December 4, 2020

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कोरोना के खिलाफ में 100 साल से ज्यादा पुराना अग्रेजों का बनाया कानून सरकार है बड़ा हथियार, सरकार के आदेश, दिशा-निर्देश का करें पालन नहीं तो जाना पड़ेगा जेल, जानिए क्या है अपेडमिक डिजीज एक्ट 1897 के कानूनी प्रावधान?

ब्यास मुनि द्विवेदी, 23 मार्च 2020, कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के खिलाफ पूरे विश्व में जंग छिड़ी हुई है. दुनियाभर की सरकारें ऐतिहासिक लड़ाई लड़ रही हैं. इतने बड़े अभियान में सरकार के पास इस प्रकार के क्या कानूनी प्रावधान हैं जिससे सरकार जनता को न सिर्फ रोक सकती है बल्कि सरकार के आदेश निर्देश का पालन नहीं करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनता से राज्य और केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी है, कि लोग घर में रहे वेवजह घर से न निकले। सरकार की हिदायत देने के बाद भी अगर लोग नहीं मानते तो सरकार कानूनी सख्त कदम उठाने को मजबूर होगी।

क्या है महामारी से वचाव के कानूनी प्रावधान?
Epedemic Diseases Act 1897 के तहत अब राज्य और केंद्र सरकारें विशेष अधिकारों के जरिए कोरोना की रोकथाम के प्रयास कर सकेंगी. जो दिशानिर्देशों का पालन करता नहीं दिखेगा, इस कानून के तहत सरकार किसी भी उस व्यक्ति को जेल में डाल सकती हैं.

दरअसल इस कानून को पहली बार 1896 में तब लागू किया गया था जब बॉम्बे प्रेसिडेंसी में प्लेग महामारी फैल गई थी. इस कानून में सिर्फ 4 धाराएं है. इसके तहत केंद्र या राज्य सरकार को विशेष अधिकार मिलते हैं कि वो किसी इलाके को डैंजर जोर मान सकती हैं. इस इलाके में आने-जाने वाले किसी भी व्यक्ति या किसी अन्य चीज की जांच सरकार कर सकती है. लोगों को अलग रख सकती है.

अधिनियम की धारा- 2A के मुताबिक केंद्र सरकार को ये अधिकार प्राप्त है कि वो देश के बंदरगाहों, सीमाओं पर आने वाले किसी की जांच कर सकती है. अगर किसी विदेशी यात्री के जरिए महामारी का वायरस फैलने की आशंका होती है तो सरकार ये उपाय कर सकती है.

क्या है सजा का प्रावधान?
Epedemic Diseases Act 1897 की धारा 3 के तहत अगर कोई शासकीय आदेश और दिशा निर्देश का उलंघन करता है तो भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 188 के अंतरगत दंडनीय होगा,

क्या है धारा 188
लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा।

  1. यदि ऐसी अवज्ञा – विधिपूर्वक नियुक्त व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति, कारित करे।
    सजा – एक मास सादा कारावास या दौ सौ रुपए आर्थिक दण्ड या दोनों।
    यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
  2. यदि ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को संकट कारित करे –
    सजा – छह मास कारावास या एक हजार रुपए आर्थिक दण्ड या दोनों।
    यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
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