छत्तीसगढ़

लाकडाउन के चलते मची लूट: कंट्रोल दुकाने हुये आउट ऑफ कंट्रोल ? गरीबो से शक्कर देने के नाम पर महज पांच दिनों में कमाये करोड़ो रुपय ?

रीतेश तिवारी, दुर्ग 08 अप्रैल 2020. छत्तीसगढ़ में लाकडाउन के चलते गरीबो को दो किलो शक्कर देने के नाम पर लूट मची हुई है। जी हाँ एसजी न्यूज़ नेटवर्क की पड़ताल में जो खबर हम आप तक पहुचा रहे है उसे जान कर आप भी हैरान हो जाएंगे की आखिर इस आपातकाल के हालात में ये कैसी लूट है।

प्रदेश भर के शासकीय राशन दुकानों में इन दिनों भारी भीड़ दिखाई दे रही है और ये भीड़ उन गरीबो की है जो दो वक्त का राशन के जुगाड़ में कई घंटों खड़ी रहती है। राज्य सरकार के तरफ से गरीबी की जिंदगी बसर करने वालो को अप्रेल और मई महीने का राशन मुफ्त में दिया जा रहा है राशन में मिलने वाला मुफ्त सिर्फ चावल है जिसकी कीमत पहले महज एक रु थी जो आज मुफ्त कर दी गयी है.और चावल के साथ मे प्रत्येक हितग्राही को दो किलो शक्कर भी देना अनिवार्य किया गया है. लेकिन शक्कर मुफ्त में नही है इसके लिए सरकार प्रत्येक हितग्राही से 17 रु प्रति किलो के हिसाब से पैसे ले रही है.

भ्रस्टाचार का सारा खेल यही 17 रु से शुरू हो गया। प्रदेश भर के सैकड़ो राशन दुकानो में गरीबो से 17 रु की जगह सीधे 20 रु लिए जा रहे है. यानी दो किलो शक्कर की कीमत 40 रु हो रही है। नियमानुसार 34 रु होने चाहिए लेकिन राशन दुकान वाले 34 कि जगह सीधे 40 रु वसूल रहे है। यानी प्रत्येक हितग्राही से 6 रु अधिक।

अब आप को समझाते है कि कैसे महज एक हफ्ते में ये राशन दुकान वाले लाखो रू गरीबो से वसूल डाले है। प्रदेश भर में 65 लाख 39 हजार 184 राशन कार्डधारी है. सामान्य जिन्हें एपीएल राशन कार्डधारी कहा जाता है उनकी संख्या 8 लाख 82 हजार 883 है । पिछले 5 दिनों में प्रदेश भर के राशन दुकानों में लगभग 28 लाख हितग्राहियों को राशन वितरण किया गया जिनमे गरीबी रेखा के नीचे यापन करने वाले हितग्राहियों की संख्या 25 लाख के आस पास है जिन्हें राशन में मिलने वाली शक्कर के बंटवारे में खेल किया गया है। इन्ही 25 लाख हितग्राहियों को प्रति हितग्राही दो किलो शक्कर भी बाटी गई है जिसका सरकारी मूल्य मात्र 17 रु है लेकिन प्रदेश भर के 80 प्रतिशत राशन दुकानों में 17 रु की जगह सीधे 20 रु प्रति किलो लिया गया है. जो दो किलो में सीधे 40 रु वसूले गये है यानी एक हितग्राही से 6 रु ज्यादा रकम वसूल लिया गया है। अगर प्रदेश के 20 लाख लोगों से 6 रुपय राशन दुकानों ने वसूले है तो कुल रकम वसूली गई एक करोड़ 20 लाख रुपए मात्र एक हफ्ते में ।

प्रदेश के 29 जिलों में ये कारनामा इस आपातकाल के दौरान खेला जा रहा है कुछ जगह राशन दुकानों की शिकायत भी हुई है और दुकानों का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है लेकिन भूखे प्यासे लोग राशन दुकानों में घंटे खड़े हो कर राशन लेने के जुगत में लगे हुए है तो वो कहा तक शिकायत करेंगे। एक तरफ राज्य सरकार ने एक रुपय में मिलने वाला चावल को लाकडाउन के चलते मुफ्त कर दिया है तो वही गरीबो से शक्कर जे नाम पर 6 रु अधिक वसूली भी की जा रही है। गरीब हितग्राहियों का कहना है जब चावल मुफ्त किया गया था तो शक्कर भी मुफ्त कर देना था भले उसके वजन में कमी कर दी जाती। एक तरफ मुफ्त में चावल बाटने का ढिंढोरा पूरे देश मे फैल गया तो वही गरीबो को शक्कर बाटने के चक्कर मे प्रदेश भर के अधिकतम राशन दुकानों ने करोड़ो रुपय गरीबो से वसूल डाले। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलेगी तो कार्यवाही करेंगे लेकिन शिकायत कौन करेगा इस भीषण भुखमरी के हालात में जहां हर गरीब दो वक्त के राशन की जुगत में लगा है तो शिकवा शिकायत कहा होगी और कैसे करेगी क्योकि किसी भी राशन दुकानों में सरकार ने कोई भी शिकायत नंबर नही लिखा है और न ही शक्कर का मूल्य बताया गया है। अब देखना होगा छत्तीसगढ़ राज्य सरकार कोई ठोस कार्यवाही करती है या नही ।

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