल फीस वसूलने के लिए दबाव बना रहे हैं तो प्राइवेट स्कूलों को मना कैसे किया जा सकता है.

बता दे देशभर में इस बात की मांग उठती रही है कि लॉक डाउन के दौरान बच्चों की फीस माफ की जाए लेकिन इस आदेश के बाद यह निश्चित हो गया है कि सरकार फीस माफ करने की ओर कोई कदम बढ़ाने नहीं जा रही है.

आपको बता दे इसके पहले 29 मार्च 2020 को केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक सर्कुलर आया था जिसमें प्राइवेट संस्थाओं को उनके कर्मचारियों की तनख्वाह नहीं काटने कहा गया था उसके कुछ ही दिन बाद सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के डीए रोकने के आदेश जारी कर दिए जिसके बाद सरकार की जमकर किरकिरी हुई.

बात यहीं नहीं रुकी प्राइवेट संस्थाओं के मालिक सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ गए और आज ही सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को निरस्त कर दिया और यह कह दिया कि निजी संस्थाओं पर वेतन देने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता है किसी भी संस्था के ऊपर वेतन नहीं देने के कारण कोई कानूनी कार्यवाही ना की जाए

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