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क़ृषि ऋण और सर्थन मूल्य का वन अधिकार पत्र प्राप्त आदिवासियों को नहीं मिल रहा लाभ…वनवासी किसानों को पंजीयन से जोड़कर लाभ दिए जाने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सामाजिक कार्यकर्त्ता ममता ने दिया सुझाव

रायपुर, 7जुलाई 2020, छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासियों को वन अधिकार पत्र जिए है जिसके बाद आदिवासियों में ख़ुशी व्याप्त है इन अधिवासियों को शासन की कई योजनाओं जैसे ऋण और समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

सामाजिक कार्यकर्त्ता ममता शर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर कहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि, वनाधिकार पत्र प्राप्त वनवासी किसानों को न तो कृषि ऋण दिया जा रहा है और न ही समर्थन मूल्य पर उनका धान खरीदा जाता है। महोदय से निवेदन है कि सरकार किसानों के हित मे निर्णय लेते हुए दिशा निर्देश तय करे.

सरकार ग्रामीण आदिवासी व गरीब किसानो को अंत्योदय श्रेणी मे होने की वजह से ही उन्हें वनभूमि का पट्टा देती है वह अमीर होते तो उन्हें इस श्रेणी में पट्टा नहीं दिया जाता। वन अधिकार पट्टा प्राप्त किसान ही आज सबसे ज्यादा जरूरतमंद है और वही लोग आज तक कृषि ऋण तथा समर्थन मूल्य पर धान बेचने के अधिकार से वंचित हैं।

छत्तीसगढ़ में लगभग एक लाख से अधिक संख्या में वनभूमि के पट्टे धारी आदिवासी किसान है, जो उक्त जमीन पर धान पैदा कर रहे हैं। लेकिन आज पर्यंत तक उन किसानों को किसान बतौर मिलनें वालीं सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उनको न तो कृषि साख सहकारी समितियों में सदस्य बनाया जाता हैऔर न ही “किसान बतौर पंजीयन किया गया है।उनके पंजीयन हेतु सरकार के द्वारा आज तक किसी प्रकार के नियम या निर्देश भी नहीं बनाया गया है।

जिस वजह से यह किसान बिचौलियों या बनियों के हाथ 1100, 1200 और 1300 रू तक में अपने धान को बेचने के लिए मजबूर हैं ।उनको सोसाइटी से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती, नाही उन्हें 0% मे ऋण मिल सकता है खाद बीज सबके लिए अभाव बना रहता है। संविधान के अनुसार आदिवासियों के विकास के लिए आदिम जाति विकास विभाग कार्यरत है और उसके मंत्री भी आदिवासी वर्ग के ही होते हैं, फिर भी लाखों आदिवासियों को उनके कानूनी अधिकार से वंचित रखा गया है।

माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी छत्तीसगढ़ प्रदेश में लगातार किसानों के हित में बहुत अच्छे निर्णय लेती आ रही है तो बहुत बड़ी संख्या में पंजीयन से वंचित किसानों को इसका लाभ देते हुए उनके बेहतर खेती भविष्य और जीवन के लिए एक नई और एक नेक पहल करेगी इसी उम्मीद की है.

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